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    कोर्ट के आदेश से मिली जमीन का दाखिल-खारिज अब होगा आसान, बिहार सरकार ने जारी किए नए नियम

    Updated: Thu, 28 May 2026 04:44 AM (GMT+05:30)

    Bhumi Portal Mutation:बिहार राजस्व विभाग ने कोर्ट के आदेश से मिली जमीन के दाखिल-खारिज के लिए नए और स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। यह प्रक्रिया अब पूरी त ...और पढ़ें

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    डिजिटल डेस्क, मुजफ्फरपुर। Revenue Department Bihar, Online Dakhil Kharij Process: बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने न्यायालय के आदेश या डिक्री (Court Decree) के माध्यम से प्राप्त भूमि के दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) को लेकर नए और स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
     
    अक्सर देखा जाता है कि कोर्ट से केस जीतने या पारिवारिक बंटवारे की डिक्री मिलने के बाद भी लोग सरकारी रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने के लिए परेशान होते हैं।
     
    विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसी जमीनों का दाखिल-खारिज अब पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल व्यवस्था के तहत ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा। भू-संपदा प्रबंधन और सुशासन को मजबूत बनाने के उद्देश्य से इस प्रक्रिया को बेहद सरल कर दिया गया है। इसकी जानकारी एक्स पोस्ट के माध्यम से भी दी गई है।  

    इन कागजातों को पहले ही कर लें तैयार 

    राजस्व विभाग के अनुसार, आवेदन प्रक्रिया शुरू करने से पहले सभी आवश्यक दस्तावेजों को स्कैन करके 1 MB से कम साइज की एक सिंगल PDF फाइल बना लेनी चाहिए। आवश्यक दस्तावेजों की सूची इस प्रकार है: 
    • न्यायालय के आदेश की प्रमाणित प्रति: सिविल कोर्ट या संबंधित न्यायालय से जारी मूल डिक्री या जजमेंट की सर्टिफाइड कॉपी। 
    • सर्टिफिकेट ऑफ डिलीवरी (यदि उपलब्ध हो): यदि न्यायालय के माध्यम से जमीन पर भौतिक दखल-कब्जा (Execution of Decree) दिलाया गया है। 
    • भूमि का पुराना रिकॉर्ड: पुराना केवला (Deed), खतियान या वर्तमान जमाबंदी की प्रति जिससे खाता, खेसरा और रकबा स्पष्ट हो सके। 
    • पारिवारिक वंशावली: यदि जमीन खानदानी बंटवारे के मुकदमों के तहत प्राप्त हुई है। 
    • पहचान पत्र: आवेदक का वैध पहचान पत्र जैसे [Aadhaar Redacted] या अन्य सरकारी आईडी। 

    ऑनलाइन आवेदन करने के मुख्य चरण 

    आवेदक स्वयं अथवा अपने नजदीकी वसुधा केंद्र (CSC) की मदद से बिहार सरकार के आधिकारिक पोर्टल biharbhumi.bihar.gov.in पर जाकर नीचे दिए गए चरणों के तहत आवेदन पूरा कर सकते हैं:
     
    • लॉग-इन और रजिस्ट्रेशन: सबसे पहले बिहार भूमि पोर्टल पर जाकर "ऑनलाइन दाखिल-खारिज आवेदन करें" विकल्प को चुनें। अपने मोबाइल नंबर और ओटीपी (OTP) के जरिए पंजीकरण कर पोर्टल पर लॉग-इन करें। 
    • क्षेत्र का चयन: लॉग-इन करने के बाद संबंधित जिला और उस अंचल (Block) का चयन करें जहां वह भूमि स्थित है, फिर "Apply New Mutation" पर क्लिक करें। 
    • म्यूटेशन के प्रकार का चयन: आवेदन फॉर्म में 'Mutation Type' के ड्रॉपडाउन मेनू से अनिवार्य रूप से Court Order या Decree का चयन करें। यहाँ सामान्य खरीद-बिक्री (Sale/Purchase) का विकल्प न चुनें। 
    • जमीन व कोर्ट का विवरण: इसके बाद मौजा, खाता संख्या, खेसरा (प्लॉट) नंबर, चौहद्दी और रकबे की सटीक जानकारी भरें। साथ ही कोर्ट का नाम, केस नंबर और आदेश जारी होने की तिथि दर्ज करें। 
    • दस्तावेज अपलोड और सबमिशन: अंत में तैयार की गई पीडीएफ फाइल को अपलोड करें और कैप्चा कोड भरकर "Preview & Submit" करें। सभी विवरणों की जांच के बाद फाइनल सबमिट करते ही एक वाद संख्या (Case Number) जनरेट होगी, जिसे भविष्य के लिए सुरक्षित प्रिंट कर लें। 

    आवेदन के बाद अंचल कार्यालय की कार्यवाही 

    ऑनलाइन आवेदन जमा होने के बाद स्क्रूटनी की प्रक्रिया शुरू होती है। अंचल अधिकारी (CO) इस आवेदन को संबंधित हलके के राजस्व कर्मचारी और अंचल निरीक्षक (CI) को फारवर्ड करते हैं। राजस्व कर्मी कोर्ट के आदेश और सरकारी लगान पंजी के रिकॉर्ड का भौतिक व कागजी मिलान करते हैं।
     
    इसके बाद अंचल कार्यालय द्वारा दूसरे पक्ष (प्रतिवादी) को एक नोटिस (Form-12) जारी किया जाता है। इस नोटिस का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि किसी को इस म्यूटेशन से आपत्ति है, तो वह 15 से 21 दिनों के भीतर अपनी बात रख सके। 

    तय समय सीमा और देरी होने पर नियम 

    राजस्व विभाग के नियमों के अनुसार, न्यायालय का आदेश आने के 90 दिनों के भीतर दाखिल-खारिज के लिए आवेदन कर देना अनिवार्य है। यदि किसी कारणवश 90 दिनों से अधिक की देरी हो चुकी है, तो ऑनलाइन आवेदन के समय ही आवेदक को एक 'विलंब माफी याचिका' (Delay Condonation Petition) भी साथ में संलग्न करनी होगी।
     
    इस याचिका को स्वीकार या अस्वीकार करने का विवेकाधिकार संबंधित अंचल अधिकारी के पास सुरक्षित रहता है। यदि कोई वैध आपत्ति प्राप्त नहीं होती है, तो अंचल अधिकारी आदेश पारित कर पुरानी जमाबंदी को संशोधित करते हुए आवेदक के नाम पर नई जमाबंदी कायम कर देते हैं, जिसके बाद भूमि का सरकारी लगान (रसीद) ऑनलाइन काटा जा सकता है।