पंचायत चुनाव 2026 के लिए आरक्षण रोस्टर निर्धारित, 2011 की जनसंख्या के आधार पर निर्धारण
Bihar Panchayat Election 2026: मुजफ्फरपुर में बिहार पंचायत चुनाव 2026 के लिए आरक्षण रोस्टर 2011 की जनसंख्या के आधार पर तय किया जा रहा है। राज्य निर्वा ...और पढ़ें
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यह तस्वीर जागरण आर्काइव से ली गई है।

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जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Panchayat Election Update: बिहार पंचायत चुनाव 2026 को लेकर आरक्षण रोस्टर की तस्वीर अब साफ होने लगी है। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी गाइडलाइन के अनुसार, इस बार भी वर्ष 2011 की जनसंख्या को आधार बनाकर आरक्षण का निर्धारण किया जाएगा।
प्रपत्र एक का होगा प्रकाशन
आरक्षण प्रक्रिया के तहत ‘प्रपत्र एक’ का प्रकाशन किया जाएगा, जिसमें विभिन्न पदों का वर्गीकरण तय होगा। इस कार्य को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन ने 16 पदाधिकारियों को जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी के रूप में नामित किया है।
डिजिटल माध्यम से पूरी प्रक्रिया
निर्देश दिया गया है कि प्रपत्र एक से जुड़े सभी कार्य डिजिटल माध्यम से किए जाएंगे। किसी भी तकनीकी समस्या की स्थिति में जिला आईटी प्रबंधक से संपर्क कर कार्य को निर्बाध रूप से पूरा करने को कहा गया है।
नगर निकाय बनने से बदली स्थिति
पिछले पंचायत चुनाव (2016) में 2015 में प्रकाशित प्रपत्र एक के आधार पर चुनाव हुए थे। लेकिन अब कई ग्रामीण क्षेत्र नगर निकायों में शामिल हो चुके हैं, जिससे रोस्टर निर्धारण की प्रक्रिया जटिल हो गई है।
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इसी वजह से इस बार नए सिरे से और डिजिटल तरीके से प्रपत्र एक का प्रकाशन किया जा रहा है।
पदों का होगा वर्गीकरण
प्रपत्र एक में जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, सरपंच, ग्राम पंचायत सदस्य और पंच को विभिन्न वर्गों में बांटा जाएगा। इससे आरक्षण का स्पष्ट ढांचा सामने आएगा।
विलोपित वार्ड का अलग विवरण
इस बार विलोपित वार्डों का ब्योरा भी अलग से दर्ज किया जाएगा, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि किन क्षेत्रों की आबादी नगर निकायों में शामिल हो गई है।
जानिए पूरा शेड्यूल
- 27 अप्रैल: प्रपत्र एक का प्रारूप प्रकाशन
- 11 मई तक: आपत्तियां दर्ज करने की अंतिम तिथि
- 14 मई तक: आपत्तियों का निष्पादन
- 18-22 मई: अपील वादों का निपटारा
- 25 मई: अंतिम प्रकाशन
- 29 मई: जिला गजट में प्रकाशन
चुनावी गणित का आधार बनेगा डेटा
स्पष्ट है कि 2011 की जनगणना के आंकड़े ही पंचायत चुनाव 2026 के आरक्षण और प्रतिनिधित्व की दिशा तय करेंगे। ऐसे में प्रशासन की कोशिश है कि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और त्रुटिरहित रहे, ताकि आगे किसी तरह का विवाद न हो।