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    विदेशी डिग्री से लेकर सियासत के शिखर तक, BJP विधायक राजू सिंह का उतार-चढ़ाव भरा रहा है सफर

    Updated: Sat, 04 Jul 2026 04:38 PM (IST)

    Bihar BJP MLA Raju Singh: मुजफ्फरपुर के साहेबगंज से बीजेपी विधायक डॉ. राजू कुमार सिंह का राजनीतिक सफर बेहद दिलचस्प रहा है, जिसमें उनकी उच्च शिक्षा, अं ...और पढ़ें

    राजू कुमार सिंह। फाइल फोटो

    राजू कुमार सिंह। फाइल फोटो

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    डिजिटल डेस्क, मुजफ्फरपुर। Raju Singh Sahebganj MLA: जिले की साहेबगंज विधानसभा सीट से दबदबा रखने वाले भाजपा विधायक डॉ. राजू कुमार सिंह इन दिनों अपने राजनीतिक और कानूनी घटनाक्रमों को लेकर देश-प्रदेश की मीडिया में खासी चर्चा बटोर रहे हैं।

    उत्तर बिहार की राजनीति में एक बेहद रसूखदार चेहरे के रूप में पहचान रखने वाले राजू सिंह का सफर जितना आलीशान रहा है, उतना ही विवादों और कानूनी उतार-चढ़ाव से भरा भी है।

    एक उच्च शिक्षित इंजीनियरिंग छात्र से लेकर अंतरराष्ट्रीय दवा कारोबारी और फिर बिहार सरकार में मंत्री बनने तक की उनकी पूरी कहानी बेहद दिलचस्प है।

    विदेशी यूनिवर्सिटी से पढ़ाई और डॉक्टरेट की उपाधि

    डॉ. राजू कुमार सिंह का जन्म 12 जनवरी 1970 को हुआ था। वे बिहार के गिने-चुने सबसे उच्च शिक्षित राजनेताओं में से एक हैं। राजू सिंह ने यूक्रेन की मशहूर एल.वी.ओ.वी. पॉलिटेक यूनिवर्सिटी (L.V.O.V. Polytech University) से बी.टेक (B.Tech) और एम.टेक (M.Tech) की डिग्री हासिल की है।

    तकनीकी शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने अपनी शैक्षणिक यात्रा को आगे बढ़ाया और महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी से पीएचडी की मानद उपाधि भी प्राप्त की, जिसके बाद उनके नाम के आगे 'डॉक्टर' जुड़ा।

    विदेश तक फैला दवा का कारोबार

    सियासत के मैदान में कदम रखने से पहले राजू सिंह एक स्थापित और बड़े बिजनेसमैन के रूप में अपनी पहचान बना चुके थे। वे मुख्य रूप से फार्मास्युटिकल (दवा निर्माण और सप्लाई) के बड़े व्यवसाय से जुड़े हैं। उनका यह कारोबार केवल भारत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि रूस, अमेरिका और कई अन्य देशों तक फैला हुआ है।

    अपनी इसी व्यावसायिक पृष्ठभूमि के कारण वे बिहार के सबसे अमीर विधायकों की सूची में शुमार किए जाते हैं। उनके पास अरबों रुपये की चल-अचल संपत्ति के साथ-साथ कई लग्जरी गाड़ियां और हथियार भी हैं। उनकी पत्नी भी बिहार में राजनीतिक रूप से सक्रिय रही हैं और विधान परिषद (MLC) की सदस्य रह चुकी हैं।

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    लोजपा से राजनीतिक शुरुआत

    राजू सिंह का चुनावी राजनीति में प्रवेश साल 2005 के दौर में हुआ था। उन्होंने सबसे पहले फरवरी 2005 के विधानसभा चुनाव में रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के टिकट पर साहेबगंज सीट से चुनाव लड़ा और पहली बार में ही जीत दर्ज कर विधानसभा पहुंचे।

    हालांकि, राज्य में किसी को बहुमत न मिलने के कारण जब अक्टूबर 2005 में दोबारा चुनाव हुए, तो राजू सिंह ने पाला बदल लिया। वे नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (JDU) में शामिल हो गए और जेडीयू के टिकट पर दोबारा साहेबगंज से विधायक चुने गए। इसके बाद साल 2010 के विधानसभा चुनाव में भी जेडीयू के टिकट पर उन्होंने अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखा।

    भाजपा और वीआईपी के रास्ते दोबारा वापसी

    साल 2015 के चुनाव से पहले जब बिहार के सियासी समीकरण बदले, तो राजू सिंह ने जेडीयू का साथ छोड़ दिया और भाजपा में शामिल हो गए। हालांकि, 2015 की 'महागठबंधन' लहर में उन्हें राजद के रामविचार राय के हाथों शिकस्त झेलनी पड़ी।

    इसके बाद साल 2020 के विधानसभा चुनाव में साहेबगंज सीट एनडीए गठबंधन के तहत मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के खाते में चली गई।

    राजू सिंह वीआईपी के सिंबल पर मैदान में उतरे और चौथी बार जीत दर्ज की। मार्च 2022 में मुकेश सहनी से मतभेदों के बाद वे वीआईपी के अन्य विधायकों के साथ भाजपा में शामिल हो गए।

    इसके बाद 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने भाजपा के टिकट पर साहेबगंज से पांचवीं बार शानदार जीत दर्ज की।

    नीतीश कैबिनेट में मंत्री पद

    राजू सिंह के राजनीतिक कद को तब बड़ी पहचान मिली जब उन्हें नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में कैबिनेट मंत्री (पर्यटन विभाग) की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस पद ने मुजफ्फरपुर और पूरे उत्तर बिहार में उनके प्रभाव को और मजबूत कर दिया।

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