Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    बदलते मौसम से निपटने के लिए विकसित होंगी जलवायु सहनशील लीची की नई किस्में

    Updated: Wed, 27 May 2026 07:17 PM (GMT+05:30)

    Bihar Agriculture News: राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र मुजफ्फरपुर, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए जलवायु सहनशील लीची की नई किस्में विकसि ...और पढ़ें

    मौसम की असामान्य परिस्थितियों से किसानों को नुकसान हो रहा है। फाइल फोटो

    मौसम की असामान्य परिस्थितियों से किसानों को नुकसान हो रहा है। फाइल फोटो

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Litchi Research: राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र अब बदलती जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए जलवायु सहनशील लीची किस्मों के विकास की दिशा में नई पहल करेगा। इसके लिए संस्थान सरकार को 15 एकड़ अतिरिक्त भूमि उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भेजेगा।

    नई किस्मों के विकास पर जोर

    केंद्र के निदेशक डॉ. बिकास दास ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण लीची उत्पादन पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में ऐसी किस्में विकसित करने की जरूरत है जो मौसम की असामान्य परिस्थितियों को सहन कर सकें।

    उन्होंने कहा कि संस्थान इस दिशा में सशक्त प्रजनन और किस्म विकास कार्यक्रम चला रहा है। इसके तहत हजारों संकर पौधों का सृजन और मूल्यांकन किया जाता है, जिनमें से अंततः एक या दो पौधे ही संभावित नई किस्म के रूप में चयनित हो पाते हैं।

    अतिरिक्त जमीन की जरूरत

    डॉ. दास ने बताया कि वर्तमान में संस्थान के पास उपलब्ध भूमि बड़े स्तर पर अनुसंधान और मूल्यांकन कार्यों के लिए पर्याप्त नहीं है। वैज्ञानिकों को प्रयोगात्मक प्लॉट की प्रभावी निगरानी और प्रबंधन के लिए आसपास कम से कम 15 एकड़ अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता है।

    खबरें और भी

    इसी को लेकर सरकार को प्रस्ताव भेजने की तैयारी की जा रही है।

    मौसम से लीची फसल को नुकसान

    उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में मौसम की असामान्य घटनाओं के कारण लीची फसलों को गंभीर क्षति हुई है। तेज गर्मी, अनियमित बारिश और अन्य जलवायु परिवर्तन संबंधी प्रभावों से उत्पादन प्रभावित हो रहा है।

    इस चुनौती से निपटने के लिए लीची और अन्य फल फसलों की जलवायु सहनशीलता बढ़ाने वाले विशेष कार्यक्रम लागू करने की जरूरत बताई गई है।

    कैनोपी प्रबंधन और प्रूनिंग तकनीक पर फोकस

    विशेषज्ञों ने लीची वृक्षों की कैनोपी की ऊंचाई नियंत्रित करने, छंटाई और पुनर्जीवन तकनीक अपनाने पर भी जोर दिया। इसके लिए छोटे यांत्रिक प्रूनरों पर अनुदान और कस्टम हायरिंग सिस्टम को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई गई।

    डॉ. दास ने कहा कि स्पेन से लखनऊ लाए गए उन्नत प्रूनर का आम के पेड़ों की छंटाई में सफल उपयोग किया जा चुका है, जिसे लीची बागानों में भी उपयोगी बनाया जा सकता है।