गुरहन घास बनी किसानों की सबसे बड़ी दुश्मन, मुजफ्फरपुर में शुरू होगी विशेष जांच
बिहार के मुजफ्फरपुर में विदेशी गुरहन घास कटौझा से कटरा तक तेजी से फैलकर धान, मक्का जैसी फसलों और पशुधन के लिए बड़ा संकट बन गई है। कृषि निदेशालय ने इस ...और पढ़ें

मुजफ्फरपुर में तेजी से फैल रही विदेशी गुरहन घास
HighLights
घास से धान, मक्का, सरसों और तोरी जैसी प्रमुख फसलें प्रभावित
कटरा सीमा तक बांध किनारे गुरहन घास तेजी से फैल चुकी है
अमरेन्द्र तिवारी, मुजफ्फरपुर। बिहार में मुजफ्फरपुर जिले में कटौझा से कटरा सीमा तक बांध किनारे तेजी से फैल रही विदेशी गुरहन घास अब खेती और पशुधन दोनों के लिए बड़ा संकट बन गई है। हजारों हेक्टेयर में फैल चुकी इस घास से धान, मक्का, सरसों और तोरी जैसी प्रमुख फसलें प्रभावित हो रही हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए कृषि निदेशालय ने तत्काल जांच और नियंत्रण के निर्देश जारी किए हैं।
निदेशालय ने दिए जांच के निर्देश
विदेशी गुरहन घास के तेजी से फैलाव पर कृषि निदेशक मुकेश कुमार लाल ने जिला कृषि पदाधिकारी को पत्र भेजकर प्रभावित क्षेत्रों की तत्काल जांच कराने का निर्देश दिया है। साथ ही विशेष सर्वेक्षण कर तकनीकी उपायों के जरिए इस हानिकारक घास के उन्मूलन की कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है।
कटौझा से कटरा तक बढ़ा दायरा
निदेशक के अनुसार औराई एवं कटरा प्रखंड में कटौझा से कटरा सीमा तक बांध किनारे गुरहन घास तेजी से फैल चुकी है। इसके कारण धान, मक्का, सरसों और तोरी समेत कई फसलों की पैदावार प्रभावित हो रही है। किसानों को लगातार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
जंगली जानवर भी बने नई चुनौती
गुरहन घास के घने फैलाव वाले इलाकों में जंगली सूअर और घोड़परास ने अपना ठिकाना बना लिया है। ये जानवर खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे किसानों की परेशानी और बढ़ गई है। कृषि विभाग ने सर्वे के दौरान इस पहलू का भी आकलन करने के निर्देश दिए हैं।
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मंत्री की पहल के बाद बढ़ी कार्रवाई
पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री रामा निषाद ने कृषि मंत्री को पत्र लिखकर इस समस्या की गंभीरता से अवगत कराया था। इसके बाद कृषि निदेशालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला स्तर पर जांच और आवश्यक कार्रवाई शुरू करने का फैसला लिया है।
बाढ़ के बाद शुरू हुई थी समस्या
जानकारी के अनुसार वर्ष 2007 की बाढ़ के बाद बांध निर्माण के दौरान लाई गई मिट्टी के साथ गुरहन घास के बीज भी क्षेत्र में पहुंच गए। शुरुआत में यह केवल एक कट्ठा जमीन तक सीमित थी, लेकिन गर्मी के मौसम में इसके बीज हवा के जरिए फैलते गए।
अब यह करीब 19 किलोमीटर क्षेत्र और लगभग पांच हजार हेक्टेयर भूमि में फैल चुकी है। जिस जमीन पर कभी अच्छी खेती होती थी, वहां अब गुरहन घास किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।