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    बिहार में सरकारी जमीन पर खुला खेल, खासमहाल से रक्षा मंत्रालय तक की भूमि पर कब्जा, अवैध जमाबंदी

    By Prem Shankar Mishra Edited By: Ajit kumar
    Updated: Fri, 16 Jan 2026 09:54 PM (IST)

    राजस्व विभाग ने सरकारी जमीन की अवैध जमाबंदी रद्द करने का आदेश दिया है, जिससे मुजफ्फरपुर में कार्रवाई तेज होगी। जिले में खासमहाल, रक्षा मंत्रालय और धार ...और पढ़ें

    Defence Ministry Land Bihar: राजस्व विभाग के सरकारी जमीन की अवैध जमाबंदी रद करने के आदेश के बाद तेज होगी कार्रवाई। फाइल फोटो

    Defence Ministry Land Bihar: राजस्व विभाग के सरकारी जमीन की अवैध जमाबंदी रद करने के आदेश के बाद तेज होगी कार्रवाई। फाइल फोटो

    जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Muzaffarpur Land Scam: राज्य में सरकारी जमीन की अवैध जमाबंदी के खिलाफ राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सख्त निर्देश के बाद मुजफ्फरपुर जिले में वर्षों से दबे पड़े मामलों पर कार्रवाई तेज होने की उम्मीद जगी है।

    विभाग ने स्वतः संज्ञान लेकर 45 दिनों के भीतर अवैध जमाबंदियां रद करने का आदेश जारी किया है। इसके तहत अपर समाहर्ता को लंबित मामलों का निष्पादन सुनिश्चित करना है।

    जिले में खासमहाल, बिहार सरकार, रक्षा मंत्रालय और धार्मिक न्यास से जुड़ी जमीनों पर अवैध जमाबंदी, खरीद-बिक्री और दाखिल-खारिज के गंभीर मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।

    सात वर्षों से लटका मामला

    मुजफ्फरपुर के सिकंदरपुर मन क्षेत्र में खासमहाल की अरबों रुपये मूल्य की जमीन पर अवैध कब्जा और जमाबंदी का मामला बीते सात वर्षों से अपर समाहर्ता के न्यायालय में लंबित है।

    यहां 65 जमाबंदियों के खिलाफ एक साथ सुनवाई चल रही है, लेकिन अब तक न तो जमाबंदी रद हो सकी और न ही जमीन की अवैध खरीद-बिक्री पर रोक लग पाई। हैरानी की बात यह है कि मामले लंबित रहने के बावजूद क्षेत्र में दाखिल-खारिज की प्रक्रिया भी चलती रही।

    रक्षा मंत्रालय की जमीन पर भी कब्जा

    जिले में रक्षा मंत्रालय की जमीन पर अतिक्रमण और अवैध जमाबंदी को लेकर सेना की ओर से बार-बार शिकायतें की गईं। सेना ने अतिक्रमणकारियों के नाम तक प्रशासन को उपलब्ध कराए, लेकिन इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मामले को लंबे समय तक दबाए रखने से प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

    धार्मिक न्यास की जमीन भी नहीं बची

    केवल खासमहाल या रक्षा मंत्रालय ही नहीं, बल्कि बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद की हजारों एकड़ जमीन पर भी अवैध जमाबंदी कायम कर खुलेआम खरीद-बिक्री कर दी गई। इन मामलों में भी फाइलें वर्षों से दबी पड़ी हैं।

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    आयुक्त के तबादले के बाद थम गई कार्रवाई

    सिकंदरपुर मन क्षेत्र में जमीन घोटाले का मामला तब गंभीर हुआ था, जब तत्कालीन प्रमंडलीय आयुक्त अतुल प्रसाद ने इस पर संज्ञान लिया था।
    उन्होंने कैडस्ट्रल और रिवीजनल सर्वे का तुलनात्मक अध्ययन कर खासमहाल जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगाने का निर्देश दिया था। साथ ही 65 जमाबंदियों के खिलाफ मामला अपर समाहर्ता के न्यायालय में भेजा गया था।

    तत्कालीन डीसीएलआर पूर्वी एवं खासमहाल पदाधिकारी अर्जुन रविदास ने नोटिस जारी कर कई मामलों में दाखिल-खारिज रद भी किया, लेकिन आयुक्त के तबादले के बाद कार्रवाई ठप पड़ गई। सात साल बाद भी निर्णय न आना पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है।

    सरकारी जमीन की अवैध जमाबंदी को लेकर सरकार गंभीर है। न्यायालय में लंबित मामलों के साथ-साथ नए मामलों की भी सुनवाई कर आवश्यक आदेश जारी किए जाएंगे।

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    कुमार प्रशांत, अपर समाहर्ता