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बिहार के इन चार रेलवे स्टेशनों पर 82 करोड़ से बदलेगी सिग्नलिंग व्यवस्था, अब सुरक्षित होगी आवाजाही

Published: Fri, 06 Nov 2026 04:57 PM (IST)

Railway Signal Modernization: पूर्व मध्य रेल के समस्तीपुर मंडल में 82.28 करोड़ रुपये की लागत से चार स्टेशनों पर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम लगाया जाएगा।

समस्तीपुर रेल मंडल के प्रमुख स्टेशनों पर सिग्नलिंग व्यवस्था को पूरी तरह आधुनिक बनाने की पहल शुरू कर दी गई है।

समस्तीपुर रेल मंडल के प्रमुख स्टेशनों पर सिग्नलिंग व्यवस्था को पूरी तरह आधुनिक बनाने की पहल शुरू कर दी गई है। 

HighLights

  1. समस्तीपुर मंडल के चार स्टेशनों पर आधुनिक सिग्नलिंग।

  2. 82.28 करोड़ रुपये की लागत से परियोजना।

  3. ट्रेन परिचालन सुरक्षित और तकनीकी बाधाएं कम होंगी।

जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Samastipur Railway Division: पूर्व मध्य रेल के समस्तीपुर मंडल में ट्रेन परिचालन के दौरान आने वाली तकनीकी बाधाओं और सुरक्षा संबंधी चिंताओं से यात्रियों को बड़ी राहत मिलने वाली है।

मंडल के प्रमुख स्टेशनों पर सिग्नलिंग व्यवस्था को पूरी तरह आधुनिक बनाने की पहल शुरू कर दी गई है। इससे ट्रेनों की आवाजाही को न केवल अधिक सुरक्षित बनाया जाएगा, बल्कि परिचालन में भी सुगमता आएगी।

चार स्टेशनों का चयन

परियोजना के तहत मंडल के सीतामढ़ी, रीगा, रक्सौल और नरकटियागंज स्टेशनों पर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम लगाया जाएगा।

इस महत्वपूर्ण योजना पर कुल 82.28 करोड़ रुपये की राशि खर्च की जाएगी। इन चारों स्टेशनों पर इस नई तकनीक के आ जाने से सिग्नल फेल होने या परिचालन में आने वाली बाधाओं से काफी हद तक मुक्ति मिल सकेगी।

आधुनिक तकनीक से लैस

योजना के तहत इन चारों स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम के इनडोर और आउटडोर उपकरण स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए डिजाइन तैयार करने से लेकर उपकरणों की आपूर्ति, इंस्टालेशन, टेस्टिंग और कमीशनिंग तक का पूरा काम किया जाएगा।

इसके साथ ही टेलीकॉम से जुड़े आधुनिक कार्य भी संपन्न होंगे, जिसमें एक सेंट्रलाइज्ड यूनिट और दो एंड केबिन की व्यवस्था शामिल है।

तीन साल में पूरा होगा लक्ष्य

रेलवे प्रशासन ने इस बड़ी परियोजना को पूरा करने के लिए 36 महीने की समयसीमा तय की है। इस आधुनिक सिग्नलिंग प्रणाली के लागू होने से ट्रेनों के परिचालन में समय की बचत होगी और रेलवे का तकनीकी ढांचा मजबूत होगा। जानकारों का मानना है कि इससे ट्रेनों के सुरक्षित संचालन में विश्वसनीयता और अधिक बढ़ जाएगी।

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