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    बिहार में बंद होगी जीविका दीदी की रसोई, गृह विभाग की इकाइयों में संचालन ठप

    Updated: Mon, 03 Aug 2026 08:18 AM (IST)

    बिहार सरकार के गृह विभाग के अधीन संचालित 'जीविका दीदी की रसोई' को अनियमित भुगतान और वित्तीय घाटे के कारण बंद किया जा रहा है। जीविका सीईओ ने बकाया राशि ...और पढ़ें

    मुजफ्फरपुर सहित अन्य इकाइयों में सीईओ ने आधिकारिक आदेश जारी किया है। फाइल फोटो

    मुजफ्फरपुर सहित अन्य इकाइयों में सीईओ ने आधिकारिक आदेश जारी किया है। फाइल फोटो

    HighLights

    1. गृह विभाग की 'जीविका दीदी की रसोई' बंद।

    2. अनियमित भुगतान और वित्तीय घाटा मुख्य कारण।

    3. बकाया भुगतान के बाद ही पूर्ण बंदी संभव।

    जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Bihar Home Department News: बिहार सरकार के गृह विभाग के अधीन संचालित 'जीविका दीदी की रसोई' का संचालन अब पूरी तरह बंद किया जा रहा है। जीविका के सीईओ हिमांशु शर्मा ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी करते हुए गृह विभाग के अपर पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) को अवगत करा दिया है।

    मुजफ्फरपुर स्थित पुलिस लाइन और बीएसएपी-6 (BSAP-6) में संचालित रसोइयों को भी विभागीय निर्देश के तहत बंद कर दिया गया है।

    अनियमित भुगतान बनी मुख्य वजह

    जारी आदेश में बताया गया है कि पुलिस लाइन, पुलिस प्रशिक्षण अकादमी और अन्य इकाइयों में बुनियादी सुविधाओं के अभाव तथा अनियमित भुगतान के कारण यह परियोजना घाटे में चल रही थी।

    अन्नपूर्णा जीविका फूड प्रॉडक्ट्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के माध्यम से संचालित इस सेवा को नियमित कार्यादेश न मिलने और आर्थिक चुनौतियों के चलते आगे चला पाना संभव नहीं हो रहा था।

    बकाया भुगतान की मांग

    जीविका सीईओ ने अपर पुलिस महानिदेशक से गृह विभाग की विभिन्न इकाइयों पर बकाया राशि के शीघ्र भुगतान का अनुरोध किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लंबित राशि मिलने के बाद ही दीदी की रसोई की इकाइयों को तय शर्तों के अनुसार नियमानुसार बंद करने की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। इस व्यवस्था के बंद होने से गृह विभाग की इकाइयों में दीदी की रसोई सेवा पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।

    अधिक सेवन और वित्तीय नुकसान

    स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, पुलिस लाइन व प्रशिक्षण केंद्रों में दीदियों को कई व्यावहारिक समस्याओं से भी जूझना पड़ रहा था। अक्सर निर्धारित मात्रा से अधिक भोजन के सेवन के बावजूद उसका उचित भुगतान नहीं किया जाता था।

    अतिरिक्त पैसे मांगने पर विवाद की स्थिति बनती थी और भीड़ में कई बार बिना भुगतान किए भोजन करने के मामले भी सामने आ रहे थे।

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