खुदीराम बोस की फांसी से पहले अधूरी रह गई थी यह इच्छा, अब हर साल मुजफ्फरपुर में निभाई जा रही परंपरा
अमर बलिदानी खुदीराम बोस की फांसी से पहले सिद्धेश्वरी काली मां का चरणामृत ग्रहण करने की अधूरी इच्छा को अब हर साल मुजफ्फरपुर में प्रतीकात्मक रूप से पूरा ...और पढ़ें

11 अगस्त को बलिदान दिवस पर आयोजित होगा कार्यक्रम।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। आजादी के अमर बलिदानी खुदीराम बोस की शहादत को एक सदी से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन उनकी एक अधूरी इच्छा आज भी लोगों की आस्था और श्रद्धा से जुड़ी हुई है।
फांसी से पहले वह अपने गांव मिदनापुर स्थित सिद्धेश्वरी काली मां का चरणामृत ग्रहण करना चाहते थे, लेकिन उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी। अब वर्ष 2018 से हर साल उनके गांव के लोग इस अधूरे संकल्प को प्रतीकात्मक रूप से पूरा करने के लिए मां का पवित्र चरणामृत लेकर उनकी चिताभूमि मुजफ्फरपुर पहुंचते हैं।
सिद्धेश्वरी काली मंदिर से सौंपा गया चरणामृत
पश्चिम बंगाल के मिदनापुर स्थित सिद्धेश्वरी काली मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के बाद मंदिर प्रबंधन की ओर से हिमाद्री चट्टोपाध्याय ने पवित्र चरणामृत खुदीराम बोस पर शोध करने वाले लेखक एवं शोधकर्ता अरिंदम भौमिक को सौंपा। इसे लेकर वे इस वर्ष भी मुजफ्फरपुर पहुंचेंगे और 11 अगस्त को बलिदान दिवस पर चिताभूमि में अर्पित करेंगे।
शोध के दौरान सामने आई थी अंतिम इच्छा
अरिंदम भौमिक ने बताया कि वर्ष 2018 में शोध के दौरान उन्हें ऐसे दस्तावेज मिले, जिनमें खुदीराम बोस की अंतिम चार इच्छाओं का उल्लेख था। इनमें एक इच्छा अपने गांव की आराध्य देवी सिद्धेश्वरी काली मां का चरणामृत ग्रहण करने की भी थी। फांसी से पहले यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी। तभी से उन्होंने इस अधूरे संकल्प को श्रद्धांजलि के रूप में पूरा करने का संकल्प लिया।
श्रद्धा और इतिहास का अनूठा संगम
अरिंदम भौमिक पिछले कई वर्षों से प्रत्येक 11 अगस्त को मुजफ्फरपुर पहुंचकर केंद्रीय कारा परिसर में आयोजित मुख्य श्रद्धांजलि समारोह और अन्य कार्यक्रमों में शामिल होते हैं। उनका कहना है कि यह केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि अमर बलिदानी खुदीराम बोस के प्रति सम्मान और उनकी स्मृति को जीवंत रखने का प्रयास है।
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सात अगस्त को पहुंचेगा प्रतिनिधिमंडल
इस वर्ष पश्चिम बंगाल से एक प्रतिनिधिमंडल भी मुजफ्फरपुर आ रहा है। इसमें खुदीराम बोस की बड़ी बहन अपरूपा देवी के पौत्र सुभ्रत राय, ममता राय, रिंकी भौमिक, अरिन भौमिक, एरिक भौमिक, मिदनापुर केंद्रीय सुधार गृह के कल्याण पदाधिकारी अनिरुद्ध घोष, सेवानिवृत्त प्राध्यापक डॉ. सुरेश चंद्र दास और चिकित्सक डॉ. भवानी प्रसाद देव शामिल हैं। सभी सदस्य सात अगस्त को मुजफ्फरपुर पहुंचेंगे और बलिदान दिवस के कार्यक्रमों में भाग लेंगे।