महाकाल की शाही पालकी यात्रा में उमड़ा जनसैलाब, हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजा मुजफ्फरपुर
मुजफ्फरपुर में सावन माह में महाकाल सेवा दल द्वारा भव्य शाही पालकी यात्रा निकाली गई, जिसमें हजारों श्रद्धालु 'हर-हर महादेव' के जयघोष के साथ शामिल हुए। ...और पढ़ें

श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर बाबा का स्वागत किया और पालकी के दर्शन के लिए उत्साह दिखाया। सभी फोटो: जागरण
HighLights
महाकाल सेवा दल ने मुजफ्फरपुर में शाही पालकी यात्रा निकाली।
हजारों श्रद्धालु 'हर-हर महादेव' के जयघोष के साथ शामिल हुए।
उज्जैन से लाई गई चंद्रमौलेश्वर प्रतिमा यात्रा का मुख्य आकर्षण।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Muzaffarpur Mahakal Yatra: सावन माह में मुजफ्फरपुर रविवार को शिवमय हो उठा। महाकाल सेवा दल के तत्वावधान में सिकंदरपुर सीढ़ी घाट से भगवान महाकाल की भव्य शाही पालकी यात्रा निकाली गई, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के जयघोष से पूरा शहर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया।
यात्रा का मुख्य आकर्षण उज्जैन से लाई गई भगवान चंद्रमौलेश्वर स्वरूप महाकाल की प्रतिमा रही। फूलों से सजी पालकी में विराजमान महाकाल के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। मार्ग में कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर बाबा का स्वागत किया और पालकी के दर्शन के लिए उत्साह दिखाई दिया।
शाही पालकी यात्रा में जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि इस तरह की धार्मिक यात्राएं समाज में आस्था, एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने का कार्य करती हैं। उन्होंने आयोजन के लिए महाकाल सेवा दल की सराहना भी की।
यात्रा में शिव-पार्वती, राधा-कृष्ण समेत विभिन्न देवी-देवताओं की आकर्षक झांकियां लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं। पारंपरिक बैलगाड़ियों की झांकियों और शिवभक्ति गीतों पर श्रद्धालु पूरे रास्ते झूमते रहे। शोभायात्रा में शामिल घोड़ों ने भी आयोजन की भव्यता बढ़ाई।
महाकाल सेवा दल के कार्यकर्ताओं ने पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं के लिए शरबत, पेयजल और प्रसाद की व्यवस्था की। प्रशासन ने भी सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए थे, जिससे यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।
महाकाल सेवा दल के अध्यक्ष आकाश चौधरी ने बताया कि यात्रा का उद्देश्य सावन में शिवभक्तों को एक सूत्र में जोड़कर भक्ति और सामाजिक समरसता का संदेश देना है। बाबा गरीबनाथ मंदिर में दर्शन के बाद शाम करीब चार बजे सिकंदरपुर सीढ़ी घाट से यात्रा शुरू हुई। इसके बाद सिकंदरपुर, सरैयागंज, जवाहरलाल रोड, कल्याणी चौक, रमना, पानीटंकी चौक और हाथी चौक होते हुए बाबा गरीबनाथ मंदिर पहुंचकर यात्रा का समापन हुआ।