मुजफ्फरपुर में मृत व्यक्ति से कर्ज वसूलने निकला बैंक, रिकवरी शुरू करने पर बैंक पर 50 हजार का जुर्माना
मुजफ्फरपुर में बैंक ऑफ इंडिया को एक मृत व्यक्ति से कर्ज वसूलने की कोशिश के लिए रिकवरी ट्रिब्यूनल पटना ने 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। ट्रिब्यूनल ...और पढ़ें

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है। (फोटो-AI जनरेटेड)
HighLights
बैंक ने मृत व्यक्ति के नाम पर वसूली नोटिस जारी किया।
रिकवरी ट्रिब्यूनल ने बैंक की कार्रवाई को अवैध बताया।
बैंक ऑफ इंडिया पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगा।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर । मुजफ्फरपुर में बैंक की एक बड़ी लापरवाही अदालत की चौखट तक पहुंच गई। दो साल पहले जिस व्यक्ति की मौत हो चुकी थी, उसी के नाम पर बैंक ने रिकवरी नोटिस जारी कर वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी।
मामला रिकवरी ट्रिब्यूनल पटना पहुंचा तो बैंक की कार्रवाई को अवैध करार देते हुए ट्रिब्यूनल ने रिकवरी प्रक्रिया रद कर दी और बैंक पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
60 लाख रुपये के ऋण से जुड़ा है मामला
यह मामला बाबा सोमेश्वर ऑटोमोबाइल बनाम बैंक ऑफ इंडिया से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, शंभू प्रसाद सिंह और अभिषेक सिंह ने वर्ष 2017 और 2019 में बैंक ऑफ इंडिया की मोतीझील शाखा से बाबा सोमेश्वर ऑटोमोबाइल के नाम पर सीसी खाते के माध्यम से 60 लाख रुपये का ऋण लिया था। वर्ष 2022 में बैंक ने इस खाते को एनपीए घोषित कर दिया।
दो साल पहले हो चुकी थी गारंटर की मौत
खाते के एनपीए होने के बाद बैंक ने सितंबर 2022 में संपत्ति के गारंटर सत्यनारायण सिंह के नाम पर रिकवरी नोटिस जारी कर दिया। जबकि सत्यनारायण सिंह का निधन 26 अक्टूबर 2020 को ही हो चुका था। उनके पुत्र शंभू प्रसाद सिंह ने पिता की मृत्यु की लिखित सूचना पहले ही बैंक को दे दी थी। इसके बावजूद बैंक ने मृत व्यक्ति के नाम पर कार्रवाई जारी रखी।
ट्रिब्यूनल पहुंचा मामला, बैंक पर लगा जुर्माना
बैंक की कार्रवाई को गलत बताते हुए शंभू प्रसाद सिंह ने नवंबर 2022 में रिकवरी ट्रिब्यूनल पटना में याचिका दायर की। उन्होंने आरोप लगाया कि बैंक ने गलत तरीके से खाते को एनपीए घोषित किया और ऋण का हिसाब भी सही तरीके से नहीं किया। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद ट्रिब्यूनल ने बैंक की रिकवरी प्रक्रिया को अवैध करार देते हुए रद कर दिया और बैंक पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
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बैंक ने साधी चुप्पी
इस मामले में बैंक ऑफ इंडिया की मोतीझील शाखा के मुख्य प्रबंधक सत्यप्रकाश से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने इस पूरे मामले पर कोई भी टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया।