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    मुजफ्फरपुर में निगमकर्मियों की हड़ताल से दूसरे दिन भी सफाई ठप, शहर में कचरे का अंबार

    Updated: Fri, 31 Jul 2026 11:56 PM (GMT+05:30)

    मुजफ्फरपुर में निगमकर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के दूसरे दिन शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप रही, जिससे गली-मोहल्लों से लेकर डंपिंग प्वाइंट तक कच ...और पढ़ें

    नगर निगम कर्मियों की हड़ताल की वजह से लगा कूड़े का अंबार। फोटो: जागरण

    नगर निगम कर्मियों की हड़ताल की वजह से लगा कूड़े का अंबार। फोटो: जागरण

    HighLights

    1. मुजफ्फरपुर में निगमकर्मियों की हड़ताल से सफाई ठप।

    2. शहर में कचरे का अंबार, बारिश से स्थिति बदतर।

    3. संविदा कर्मियों को स्थायी करने की मुख्य मांग।

    जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Muzaffarpur Municipal Workers Strike: निगमकर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के दूसरे दिन शुक्रवार को भी शहर की साफ-सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप रही। कचरा उठाने के लिए एक भी सफाई वाहन नहीं निकला, जिससे गली-मोहल्लों से लेकर डंपिंग प्वाइंट तक कचरे का ढेर लग गया।

    देर शाम हुई बारिश के बाद कई इलाकों में जमा कचरा सड़क पर फैल गया और जलजमाव से शहर की स्थिति और खराब हो गई।

    बिहार लोकल बाडिज इम्प्लाइज फेडरेशन एवं बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले राज्यभर के शहरी निकायकर्मी गुरुवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। शुक्रवार को हड़ताल के दूसरे दिन भी निगम की सफाई व्यवस्था प्रभावित रही। कई जगह नाले का पानी सड़क पर बहने से लोगों को आवागमन में परेशानी हुई।

    बारिश के पानी के साथ जमा कचरा सड़कों पर फैल गया है। यदि समय पर सफाई नहीं हुई और मौसम साफ होने के बाद तेज धूप निकली तो सड़ रहे कचरे से दुर्गंध और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। शहरवासियों की परेशानी को देखते हुए सफाई व्यवस्था बहाल करना निगम प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है।

    पहली सोमवारी को बाबा गरीबनाथ का जलाभिषेक करने के लिए कांवरियों का शहर में प्रवेश रविवार शाम से शुरू होगा। ऐसे में कांवरिया मार्ग की सफाई व्यवस्था प्रभावित होने से श्रद्धालुओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कचरे और जलजमाव के बीच कांवरियों के गुजरने की स्थिति में उनकी मुश्किलें बढ़ने की आशंका है।

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    उधर, हड़ताली कर्मचारियों ने नगर निगम कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने जुलूस निकालकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। संघर्ष मोर्चा के संयोजक अशोक राय और सह संयोजक सतेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि सरकार लगातार कर्मचारियों के हितों की अनदेखी कर रही है।

    संयुक्त मोर्चा लंबे समय से नगर निकाय स्तर पर संविदा कर्मियों और निगम स्तर से बहाल अतिरिक्त कर्मियों की सेवा स्थायी करने की मांग कर रहा है। आउटसोर्स पर बहाल कर्मियों को नगर निकाय का नियमित कर्मचारी घोषित करने तथा स्थायी कर्मचारियों को एसीपी, एमएसीपी और अंतर वेतन का लाभ देने की भी मांग है। कर्मचारियों का कहना है कि मांगों की अनदेखी के बाद उन्हें हड़ताल का निर्णय लेना पड़ा।

    संघर्ष मोर्चा के नेताओं ने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों को स्वीकार नहीं करती, हड़ताल जारी रहेगी। बिहार लोकल बाडिज इम्प्लाइज फेडरेशन के महामंत्री अशोक कुमार सिंह ने कहा कि राज्य के नगर निकायों में कार्यरत करीब 80 प्रतिशत कर्मचारी दलित, महादलित और वंचित वर्गों से आते हैं।

    अशोक कुमार सिंह ने कहा कि सरकार न तो कर्मचारियों की सेवाओं को स्थायी कर रही है और न ही उनके काम के अनुरूप उचित वेतन और सेवा सुविधाएं दे रही है। उनके अनुसार, आंदोलन सिर्फ वेतन वृद्धि या सेवा स्थायीकरण की मांग तक सीमित नहीं है। यह कर्मचारियों के सम्मान, सामाजिक सुरक्षा और न्यायपूर्ण अधिकारों की रक्षा का संघर्ष है।