Bihar News : टेलीग्राम-मैसेंजर पर रचा गया NEET का जाल, कोर्ट ने तीन आरोपितों की जमानत की खारिज
मुजफ्फरपुर कोर्ट ने नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में तीन आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। यह गिरोह टेलीग्राम और प्लस मैसेंजर पर फर्जी एनटीए अकाउंट ...और पढ़ें

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।
HighLights
नीट फर्जीवाड़े में तीन आरोपियों की जमानत खारिज।
टेलीग्राम-मैसेंजर पर फर्जी एनटीए अकाउंट बनाकर ठगी।
लाखों रुपये की ठगी, डिजिटल नेटवर्क की जांच जारी।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर । नीट अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र लीक कराने का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। टेलीग्राम और प्लस मैसेंजर पर फर्जी एनटीए अकाउंट बनाकर छात्रों का भरोसा जीतने वाले इस नेटवर्क के तीन आरोपितों की जमानत याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी। जांच में गिरोह के डिजिटल नेटवर्क और लेनदेन से जुड़े कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
तीन आरोपितों को नहीं मिली राहत
मुजफ्फरपुर के जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-16 ने नीट फर्जीवाड़ा मामले में जेल में बंद नगर थाना क्षेत्र के अमन कुमार उर्फ अमन गुप्ता, कन्हैया कुमार उर्फ मानस उर्फ मानव और हर्ष की जमानत याचिका खारिज कर दी। इससे पहले जजुआर थाना निवासी मनीष कुमार उर्फ मनीष झा की जमानत भी अस्वीकार हो चुकी है।
छापेमारी में खुला था फर्जीवाड़े का राज
दो मई को सिकंदरपुर थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष दुखी कुमार महतो ने बालुघाट वार्ड-17 स्थित एक किराये के मकान में छापेमारी कर मनीष कुमार को गिरफ्तार किया था। मौके से मोबाइल, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए। पूछताछ में मनीष ने गिरोह के मास्टरमाइंड के रूप में निखिल कुमार ठाकुर का नाम बताया, जिसे बाद में उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया।
फर्जी एनटीए अकाउंट बनाकर छात्रों को फंसाया
जांच में मनीष के मोबाइल में मिले प्लस मैसेंजर एप से खुलासा हुआ कि गिरोह टेलीग्राम और प्लस मैसेंजर पर 'Exam Wale' और 'NTA Official' जैसे फर्जी यूजरनेम बनाकर छात्रों को भ्रमित करता था। प्लस मैसेंजर के 'Forward Without Source Name' फीचर का इस्तेमाल कर प्रश्नपत्र लीक होने का झूठा माहौल बनाया जाता था, जिससे अभ्यर्थियों को भरोसा हो जाए कि वे सीधे एनटीए अधिकारियों के संपर्क में हैं।
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दर्जनों अभ्यर्थियों से ठगे लाखों रुपये
जब्त चार मोबाइल फोन की जांच में विभिन्न राज्यों के दर्जनों अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों के संपर्क नंबर मिले हैं। पुलिस के अनुसार, गिरोह 'पहले पेमेंट, फिर पेपर' के फार्मूले पर काम करता था और कई लोगों से लाखों रुपये वसूल चुका है।
बैंक खातों और क्यूआर कोड की जांच जारी
पुलिस फिनो पेमेंट्स बैंक और इंडसइंड बैंक के खातों से जुड़े केवाईसी दस्तावेजों की जांच कर रही है। जांच में सामने आया कि हर्ष कनोडिया के नाम से बने फोनपे क्यूआर कोड पर रुपये मंगाए जाते थे।
मनीष की निशानदेही पर पुलिस ने जाल बिछाकर हर्ष कनोडिया समेत चार आरोपितों को गिरफ्तार किया था। अब जांच एजेंसियां गिरोह के पूरे नेटवर्क और आर्थिक लेनदेन की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं।