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    बीमार नवजात से अलग नहीं होंगी मां, मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल में शुरू होगी एमएनसीयू

    Updated: Wed, 05 Aug 2026 09:56 PM (IST)

    मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल में अब एसएनसीयू को एमएनसीयू में बदला जा रहा है, जिससे प्रसूता और नवजात शिशु एक साथ रह सकेंगे। यह नई व्यवस्था शिशु मृत्यु दर कम ...और पढ़ें

    गुरुवार से चार बेड के साथ इस नई व्यवस्था की शुरुआत हो रही है। फाइल फोटो

    गुरुवार से चार बेड के साथ इस नई व्यवस्था की शुरुआत हो रही है। फाइल फोटो

    जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Muzaffarpur Sadar Hospital MNCU: सदर अस्पताल में अब प्रसूता और नवजात शिशु के अलग-अलग रहने की पुरानी परेशानी खत्म होने जा रही है। जिला प्रशासन के निर्देश पर अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) वार्ड को अब एमएनसीयू (Mother and Newborn Care Unit) में बदल दिया गया है। गुरुवार से चार बेड के साथ इस नई व्यवस्था की शुरुआत हो रही है।

    16 बेड की होगी क्षमता

    शुरुआती चरण में चार बेड से शुरू हो रहे इस एमएनसीयू वार्ड की क्षमता एक सप्ताह के भीतर बढ़ाकर 16 बेड कर दी जाएगी। बीते दिनों विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने एसएनसीयू वार्ड का गहन निरीक्षण किया था। उसी रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल प्रशासन ने यह बदलाव सुनिश्चित किया है।

    शिशु मृत्यु दर में आएगी कमी

    एमएनसीयू के संचालन से बीमार नवजात शिशुओं और उनकी माताओं को एक ही बेड पर रहकर इलाज कराने की सुविधा मिलेगी। इस आधुनिक पहल से जिले और आसपास के ग्रामीण इलाकों से आने वाले गंभीर नवजात शिशुओं की देखरेख बेहतर होगी और शिशु मृत्यु दर में भारी कमी आएगी।

    संक्रमण का खतरा होगा कम

    पहले एसएनसीयू में माताओं के रहने की व्यवस्था न होने से मां और बच्चा अलग हो जाते थे। एमएनसीयू में बेड इस तरह डिजाइन किए गए हैं कि मां अपने बीमार या समय से पहले जन्मे बच्चे के साथ ही रह सकेगी। पास में मां के रहने से बच्चे को अस्पताल जनित संक्रमण (Hospital Infection) का खतरा न के बराबर रहेगा।

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    कंगारू मदर केयर में मदद

    कम वजन वाले (Low Birth Weight) नवजात शिशुओं के लिए 'कंगारू मदर केयर' (मां के सीने से सटाकर रखना) जीवनरक्षक साबित होता है। एमएनसीयू में रहने से माताएं चौबीसों घंटे अपने बच्चे को यह थेरेपी दे सकेंगी, जिससे शिशु के शरीर का तापमान नियंत्रित रहेगा और उसका तेजी से विकास होगा।

    समय पर मिलेगा मां का दूध

    मां के हर वक्त पास में मौजूद रहने से नवजात को सही समय पर स्तनपान कराया जा सकेगा। मां का पहला पीला गाढ़ा दूध नवजात शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कई गुना बढ़ा देता है, जिससे गंभीर बीमारियों से लड़ने में मदद मिलेगी।