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    छोटे छेद से ऑपरेशन की सुविधा, मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच में शुरू हुई दूरबीन विधि से सर्जरी

    Updated: Thu, 30 Jul 2026 10:48 PM (IST)

    Bihar Health News SKMCH Muzaffarpur: मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच में महिलाओं के लिए दूरबीन विधि (लेप्रोस्कोपी और हिस्टेरोस्कोपी) से इलाज शुरू हो गया है। ...और पढ़ें

    मरीजों को अब निजी अस्पतालों के चक्कर काटने और मोटी रकम खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। फाइल फोटो

    मरीजों को अब निजी अस्पतालों के चक्कर काटने और मोटी रकम खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। फाइल फोटो

    HighLights

    1. एसकेएमसीएच में लेप्रोस्कोपी और हिस्टेरोस्कोपी सुविधा शुरू।

    2. महिलाओं को बांझपन, गर्भाशय रोगों का सस्ता इलाज।

    3. कम चीरा, कम रक्तस्राव, शीघ्र रिकवरी संभव।

    जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। SKMCH Muzaffarpur Laparoscopy Hysteroscopy Facility: मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में दूरबीन विधि से इलाज शुरू हो गया है। अब महिलाओं को लेप्रोस्कोपी और हिस्टेरोस्कोपी की अत्याधुनिक सुविधाएं सरकारी अस्पताल में ही मिलेंगी।

    एसकेएमसीएच की प्राचार्या डॉ. कुमारी विभा ने बताया कि स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में दूरबीन विधि से इलाज के लिए आधुनिक मशीनें लगा दी गई हैं। इससे मरीजों को निजी अस्पतालों के महंगे चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

    विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. शालिनी कुमारी ने बताया कि अब बड़ा चीरा लगाए बिना गर्भाशय की गांठ और बांझपन का सटीक इलाज संभव होगा। पेट में छोटा सा छेद करके कैमरे की मदद से सुरक्षित सर्जरी की जाएगी।

    नई तकनीक से ऑपरेशन के दौरान मरीजों का खून बहुत कम बहेगा और टांके का निशान भी न के बराबर रहेगा। मरीजों को ओपन सर्जरी के बड़े दर्द और लंबे इलाज की प्रक्रिया से मुक्ति मिलेगी।

    डॉ. शालिनी कुमारी के अनुसार पारंपरिक ऑपरेशनों में जहां मरीजों को हफ्तों अस्पताल में रहना पड़ता था, वहीं इस तकनीक से मरीज 24 से 48 घंटे में स्वस्थ होकर घर लौट सकेंगे।

    विभाग की चिकित्सक डॉ. अमृता प्रीतम ने बताया कि हिस्टेरोस्कोपी तकनीक के जरिए बिना चीरे गर्भाशय के अंदरूनी हिस्से की सीधी जांच हो सकेगी। इससे बांझपन, रसौली (फाइब्रॉयड) और पॉलिप्स का तुरंत पता लगाकर इलाज संभव होगा।

    गायनी विभाग में अलग से दूरबीन यूनिट स्थापित होने से महिलाओं के ऑपरेशन अब तेजी से हो सकेंगे। इससे एसकेएमसीएच की ओपीडी और सर्जरी वार्ड पर दबाव कम होगा तथा मरीजों को समय पर इलाज मिलेगा।