उत्तर बिहार में तीन की गईं जानें, पेड़ गिरे, बिजली पोल ध्वस्त, टावर भी टूटे, अंधेरे से हालात बेकाबू
उत्तर बिहार में आई तेज आंधी-बारिश ने भारी तबाही मचाई, जिसमें तीन लोगों की जान चली गई और सैकड़ों पेड़ व बिजली के खंभे धराशायी हो गए। मुजफ्फरपुर सहित पू ...और पढ़ें

बगहा में आंधी से गिरा बिजली का टावर। जागरण
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर । उत्तर बिहार में आई तेज आंधी-वर्षा ने कुछ ही घंटों में तबाही का मंजर खड़ा कर दिया। तीन लोगों की जान चली गई, सैकड़ों पेड़ और बिजली पोल धराशायी हो गए, यहां तक कि टावर भी टूटकर गिर पड़े। हालात ऐसे बने कि पूरा इलाका अंधेरे में डूब गया और जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया।
बता दें कि बुधवार की रात आंधी-पानी में जान-माल के नुकसान के साथ यातायात और बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई है। दरभंगा में पेड़ गिरने से दबकर 55 वर्षीया सहस्ती देवी की मौत हो गई। शिवहर में ठनका गिरने के दौरान हार्ट अटैक से धनकौल निवासी होमगार्ड व किशोर न्यायालय में तैनात जवान हरदेव महतो की मौत हो गई।
सीतामढ़ी के रुन्नीसैदपुर में अथरी हाई स्कूल के समीप बाइक सवार राहुल कुमार की पेड़ की एक डाल टूटकर गिर जाने से मौत हो गई।
मोतिहारी में पेड़ गिरने से कार, बाइक और चार ठेले दब गए। इनमें सवार कोई नहीं था, लेकिन यहीं पर चार अन्य राहगीर घायल हो गए। शिवहर शहर में हनुमान मंदिर पर पेड़ गिरने से उसका ऊपरी भाग क्षतिग्रस्त हो गया।
वहीं, बुधवार की रात ही समस्तीपुर-बरौनी रेलखंड में उजियारपुर स्टेशन के पास पेड़ की टहनी टूटकर ओवरहेड वायर पर आ गई, इससे अप लाइन पर विद्युत आपूर्ति तीन घंटे तक बाधित रही। आधा दर्जन ट्रेनों का परिचालन बाधित रहा। दरभंगा कमतौल में बीएसएनएल का टावर ऊपर से टूटकर नीचे लटक गया।
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मधुबनी जिले के झंझारपुर के लोहना संस्कृत महाविद्यालय के परित्यक्त भवन में एक विशाल वट वृक्ष सुकुमार राय के घर पर गिर गया। उस समय उनकी पुत्री की शादी की कुमरम रस्म की तैयारी चल रही थी। करीब 40 लोग घर में मौजूद थे। पेड़ की चपेट में आने से 30 लोग घायल हो गए। दो लोगों को गंभीर चोटें आई हैं।
गंडक नदी में गिरे छह टावर, 550 से अधिक पोल गिरे
उत्तर बिहार में आंधी से बिजली व्यवस्था को काफी नुकसान पहुंचा है। 550 से अधिक पोल गिर गए। पश्चिम चंपारण जिले में 200 से अधिक पोल बिजली के पोल टूट गए। जीएमसीएच, नौरंगा, मनसा टोला, मनुआपुल आदि पावर सबस्टेशन से जुड़े फीडर में सैकड़ों पीन इंसुलेटर ब्लास्ट कर गए।
132 केवी लाइन के छह टावर गंडक नदी में गिर गए। इससे गंडक पार के चार प्रखंडों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई। करीब तीन लाख की आबादी बिजली संकट से जूझ रही है।
मुजफ्फरपुर सर्कल से जुड़े सीतामढ़ी व शिहर में 300 से अधिक पोल-तार क्षतिग्रस्त हो गए। आधा दर्जन से अधिक ट्रांसफार्मर गिर गए। करीब डेढ़ सौ 33 केवी लाइन ब्रेक डाउन हो गई।
मधुबनी में 20 से अधिक इंसुलेटर ब्लास्ट, 25 पोल टूटे। आंधी-तूफान से कई जगहों पर 33 हजार लाइन में फाल्ट आया है। कई जगहों पर पेड़ टूटकर गिरने के कारण बिजली बाधित हुई। कई जगह 24 घंटे बाद बिजली आई।
मुजफ्फरपुर में बिजली व्यवस्था चरमराई
मुजफ्फरपुर की बिजली व्यवस्था को पूरी तरह चरमरा दिया। सबसे ज्यादा असर बिजली ढांचे पर पड़ा, जहां सर्कल में 300 से अधिक पोल और तार टूटकर गिर गए। कई जगहों पर पोल ध्वस्त होने से लंबे समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रही और शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक अंधेरा छा गया।
कलमबाग रोड, माड़ीपुर, बेला और मुशहरी जैसे इलाकों में बिजली बहाली में घंटों लग गए। कई स्थानों पर पेड़ों की डालियां तारों पर गिरने से शॉर्ट सर्किट की समस्या भी बढ़ी। पोल गिरने के कारण मरम्मत कार्य चुनौतीपूर्ण हो गया, जहां टीमों को नए पोल लगाने और तार जोड़ने में पूरी रात मशक्कत करनी पड़ी।
बिजली बाधित रहने से पानी की समस्या भी गंभीर हो गई। मोटर और पंप बंद रहने के कारण लोगों को पेयजल के लिए भटकना पड़ा। विभाग के अनुसार सर्कल में 50 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।