मुजफ्फरपुर में मानसून की मदद से धान रोपनी ने पकड़ी रफ्तार, 94 फीसदी लक्ष्य पूरा
Kharif Crop Bihar: मानसून की सक्रियता से मुजफ्फरपुर में धान रोपनी ने रफ्तार पकड़ी है, 94.01% लक्ष्य पूरा हो गया है। अच्छी बारिश से किसानों को सिंचाई प ...और पढ़ें

धान की नर्सरी तैयार करने में भी जिला लगभग लक्ष्य तक पहुंच गया है।फाइल फोटो
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Muzaffarpur Paddy Transplantation: जिले में मानसून की सक्रियता से धान रोपनी ने रफ्तार पकड़ ली है। जिले में अब तक धान रोपनी का 94.01 प्रतिशत लक्ष्य पूरा कर लिया गया है।
अच्छी बारिश से न केवल रोपनी कार्य में तेजी आई है, बल्कि किसानों को सिंचाई पर होने वाले खर्च से भी राहत मिली है। एक आकलन के अनुसार किसानों की सामूहिक रूप से 10 करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई है।
जिले में इस वर्ष 1,54,088 हेक्टेयर में धान रोपनी का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके विरुद्ध अब तक 1,44,855 हेक्टेयर क्षेत्र में रोपनी पूरी हो चुकी है। वहीं धान की नर्सरी तैयार करने में भी जिला लगभग लक्ष्य तक पहुंच गया है।
15,408.83 हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 15,324.77 हेक्टेयर में बिचड़ा तैयार किया गया है, जो 99.45 प्रतिशत उपलब्धि है।
रोपनी में बोचहां और बांद्रा ने 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर लिया है। इसके अलावा गायघाट में 98.52 प्रतिशत, कटरा में 97 प्रतिशत, मोतीपुर में 96.74 प्रतिशत, सकरा में 96.67 प्रतिशत और सरैया में 96.54 प्रतिशत रोपनी पूरी हो चुकी है।
औराई में 90.16 प्रतिशत, कांटी में 89.32 प्रतिशत, पारू में 85.34 प्रतिशत और कुढ़नी में 84.27 प्रतिशत प्रगति दर्ज की गई है। सबसे कम 78 प्रतिशत रोपनी मीनापुर प्रखंड में हुई है।
जिले में इस सप्ताह हुई अच्छी बारिश से धान समेत अन्य खरीफ फसलों को पर्याप्त नमी मिली है। लगातार वर्षा के कारण खेतों में पानी की उपलब्धता बेहतर हुई है, जिससे किसानों को तत्काल सिंचाई की जरूरत काफी कम हो गई है।
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आकलन के अनुसार जिले में सामान्य रूप से 75 हजार से 85 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती होती है। यदि अधिकांश क्षेत्र में एक सिंचाई की जरूरत टल जाती है तो किसानों की सामूहिक बचत 10.4 करोड़ से 22.4 करोड़ रुपये तक हो सकती है।
अनुमान के मुताबिक प्रति हेक्टेयर सिंचाई नहीं करने पर डीजल में 800 से 1,500 रुपये, बिजली में 200 से 600 रुपये और मजदूरी में 300 से 700 रुपये तक की बचत हो सकती है। इस तरह प्रति हेक्टेयर कुल 1,300 से 2,800 रुपये तक की लागत बचने का अनुमान है।
जिला कृषि पदाधिकारी भारत भूषण ने किसानों से अपील की है कि खेतों में पर्याप्त नमी होने पर अनावश्यक सिंचाई न करें। उन्होंने कहा कि यदि मानसून इसी तरह सक्रिय रहा तो धान और अन्य खरीफ फसलों के उत्पादन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और किसानों को आर्थिक लाभ मिलेगा।