Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    पटना में DRI की बड़ी कार्रवाई, फतुहा से करोड़ों की कोडाइन कफ सिरप जब्त

    By Sanjiv KumarEdited By: Ajit kumar
    Updated: Sat, 11 Jul 2026 07:00 PM (IST)

    Codeine Cough Syrup Seized: डीआरआई मुजफ्फरपुर इकाई ने पटना के फतुहा में एक गुप्त गोदाम से 1.80 लाख कोडाइन युक्त कफ सिरप की बोतलें जब्त की हैं। अंतर्रा ...और पढ़ें

    फतुहा स्थित एक गुप्त गोदाम में की गई कार्रवाई। फाइल फोटो

    फतुहा स्थित एक गुप्त गोदाम में की गई कार्रवाई। फाइल फोटो

    HighLights

    1. पटना के फतुहा में 1.80 लाख कफ सिरप जब्त।

    2. जब्त खेप की कीमत 1.75 करोड़ रुपये आंकी गई।

    3. डीआरआई अवैध दवा सिंडिकेट की तलाश में जुटी।

    संजीव कुमार, मुजफ्फरपुर। Patna Drug Bust: डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआइ) की मुजफ्फरपुर इकाई ने राजधानी पटना के फतुहा स्थित एक गुप्त गोदाम पर बड़ी कार्रवाई करते हुए कोडाइन युक्त 1.80 लाख बोतल कफ सिरप जब्त की है।

    अधिकारियों के अनुसार जब्त खेप की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 1.75 करोड़ रुपये है। इसे नशीली दवाओं के अवैध कारोबार के खिलाफ डीआरआइ की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। हालांकि छापेमारी के दौरान किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी।

    खुफिया सूचना पर हुई कार्रवाई

    डीआरआइ की विशेष टीम को खुफिया इनपुट मिला था कि फतुहा के एक गोदाम में बड़ी मात्रा में कोडाइन युक्त कफ सिरप का अवैध भंडारण किया गया है। सूचना के आधार पर टीम ने छापेमारी की। तलाशी के दौरान भूरे रंग के गत्ते के कार्टनों में छिपाकर रखी गई 1.80 लाख बोतलें बरामद की गईं, जिन्हें तत्काल जब्त कर लिया गया।

    रद लाइसेंस के जरिए हो रही थी सप्लाई

    प्रारंभिक जांच में सामने आया कि जब्त खेप जिस रिसीवर के नाम भेजी गई थी, उसका ड्रग लाइसेंस पहले ही रद्द किया जा चुका था। इतना ही नहीं, दस्तावेजों में दर्ज पता भी जांच के दौरान फर्जी और अस्तित्वहीन पाया गया।

    अधिकारियों का मानना है कि वैध दवा कारोबार की आड़ में इस प्रतिबंधित कफ सिरप को अवैध बाजार में खपाने की तैयारी की गई थी।

    नशे की मांग के लिए तैयार की गई थी खेप

    डीआरआइ अधिकारियों के अनुसार जब्त कफ सिरप में मौजूद कोडाइन फॉस्फेट एक नियंत्रित नार्कोटिक पदार्थ है, जिसे स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत विनियमित किया गया है। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि युवाओं के बीच नशे के लिए बढ़ती मांग को देखते हुए इस खेप को तस्करी के उद्देश्य से मंगाया गया था।

    खबरें और भी

    ड्रग सिंडिकेट की तलाश में जुटी डीआरआइ

    डीआरआइ की विशेष टीम अब इस मामले में फार्मास्युटिकल ड्रग सिंडिकेट के सरगना, अवैध वितरकों और स्थानीय नेटवर्क की पहचान करने में जुटी है। जांच एजेंसी सप्लाई चेन से जुड़े सभी लोगों को चिन्हित कर पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में कार्रवाई कर रही है।