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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 31, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    करोड़ों लेकर भाग गई एजेंसी, फिर खुली विभाग की नींद; प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में गड़बड़ी, नहीं बनी सड़कें

    By Prem Shankar MishraEdited By: Aysha Sheikh
    Updated: Tue, 31 Oct 2023 01:55 PM (IST)

    Bihar News ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण करने के नाम पर सरकार से पैसे लेने वाली एजेंसियां गायब हो गई हैं। एजेंसियों ने पैसे लेकर भी सड़क नहीं बना ...और पढ़ें

    करोड़ों लेकर भाग गई एजेंसी, फिर खुली विभाग की नींद; प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में गड़बड़ी, नहीं बनी सड़कें
    करोड़ों लेकर भाग गई एजेंसी, फिर खुली विभाग की नींद; प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में गड़बड़ी, नहीं बनी सड़कें

    HighLights

    1. ग्रामीण कार्य विभाग में लापरवाही की खुलती जा रही है परत दर परत
    2. बेंगलुरू की एजेंसी जेएसआर से 25 करोड़ की नहीं हो सकी है वसूली

    जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। जिले में ग्रामीण विकास विभाग से जुड़ी निर्माण योजना में गड़बड़ी की परत दर परत अब खुलने लगी है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण करने वाली दर्जनों एजेंसियां राशि लेकर चंपत हो गई हैं, जबकि इसका निर्माण पूरा भी नहीं हुआ।

    एक-एक कर जब एजेंसी फरार होने लगी, तब विभाग के पदाधिकारियों की नींद खुली है। नीलामवाद की कार्रवाई शुरू तो की गई है, मगर सुनवाई के समय एजेंसियों के प्रतिनिधि या संवेदक नहीं आ रहे। इससे सरकार के करोड़ों रुपये फंस गए हैं। साथ ही लोगों को सड़क का लाभ नहीं मिला।

    जेएसआर कंस्ट्रक्शन का मामला सबसे बड़ा

    प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लिए वित्तीय वर्ष 2009-10 में आधा दर्जन सड़कों के निर्माण के लिए बेंगलुरू की एजेंसी जेएसआर कंस्ट्रक्शन ने तीन करोड़ 33 लाख प्रतिभूति रकम जमा की थी। सड़क का निर्माण वर्ष 2011 में पूरा होना था।

    इसके लिए विभाग की ओर से एजेंसी को बड़ी राशि दे दी गई, मगर कभी निर्माण कार्य की जांच नहीं हुई। यह मामला तब खुल जब संतोष कुमार ने मोरहर पहाड़पुर से रूप छपरा तक करीब चार किमी सड़क का निर्माण नहीं होने का मामला पटना हाईकोर्ट में पहुंचाया।

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    हाईकोर्ट के आदेश पर विभाग ने शुरू की कार्रवाई

    जांच हुई तो पता चला कि एजेंसी ने सड़कें बनाई ही नहीं। हाईकोर्ट का आदेश होने पर विभाग ने कार्रवाई शुरू की। एजेंसी की प्रतिभूति राशि (Security deposit) जब्त कर 25.60 करोड़ रुपये की वसूली की कार्रवाई की जा रही है, मगर एसडीओ पूर्वी के यहां चल रही नीलामवाद की सुनवाई में एजेंसी की ओर से किसी के उपस्थित नहीं होने से राशि की वसूली पर संशय है।

    इस मामले में विजिलेंस की जांच हुई। ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल पूर्वी-एक के तत्कालीन कार्यपालक एवं सहायक अभियंता पर कार्रवाई की गई। मीनापुर की तीन सड़कों को लेकर भी यही हुआ।

    अब काम नहीं करने वाली एजेंसी बीएलएसआर कंस्ट्रक्शन एवं इंजीनियरिंग से 1.39 करोड़ रुपये की वसूली की कार्रवाई शुरू की गई है। यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बताए पते पर ना एजेंसी मिल रही ना संवेदक। सवाल यह भी उठ रहा कि इन एजेंसियों को लाइसेंस किस आधार पर निर्गत कर दिया जाता।

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