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    पूसा विश्वविद्यालय ने बनाई बंदगोभी काटने की मशीन, किसानों को श्रम और लागत से मिलेगी राहत

    By Ajay K. Pandey Edited By: Ajit kumar
    Updated: Mon, 06 Apr 2026 07:00 PM (IST)

    Agricultural Innovation India: पूसा के डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों के लिए बंदगोभी काटने की एक विशेष मशीन विकसित की है। ...और पढ़ें

    किसानों को उपकरण के बारे में जानकारी देते विज्ञानी। फोटो सौ: जागरण

    किसानों को उपकरण के बारे में जानकारी देते विज्ञानी। फोटो सौ: जागरण

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    अजय पांडेय, मुजफ्फरपुर। Cabbage Cutter Machine: किसानों की मेहनत और लागत को कम करने के लिए पूसा स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने बंदगोभी की कटाई के लिए विशेष मशीन विकसित की है। यह मशीन खेत से सीधे कटाई और स्टोरेज का काम आसान बनाती है, जिससे किसानों को बड़ी राहत मिलेगी।

    पांच साल की रिसर्च के बाद मशीन तैयार

    कृषि अभियंत्रण एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के वैज्ञानिकों ने करीब पांच वर्षों के शोध और परीक्षण के बाद इस मशीन को तैयार किया है। प्रधान वैज्ञानिक डॉ. पीके प्रणव के नेतृत्व में 2019 में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट 2023 में पूरा हुआ और हाल ही में किसान मेले में प्रदर्शित किया गया।

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    बैटरी से चलने वाली आसान मशीन

    यह मशीन 12 वोल्ट की बैटरी से चलती है और एक बार चार्ज करने पर करीब पांच घंटे तक काम कर सकती है। इसे खेत में हल की तरह चलाया जाता है, जिससे किसान आसानी से बिना ज्यादा मेहनत के कटाई कर सकते हैं।

    प्रति घंटे 200 से अधिक गोभी की कटाई

    मशीन की क्षमता काफी प्रभावी है। इससे एक घंटे में 207 से 221 बंदगोभी काटी जा सकती है, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत होती है।

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    कन्वेयर बेल्ट से जुड़ा स्टोरेज सिस्टम

    इस मशीन में कटर ब्लेड और कन्वेयर बेल्ट सिस्टम लगा है। कटाई के बाद बंदगोभी सीधे बेल्ट के जरिए स्टोरेज में चली जाती है, जिससे अलग से उठाने या रखने की जरूरत नहीं पड़ती। मशीन के उपयोग से किसानों को झुककर काम करने की जरूरत नहीं होगी। इससे शारीरिक मेहनत कम होगी और काम तेजी से पूरा होगा।

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    लागत में होगी 15 प्रतिशत तक बचत

    वैज्ञानिकों के अनुसार, इस मशीन से मानव श्रम में कमी आने के साथ कुल लागत में करीब 15 प्रतिशत तक बचत संभव है। प्रति हेक्टेयर लगभग 2500 रुपये तक की बचत हो सकती है।

    जल्द होगा व्यावसायिक उत्पादन

    इस मशीन की अनुमानित कीमत करीब 10 हजार रुपये बताई जा रही है। फिलहाल इसके पेटेंट और व्यावसायिक उत्पादन की प्रक्रिया जारी है, जिसके बाद यह किसानों के लिए बाजार में उपलब्ध हो सकेगी।

    कृषि एवं अभियंत्रण महाविद्यालय के विज्ञानियों द्वारा विकसित मशीन किसानों के लिए लाभकारी है। इसे बिहार की कृषि परिस्थितियों के अनुरूप बनाया गया है। खेतों में इसका परीक्षण भी किया गया है। विश्वविद्यालय इसके अतिरिक्त कई अन्य यंत्रों और तकनीक पर काम कर रहा है, जिसके परिणाम कृषि को नई दिशा देंगे।

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    डा. पीएस पांडेय, कुलपति, डा. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा (समस्तीपुर)