Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    मुजफ्फरपुर में झोलाछाप ने ली जान, 7 साल की मासूम के सिर के घाव में लगा दिया चीरा; नस कटने से मौत

    Updated: Sat, 18 Jul 2026 07:03 AM (IST)

    मुजफ्फरपुर के मनियारी में एक झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही से सात वर्षीय बच्ची आसिया की मौत हो गई। ...और पढ़ें

    प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (जागरण)

    प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (जागरण)

    HighLights

    1. झोलाछाप डॉक्टर ने सिर के घाव में चीरा लगाया।

    2. चीरा लगाने के दौरान नस कटने से अत्यधिक रक्तस्राव हुआ।

    3. रक्तस्राव के कारण सात वर्षीय बच्ची आसिया की मौत हुई।

    जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। मनियारी थाना के गछपत्ती गांव में झोलाछाप ने एक मासूम की जान ले ली। बच्ची के सिर में घाव में चीरा लगाने के दौरान उसकी नस काट दी।

    इसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। एसकेएमसीएच लाते-लाते उसकी मौत हो गई। स्वजन ने झोलाछाप पर कोताही का आरोप लगाया है। वे आरोपित पर कार्रवाई की मांग करते हुए इमरजेंसी वार्ड के बाहर मृत बच्ची को गोद में लेकर विलाप करते रहे।

    स्वजन ने बताया कि आसिया (सात) को सिर पर एक छोटा सा घाव था। गांव के मो. समलान ने आसिया को पहले घाव को पकाने की दवा दी। इसके बाद खुद ही बेहोशी के इंजेक्शन देकर उस पर चीरा लगा दिया।

    ऑपरेशन के बाद सुई-दवा देकर बच्ची को घर ले जाने को कहा। जैसे ही वह घर पहुंची कि बच्ची का पट्टी पूरा खून से भीग गया। इसके स्वजन बच्ची को लेकर मो. सलमान के पास पहुंची। उसने बच्ची को पीएचसी ले जाने को कहा।

    पीएचसी के चिकित्सक ने एसकेएमसीएच रेफर कर दिया। यहां रजिस्ट्रेशन पर्ची कटाने के बाद चिकित्सक के पास ले गए। चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया। एसकेएमसीएच के चिकित्सक ने बताया कि बच्ची के घाव के ऑपरेशन के दौरान नस कट जाने के बाद बच्ची के शरीर से अधिक रक्तस्राव हो गया था। इसके कारण बच्ची की मौत हो गई।

    खबरें और भी

    समय रहते बच्ची अगर इलाज को पहुंची रहती तो उसे बचाया जा सकता था। बुआ का कहना है कि इसी गलत चीरे के कारण बच्ची को इतना अधिक खून बहा कि उसकी जान बचाई नहीं जा सकी। उधर, घटना के बाद जब स्वजन बच्ची के शव को लेकर चिकित्सक सलमान के क्लीनिक पहुंचे। वह क्लीनिक बंद कर फरार था।

    झोलाछाप ले रहा जान, स्वास्थ्य विभाग का नियंत्रण नहीं 

    ग्रामीण इलाकों में झोलाछाप का झाल फैला है। छोटा-मोटा इलाज करने के साथ चिकित्सक आपरेशन तक कर दे रहे हैं। इसकी पड़ताल या जांच तक स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी नहीं कर रहे हैं। परिणाम यह हो रहा कि पीड़ित मरीजों की मौत की संख्या बढ़ती जा रही है।

    यहीं नहीं अधिकतर मामले में झोलाछाप की वजह से मरीज अंतिम समय में सरकारी अस्पताल पहुंच रहे हैं। इलाज शुरू होने के पूर्व ही दम तोड़ दे रहे हैं। 11 जुलाई, 2022 को सकरा थाने के बरियारपुर चौक स्थित शुभकांत क्लीनिक डॉ. पवन कुमार के यहां पेट दर्द की शिकायत को पहुंची सुनीता का ग्रामीण चिकित्सक ने ऑपरेशन कर किडनी निकाल ली थी।

    मामला प्रकाश में आने के बाद भी जिला के स्वास्थ्य अधिकारी ग्रामीण इलाकों में चल रहे अवैध नर्सिंग होम पर लगाम नहीं लगा सकें। एक और मासूम बच्ची की फिर मौत हो गई। सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार की मानें तो पीएचसी प्रभारियों को उनके अंतगर्त संचालित नर्सिंग होम की निगरानी करनी है। कोई गलत इलाज नहीं तो कर रहा, इसकी रिपोर्ट करनी है।