भरत तिवारी मुठभेड़ से चर्चित SDPO राजेश शर्मा का मुजफ्फरपुर में 19 साल पुराना एक और ENCOUNTER केस खुलेगा
Bihar Police Controversy:एसडीपीओ राजेश शर्मा की मुश्किलें बढ़ गई हैं, भोजपुर के भरत तिवारी मुठभेड़ के बाद अब मुजफ्फरपुर का 19 साल पुराना एनकाउंटर केस ...और पढ़ें

भरत तिवारी और राजेश शर्मा। दोनों फाइल फोटो

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संजीव कुमार, मुजफ्फरपुर। SDPO Rajesh Sharma Controversy: इतना वक्त गुजरने के बाद भी बिहार के भोजपुर स्थित जगदीशपुर में हुए चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की आग अभी ठंडी नहीं हुई है। इस प्रकरण में हटाए गए एसडीपीओ राजेश शर्मा की परेशानी अब लगातार बढ़ती जा रही है।
आरा में हत्या की प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अब उनका मुजफ्फरपुर से जुड़ा करीब 19 साल पुराना विवादित इतिहास भी फिर से सामने आ गया है।
1994 बैच के दारोगा से पदोन्नति पाकर एसडीपीओ बने राजेश शर्मा का मुजफ्फरपुर से पुराना और विवादित नाता रहा है। वे यहां सदर और ब्रह्मपुरा के थानेदार के साथ-साथ सरैया के एसडीपीओ भी रह चुके हैं।
चतुर्भुज स्थान से ब्रह्मपुरा तक विवादों से नाता
राजेश शर्मा जब मुजफ्फरपुर में तैनात थे, तब करीब दो दशक पहले चतुर्भुज स्थान के रेडलाइट एरिया में एक नर्तकी के कोठे पर बदमाशों से मुठभेड़ हुई थी। इस दौरान एक बदमाश मारा गया था और राजेश शर्मा के पैर में भी गोली लगी थी।
इस घटना से वे पहली बार सुर्खियों में आए थे। इसके बाद साल 2007 में ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र में एक और एनकाउंटर हुआ, जिसने पुलिसिया कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
एमआईटी के पास हुआ था संदिग्ध एनकाउंटर
यह मामला 4 नवंबर 2007 की सुबह करीब 4 बजे का है, जब ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र के एमआईटी (MIT) कॉलेज के समीप पुलिस मुठभेड़ में तीन युवकों की मौत हो गई थी।
मारे गए युवकों में सदर थाना क्षेत्र के लहलादपुर पताही निवासी मुकुल ठाकुर, काजी मोहम्मदपुर निवासी मनीष शर्मा (मनीष महिवाल) और शिवहर जिले के धनकौल निवासी सुबोध कुमार सिंह शामिल थे।
पुलिस का दावा था कि वाहन जांच के दौरान रोकने पर युवकों ने 22 राउंड फायरिंग की, जिसके जवाब में आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई में तीनों मारे गए।
मानवाधिकार आयोग ने उठाए थे सवाल
इस मुठभेड़ को परिजनों ने पूरी तरह फर्जी बताया था। मामला तूल पकड़ने पर तत्कालीन डीआईजी ने सीआईडी (CID) से जांच कराई थी, जिसने पुलिसकर्मियों को क्लीन चिट दे दी थी।
हालांकि, मानवाधिकार आयोग ने सीआईडी की इस जांच और चार्जशीट पर गंभीर सवाल उठाए थे। साल 2013 में मुजफ्फरपुर कोर्ट में तत्कालीन सदर थानेदार राजेश शर्मा समेत चार थाना प्रभारियों और कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था, जो गवाही न होने के कारण लंबित था।
अब यह मामला फिर से खुलने जा रहा है। मुठभेड़ में मारे गए मनीष की मां अनीता देवी ने मानवाधिकार आयोग के अधिवक्ता एस. के. झा के माध्यम से न्यायालय में आवेदन दिया है।
अदालत ने इस पर संज्ञान लेते हुए सुनवाई के लिए 15 जुलाई की तारीख तय की है, जिससे आरोपी पुलिसकर्मियों की धड़कनें बढ़ गई हैं।
इसके बाद से एक ओर जहां पुलिसकर्मी इस दिन का इंतजार कर रहे हैं वहीं पीड़ि़त परिवार को भी इस दिन की प्रतीक्षा है।