वसंत पंचमी 2026: विद्या, सृजन और बुद्धि की देवी मां सरस्वती की आराधना का महापर्व कल
Saraswati Puja muhurat: वसंत पंचमी 23 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी, जो ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन मा ...और पढ़ें

Goddess Saraswati worship: इस दिन पीला रंग के वस्त्र को धारण करने का विधान है। फोटो: जागरण आर्काइव
अमरेंद्र तिवारी, मुजफ्फरपुर। Saraswati Puja date: सनातन धर्म के प्रमुख और अत्यंत पावन त्योहारों में से एक वसंत पंचमी है। यह पर्व ज्ञान, विद्या, कला और सृजन की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती को समर्पित है। मान्यता है कि इसी शुभ तिथि पर मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था, इसलिए वसंत पंचमी को विद्या और बौद्धिक चेतना का प्रतीक माना जाता है।
शास्त्रों में वसंत पंचमी के महत्व का विशेष उल्लेख मिलता है। कहा जाता है कि यदि इस दिन केवल मां सरस्वती के नामों का स्मरण भी किया जाए, तो देवी शीघ्र प्रसन्न होकर साधक पर अपनी कृपा बरसाती हैं। इससे व्यक्ति के भाग्य में वृद्धि, समय की अनुकूलता, कला में निखार और सद्बुद्धि की प्राप्ति होती है।
23 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी वसंत पंचमी
आध्यात्मिक गुरु पं. कमलापति त्रिपाठी प्रमोद ने कहा कि इस वर्ष वागीश्वरी जयंती, वसंतोत्सव, वसंत पंचमी एवं विद्यादायिनी सरस्वती पूजा 23 जनवरी 2026, शुक्रवार को अपराह्न काल में मनाई जाएगी। यह पर्व माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है।

मां सरस्वती का प्राकट्य
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने जब सृष्टि की रचना की, तो उन्हें संसार नीरस, मौन और चेतना रहित प्रतीत हुआ। तब उन्होंने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चारों ओर हरियाली फैल गई और उसी क्षण देवी सरस्वती का प्राकट्य हुआ। ब्रह्मा जी ने उन्हें वीणा और ग्रंथ प्रदान कर सृष्टि में ज्ञान, वाणी और संगीत का संचार करने का आदेश दिया।
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ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने मां सरस्वती को यह वरदान दिया था कि माघ शुक्ल पंचमी के दिन उनकी विशेष पूजा की जाएगी। इसी वरदान के फलस्वरूप वसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा की परंपरा प्रारंभ हुई।
ज्ञान, कला और विवेक की अधिष्ठात्री देवी
मां सरस्वती को ज्ञान, विवेक, बुद्धि, संगीत और कला की देवी माना जाता है। उनकी पूजा से विद्या, एकाग्रता और रचनात्मक क्षमता का विकास होता है। यह पर्व वसंत ऋतु के आगमन का भी प्रतीक है, जो जीवन में नई शुरुआत, उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का संकेत देता है।
मां सरस्वती को हंस (पवित्रता और विवेक), कमल (ज्ञान), वीणा (संगीत) और पुस्तकों (विद्या) के साथ दर्शाया जाता है।
मां सरस्ववती पूजा विधि
माघ शुक्ल पंचमी की सुबह स्नान के बाद मां सरस्वती की मूर्ति या चित्र की स्थापना की जाती है। उन्हें पीले फूल, चंदन, अक्षत और यज्ञोपवीत अर्पित किया जाता है। पुस्तकें, कलम और वाद्य यंत्र मां के चरणों में रखकर उनकी पूजा की जाती है। मंत्रोच्चार और भजन-कीर्तन से वातावरण ज्ञान और सकारात्मकता से भर जाता है।
“ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” मां सरस्वती के बीज मंत्र के जाप से संपूर्ण विद्या की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
वसंत पंचमी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
- पंचमी तिथि प्रारंभ: 23 जनवरी 2026, सुबह 02:28 बजे
- पंचमी तिथि समाप्त: 24 जनवरी 2026, रात 01:46 बजे
- पूजा का श्रेष्ठ समय: सुबह 07:13 से दोपहर 12:33 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:40 से दोपहर 12:28 बजे तक
सरस्वती पूजा का महत्व
- पूजा से बौद्धिक क्षमता में वृद्धि होती है और चित्त की चंचलता दूर होती है
- विद्यार्थियों और कलाकारों के लिए यह अत्यंत शुभ दिन माना जाता है
- छोटे बच्चों के लिए इसी दिन अक्षराभ्यास (विद्यारंभ संस्कार) किया जाता है
- पीला रंग ज्ञान, ऊर्जा और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस दिन पीले वस्त्र और सजावट का विशेष महत्व है
विशेष परंपरा का जरूर रखें ख्याल
इस दिन पुस्तकों और अध्ययन सामग्री का अनादर नहीं किया जाता। कई स्थानों पर पढ़ाई से विराम लेकर पूरा दिन मां सरस्वती के ध्यान, पूजा और साधना में बिताने की परंपरा है।