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16 को पत्नियां पति को झलेंगी पंखा, वट सावित्री व्रत में अखंड सौभाग्य के लिए करेंगी पूजा

By Gopal T Tiwari Edited By: Ajit kumar
Published: Thu, 14 May 2026 05:14 PM (GMT+05:30)

Vat Savitri Vrat Date in Bihar: वट सावित्री व्रत 16 मई 2026 को ज्येष्ठ अमावस्या पर मनाया जाएगा, जिसमें महिलाएं ...और पढ़ें

बिहार समेत पूरे उत्तर बिहार की महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।  (AI Generated Image)

बिहार समेत पूरे उत्तर बिहार की महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।  (AI Generated Image)

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संक्षेप में पढ़ें

गोपाल तिवारी, मुजफ्फरपुर। Bihar News Vat Savitri Puja: अखंड सौभाग्य की कामना के साथ किया जाने वाला व्रत इस वर्ष 16 मई 2026 यानी शनिवार को मनाया जाएगा।

ज्येष्ठ अमावस्या को पड़ने वाले इस व्रत को लेकर बिहार समेत पूरे उत्तर बिहार की महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। महिलाएं पति की लंबी आयु के साथ ही साथ परिवार की समृद्धि के लिए भी यह व्रत करती हैं।

सौभाग्य और शोभन योग

आचार्य पंडित प्रभात मिश्र के अनुसार इस बार व्रत भरणी नक्षत्र, सौभाग्य और शोभन योग के शुभ संयोग में मनाया जाएगा, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है।

Pandit prabhat mishra

सूर्योदय के बाद से ही पूजा का समय

16 मई को सूर्योदय सुबह 05:02 बजे और सूर्यास्त शाम 06:28 बजे होगा। चतुर्दशी तिथि सुबह 05:11 बजे तक रहेगी, जिसके बाद अमावस्या तिथि प्रारंभ होगी। अमावस्या 1६ मई की रात 01:38 बजे तक रहेगी।

संकल्प के बाद वट वृक्ष की पूजा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्योदय के बाद का समय वट सावित्री पूजन के लिए सबसे उत्तम माना गया है। महिलाएं सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लेंगी और वट वृक्ष की पूजा करेंगी।

पतिव्रता धर्म का पर्व

पौराणिक कथा के अनुसार माता सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और पतिव्रता धर्म के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। कहा जाता है कि सावित्री ने बरगद के वृक्ष के नीचे ही अपने पति को पुनर्जीवित होते देखा था।

इसी कारण वट वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों का वास होता है।

बिहार में विशेष परंपरा

बिहार में वट सावित्री व्रत की अपनी अलग परंपरा है। महिलाएं पूजा की थाली में बांस का पंखा, भीगा चना, गुड़, मौसमी फल, सिंदूर, चूड़ी और कच्चा सूत शामिल करती हैं।

पूजा के दौरान महिलाएं वट वृक्ष की परिक्रमा करते हुए सूत लपेटती हैं और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनती हैं। कई स्थानों पर महिलाएं अपने पति को बांस के पंखे से हवा देकर लंबी आयु की कामना भी करती हैं।

पूजन सामग्री

  • सावित्री और सत्यवान की मूर्ति या फोटो
  • बांस का पंखा (बेना)
  • कच्चा सूत
  • धूप, दीप, घी, फूल और चंदन
  • आम, लीची सहित मौसमी फल
  • भीगा चना, गुड़ और पारंपरिक पकवान
  • सिंदूर, चूड़ी, बिंदी सहित सुहाग सामग्री
  • जल से भरा कलश

पूजा विधि

  • सुबह स्नान कर स्वच्छ या लाल-पीले वस्त्र धारण करें
  • वट वृक्ष के नीचे सावित्री-सत्यवान की प्रतिमा स्थापित करें
  • वृक्ष की जड़ में जल अर्पित कर पूजा सामग्री चढ़ाएं
  • कच्चे सूत से वट वृक्ष की 7, 12 या 108 बार परिक्रमा करें
  • वट सावित्री व्रत कथा सुनें या पढ़ें
  • बांस के पंखे से सावित्री-सत्यवान और पति को हवा दें
  • पूजा के बाद बड़ों का आशीर्वाद लेकर प्रसाद बांटें

व्रत से जुड़ी मान्यताएं

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत पति-पत्नी के संबंधों में प्रेम और विश्वास बढ़ाता है। परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है। महिलाएं संतान की खुशहाली और परिवार के मंगल के लिए भी यह व्रत करती हैं।

बिहार में इस दिन आम और भीगे चने के प्रसाद का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा संपन्न होने के बाद महिलाएं सात्विक भोजन ग्रहण करती हैं।

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