हर बूंद हो स्वच्छ, हर घूंट हो स्वस्थ: वार्ड 34 में जलापूर्ति पाइपलाइन में 200 से अधिक लीकेज, दूषित पानी पीने को मजबूर लोग
मुजफ्फरपुर के वार्ड 34 में जलापूर्ति पाइपलाइन में 200 से अधिक लीकेज के कारण पराव पोखर, बैंकर्स कॉलोनी सहित कई मोहल्लों में लोग दूषित पानी पीने को मजबू ...और पढ़ें

जगह-जगह लीकेज होने से दूषित पेयजल लोगों तक पहुंच रहा है। फाइल फोटो
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Muzaffarpur Water Supply Leak: नगर निगम की लापरवाही के कारण वार्ड 34 के कई मोहल्लों में लोग शुद्ध पानी के नाम पर दूषित जल पीने को मजबूर हैं। बीते तीन महीनों में जलापूर्ति पाइपलाइन में 200 से अधिक स्थानों पर लीकेज की समस्या सामने आई है। इसके कारण पराव पोखर, बैंकर्स कॉलोनी, दास कॉलोनी, माली टोला और शंकरपुरी मोहल्ले सबसे अधिक प्रभावित हैं।
हैरानी की बात यह है कि लीकेज नगर निगम की पुरानी पाइपलाइन में नहीं, बल्कि तीन वर्ष पूर्व नल-जल योजना के तहत बिछाई गई नई पाइपलाइन में हो रही है। एक से डेढ़ फीट की गहराई में बिछाई गई पाइपलाइन जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो रही है। एक स्थान पर मरम्मत की जाती है, तो दूसरे स्थान पर लीकेज शुरू हो जाता है।
सोमवार को दैनिक जागरण के ‘हर बूंद हो स्वच्छ, हर घूंट हो स्वस्थ’ अभियान के तहत वार्ड 34 के पराव पोखर रोड मोहल्ले में जागरण आपके द्वार कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान जागरण की टीम ने मोहल्ले के एक दर्जन घरों में आपूर्ति किए जा रहे पानी की पीएच और टीडीएस जांच कराई।
जांच में पीएच मान 6.5 से 8.5 के बीच और टीडीएस लगभग 500 मिलीग्राम प्रति लीटर पाया गया, जो मानक के अनुरूप है। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि जमीन से निकलने वाला पानी भले ही शुद्ध हो, परंतु पाइपलाइन में जगह-जगह लीकेज के कारण नाले और गंदगी का पानी उसमें मिलकर उसे दूषित कर रहा है।
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मोहल्लावासियों ने कहा कि जब तक नगर निगम बैक्टीरियल जांच नहीं कराएगा, तब तक यह तय नहीं हो सकता कि पानी पीने योग्य है या नहीं। लोगों ने नगर निगम से मांग की कि वह अपना स्थायी जल परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित करे, ताकि दूषित पानी की शिकायत पर तत्काल जांच हो सके।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि लगातार शिकायतों के बावजूद न तो संवेदक पर कार्रवाई हो रही है और न ही स्थायी समाधान किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि जिस क्षेत्र में पाइपलाइन सबसे अधिक क्षतिग्रस्त है, वहीं सरकार के एक शीर्ष अधिकारी का आवास भी स्थित है। इसके बावजूद नगर निगम के अधिकारी गंभीर नहीं हैं।
लोगों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने महापौर और उपमहापौर से इस मामले में सख्त हस्तक्षेप की मांग की है।
- सतीष कुमार: शहरी क्षेत्र में जमीन से शुद्ध पानी निकल रहा है, इसका मतलब साफ है कि नगर निगम की लापरवाही से पानी दूषित हो रहा है।
- चितरंजन झा: नई नल-जल योजना की पाइपलाइन बार-बार टूटना गुणवत्ता पर सवाल खड़ा करता है।
- गौतम: नाले का पानी लीकेज से सप्लाई लाइन में मिल रहा है। लोग पैसा देकर बीमारी खरीद रहे हैं।
- मनोज कुमार: पंप हाउस का पानी जांचना काफी नहीं, घरों तक पहुंचने वाले पानी की बैक्टीरिया जांच जरूरी है।
- उमेश कुमार: यह समस्या सिर्फ वार्ड 34 नहीं, पूरे शहर की है। नगर निगम को गंभीरता से लेना चाहिए।
वार्ड में कई जगह पुरानी और नई दोनों पाइपलाइन में लीकेज है। जलकार्य शाखा से कई बार शिकायत की गई, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हुआ।
चंदा कुमारी, पार्षद, वार्ड 34