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    सूखे की आहट: मुजफ्फरपुर में जून में सामान्य से 54 फीसदी कम बारिश, धान की रोपनी प्रभावित

    Updated: Sun, 05 Jul 2026 02:06 PM (IST)

    El Nino Impact Bihar: मुजफ्फरपुर में जून 2026 में सामान्य से 54% कम बारिश हुई, जिससे सूखे का खतरा बढ़ गया है। अलनीनो के प्रभाव से धान की रोपनी प्रभावि ...और पढ़ें

    पिछले दो दिनों से बारिश का डाटा शून्य पर बना हुआ है। (AI Generated Image)

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    जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Muzaffarpur Rain Deficit: जिले में इस वर्ष जून महीने में मानसून की रफ्तार अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही, जिससे अब सूखे की आहट महसूस होने लगी है। अलनीनो के प्रभाव के कारण मानसून कमजोर पड़ गया है और पिछले दो दिनों से बारिश का डाटा शून्य पर बना हुआ है। 

    जून महीने में हुई इस बेहद कम बारिश का सीधा असर खेती-किसानी, विशेषकर धान की रोपनी की तैयारी पर पड़ने लगा है। खेतों में पर्याप्त नमी न होने के कारण किसान अब आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं।

    15 वर्षों के औसत से आधी भी बारिश नहीं 

    जलवायु परिवर्तन पर उच्च अध्ययन केंद्र, डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा से प्राप्त आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि जून 2026 में जिले में केवल 80.9 मिमी बारिश दर्ज की गई है। जबकि मुजफ्फरपुर में जून महीने की सामान्य वर्षा 176.6 मिमी मानी जाती है। 

    इस लिहाज से देखा जाए तो इस बार सामान्य से करीब 54 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जो पिछले 15 वर्षों के औसत के आधे से भी कम है। लगातार दूसरे वर्ष जून में सामान्य से काफी कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। 

    अलनीनो ने रोका मानसून का रास्ता

    पूसा विश्वविद्यालय के वरीय मौसम विज्ञानी डॉ. ए. सत्तार ने बताया कि बिहार प्रदेश में मानसून अपने निर्धारित समय से तो आ गया, लेकिन अलनीनो के प्रभाव के चलते यह आगे नहीं बढ़ सका और कमजोर पड़ गया। उन्होंने विस्तार से बताया कि अलनीनो एक प्राकृतिक और आवर्ती जलवायु घटना है। 

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    इसके सक्रिय होने पर मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से काफी अधिक हो जाता है। समुद्र के तापमान में होने वाला यह बदलाव दुनिया भर के मौसम, तापमान और वर्षा के पैटर्न को बाधित करता है, जिसके कारण इस बार मानसून प्रभावित हुआ है।

    इस सप्ताह से मौसम विभाग को उम्मीदें

    भले ही जून महीने ने किसानों को मायूस किया हो, लेकिन मौसम विभाग ने जुलाई के पहले सप्ताह में अच्छी वर्षा होने की संभावना जताई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जुलाई की शुरुआत में अच्छी और संतोषजनक बारिश हो जाती है, तो खेतों को संजीवनी मिल जाएगी। 

    इससे धान की रोपनी में तेजी आएगी और खरीफ फसलों की स्थिति में समय रहते सुधार हो सकेगा। फिलहाल जिले के किसान खरीफ फसलों को बचाने और कृषि कार्य को गति देने के लिए एक अच्छी बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।