Bihar Politics: 'मैं नीतीश का चमचा नहीं...', रातोंरात सीएम बदलने पर आनंद मोहन ने उठाए गंभीर सवाल
पूर्व सांसद आनंद मोहन ने नालंदा में जनसभा को संबोधित करते हुए बिहार की मौजूदा राजनीति, मुख्यमंत्री के पद परिवर्तन और विभागों के बंटवारे पर सवाल उठाए। ...और पढ़ें

'मैं नीतीश का चमचा नहीं...', रातों-रात सीएम बदलने पर आनंद मोहन ने उठाए गंभीर सवाल

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जागरण संवाददाता, बिहारशरीफ। नालंदा के मोरा तालाब में सोमवार की शाम आयोजित जनसभा में पूर्व सांसद आनंद मोहन (Anand Mohan) ने राज्य की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने मुख्यमंत्री के पद परिवर्तन, सत्ता संचालन, विभागों के बंटवारे और हाल के एनकाउंटर मामलों को लेकर सरकार पर कई सवाल उठाए।
साथ ही कहा कि वह किसी पुत्र या पत्नी मोह में नहीं, बल्कि लोकतंत्र को बचाने और जनता के सवाल उठाने के लिए मैदान में उतरे हैं। जनसभा को संबोधित करते हुए आनंद मोहन ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उनके नेता नहीं, बल्कि बड़े भाई हैं।
'मैं उनका चमचा नहीं हूं...'
उन्होंने कहा कि दोनों का राजनीतिक सफर जेपी आंदोलन से शुरू हुआ है। उन्होंने कहा, "मैं उनका चमचा नहीं हूं, भाई हूं और भाई को भाई से ज्यादा मोहब्बत होती है।"
उन्होंने सत्ता परिवर्तन पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब एनडीए ने '2025 से 30, फिर से नीतीश' का नारा दिया था और सरकार सुचारू रूप से चल रही थी, तो आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थिति उत्पन्न हो गई कि रातोंरात उन्हें पद से हटा दिया गया। उन्होंने इसे जनादेश और लोकतंत्र का अपमान बताया।
'दिल्ली-मुंबई से लेकर दुबई तक हजारों करोड़ का आर्थिक साम्राज्य'
पूर्व सांसद ने बिना किसी का नाम लिए सत्ता के शीर्ष पर बैठे कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पार्टी के लिए संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं को कुछ नहीं मिलता, जबकि पर्दे के पीछे काम करने वाले लोगों ने सत्ता का दुरुपयोग कर बिहार, दिल्ली, मुंबई से लेकर सिंगापुर और दुबई तक हजारों करोड़ रुपये का आर्थिक साम्राज्य खड़ा कर लिया है।
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उन्होंने मगध के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां राजा बृहद्रथ और पुष्यमित्र शुंग की कहानी दोहराई गई है। अपने ऊपर लग रहे पुत्र और पत्नी मोह के आरोपों को खारिज करते हुए आनंद मोहन ने कहा कि यदि उन्हें ऐसा मोह होता तो वह घर पर आराम करते, क्योंकि उनके परिवार में सांसद और विधायक दोनों हैं।
उन्होंने सरकार में विभागों के बंटवारे पर भी नाराजगी जताते हुए पूछा कि उनके समाज के नेताओं को केवल पीएचईडी, खेल-कला, आपूर्ति और सहकारिता जैसे विभाग ही क्यों दिए जाते हैं।
'राजपूत समाज गद्दार नहीं होता...'
उन्होंने कहा कि राजपूत समाज गद्दार नहीं होता, लेकिन अन्याय के खिलाफ बगावत करना जानता है। समाज के हर वर्ग की सुरक्षा और सम्मान के लिए आवाज उठाना उनकी जिम्मेदारी है। आरा में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर का जिक्र करते हुए आनंद मोहन ने कहा कि वह न तो बुलडोजर संस्कृति के पक्षधर हैं और न ही एनकाउंटर संस्कृति के।
उनका कहना था कि यदि कोई व्यक्ति आत्मसमर्पण करता है या न्यायिक हिरासत में है, तो उसकी सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है। पुलिस का काम आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत के समक्ष पेश करना है, जबकि दोषी या निर्दोष होने का फैसला न्यायालय को करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस ही सजा तय करने लगेगी तो न्यायपालिका की भूमिका समाप्त हो जाएगी।