राजगीर की सांसें थम रहीं! सप्तधारा की दो और गर्म जलधाराएं बंद, खतरे में सदियों पुरानी धरोहर
राजगीर की पौराणिक सप्तधारा गर्म जलधाराओं में से दो और बंद हो गई हैं, जिससे अब केवल तीन ही बची हैं और उनकी गति भी धीमी पड़ रही है। ...और पढ़ें

पौराणिक गर्म जल झरने और कुंड अब अस्तित्व संकट में
HighLights
सप्तधारा की दो और गर्म जलधाराएं बंद हो गईं।
राजगीर की पहचान और पर्यटन पर गहरा संकट।
जलधाराओं को बचाने के लिए 19 जुलाई को महापंचायत।
मनोज मायावी, राजगीर। अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और आध्यात्मिक नगरी राजगीर की पहचान रहे पौराणिक गर्म जल झरने और कुंड अब अस्तित्व के संकट से जूझ रहे हैं। ब्रह्मकुंड परिसर स्थित प्रसिद्ध सप्तधारा गर्म जल झरने की शेष बची पांच जलधाराओं में से दो और जलधाराएं बंद हो गई हैं।
अब केवल तीन जलधाराएं ही किसी तरह बह रही हैं और उनकी रफ्तार भी लगातार धीमी पड़ती जा रही है।
कभी इन जलधाराओं की आवाज सैकड़ों मीटर दूर से सुनाई देती थी, लेकिन आज वहां केवल बूंदों की टपकती आवाज सुनाई पड़ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियां इन्हें केवल इतिहास और किताबों में पढ़ेंगी।
कभी गूंजती थीं जलधाराएं, अब बूंद-बूंद को तरस रहा कुंड
राजगीर के गर्म जल झरने सदियों से धार्मिक आस्था और पर्यटन का प्रमुख केंद्र रहे हैं। सप्तर्षि जलधाराओं और ब्रह्मकुंड का महत्व हिंदू श्रद्धालुओं के बीच विशेष माना जाता है।
पुरुषोत्तम मास, श्रावणी मेला और मकर मेले के दौरान यहां लाखों श्रद्धालु स्नान करने पहुंचते हैं। इसके अलावा सालभर देश-विदेश से आने वाले पर्यटक भी इस धरोहर को देखने आते हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार पहले अनंत ऋषि, गंगा-जमुना, मार्कंडेय और व्यास जलधाराएं भी बहती थीं, लेकिन अब वे पूरी तरह बंद हो चुकी हैं।
पर्यटन और रोजगार पर भी मंडराने लगा संकट
राजगीर की अर्थव्यवस्था काफी हद तक पर्यटन पर आधारित है और गर्म जल कुंड इसकी सबसे बड़ी पहचान माने जाते हैं। जलधाराओं के सूखने का असर स्थानीय रोजगार और पर्यटन उद्योग पर भी पड़ सकता है।
होटल, दुकानदार, पंडा समाज और स्थानीय व्यवसायियों की आजीविका काफी हद तक यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों पर निर्भर है।
लोगों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो राजगीर की पहचान और पर्यटन दोनों को बड़ा नुकसान हो सकता है।
सप्तऋषि कॉरिडोर परियोजना पर भी बढ़ी चिंता
ब्रह्मकुंड परिसर स्थित सप्तधारा बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी सप्तऋषि कॉरिडोर परियोजना का भी अहम हिस्सा है। इस परियोजना का उद्देश्य राजगीर को विश्वस्तरीय धार्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना है।
खबरें और भी
योजना के तहत गर्म जलधाराओं, ब्रह्मकुंड और अन्य धार्मिक स्थलों के सौंदर्यीकरण और विकास का प्रस्ताव है।
ऐसे में जलधाराओं का लगातार बंद होना इस महत्वाकांक्षी परियोजना के सामने भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
बोरिंग और कम बारिश को माना जा रहा वजह
पंडा कमिटी और स्थानीय लोगों के अनुसार वर्ष 2018 के बाद कम बारिश और कुंड क्षेत्र के आसपास बड़े पैमाने पर हुई बोरिंग का असर गर्म जलधाराओं पर पड़ा है।
दिसंबर 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजगीर में बोरिंग पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा भी की थी। इसके बाद प्रशासन ने कई संस्थानों और प्रतिष्ठानों में लगे बोरिंग को सील भी किया था।
इसके बावजूद जलधाराओं का सूखना जारी है, जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई है।
धरोहर बचाने के लिए अब महापंचायत का सहारा
गर्म जलधाराओं को बचाने के लिए राजगीर विकास समिति, समाजसेवियों और स्थानीय लोगों ने जनजागरण अभियान शुरू कर दिया है।
इस कड़ी में 19 जुलाई को "कुंड धरोहर बचाओ महापंचायत" आयोजित की जाएगी। इसका उद्देश्य सरकार और समाज का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित करना है।
लोगों का कहना है कि यह केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि राजगीर की पहचान, आस्था और इतिहास को बचाने की लड़ाई है।