सनातन की एकमात्र धरती राजगीर, जहां 1 महीने तक होता है 33 कोटि देवी-देवताओं का वास
राजगीर में हर तीसरे वर्ष लगने वाला पुरुषोत्तम मास मेला 2026 में 17 मई से 15 जून तक आयोजित होगा, जहां एक महीने तक 33 कोटि देवी-देवताओं का वास माना जाता ...और पढ़ें

सनातन की एकमात्र धरती राजगीर, जहां 1 महीने तक होता है 33 कोटि देवी-देवताओं का वास (Pic Credit: Bihar Tourism)

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रजनीकांत, राजगीर। राजगीर को यूं ही सर्वधर्म समभाव की धरती नहीं कहा जाता। यह नगरी बौद्ध, जैन, सूफी और सनातन परंपराओं की अद्भुत संगम स्थली है। सनातन धर्म में इसकी महत्ता इतनी अधिक है कि हर तीसरे वर्ष लगने वाले पुरुषोत्तम मास मेले के दौरान यहां पूरे एक महीने तक 33 कोटि देवी-देवताओं का वास माना जाता है।
इसी आस्था के कारण पुरुषोत्तम मास मेला देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है। वर्ष 2026 में यह मेला 17 मई से 15 जून तक चलेगा। वर्ष 2023 में आयोजित मेले में करीब एक करोड़ 92 लाख श्रद्धालुओं ने पवित्र कुंडों में स्नान कर पुण्य अर्जित किया था।
कुंभ की तर्ज पर होता है शाही स्नान पुरुषोत्तम मास मेले का सबसे बड़ा आकर्षण शाही स्नान होता है। इस दौरान देशभर से पहुंचे साधु-संत विभिन्न कुंडों में सामूहिक स्नान करते हैं। श्रद्धालु इसे अत्यंत पुण्यदायी मानते हैं।
राजगीर के ब्रह्मकुंड और सप्तधाराओं में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि यहां स्नान करने से पापों का नाश होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था
नालंदा के जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने बताया कि इस बार मेले को भव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए कई नई व्यवस्थाएं की जा रही हैं। श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए जर्मन हैंगर तकनीक से निर्मित टेंट सिटी बसाए हैं।
जहां हजारों लोगों के रहने की व्यवस्था होगी। इन अस्थायी टेंट सिटी में शौचालय, पेयजल, सहायता केंद्र, पुलिस नियंत्रण कक्ष और अस्थायी चिकित्सालय की सुविधा उपलब्ध रहेगी। महिलाओं के लिए अलग चेंजिंग रूम भी बनाए गए हैं।
ड्रोन से होगी निगरानी
इस बार मेले की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया गया है। पूरे मेला क्षेत्र में निगरानी यंत्र लगाए जा रहे हैं और भीड़ पर नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरे से सहायता ली जाएगी।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए राजगीर के 38 स्थानों पर पुलिस सहायता केंद्र बनाए जा रहे हैं। वाहनों के सुचारु परिचालन के लिए आठ अलग-अलग मार्गों पर वाहन पड़ाव की व्यवस्था की गई है।
भोजन और उपचार की विशेष व्यवस्था
श्रद्धालुओं के लिए ‘दीदी की रसोई’ और सस्ती रोटी केंद्र खोले जाएंगे। जगह-जगह उपचार शिविर और रोगी वाहन की व्यवस्था भी रहेगी। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए ई-रिक्शा और बसों का किराया भी निर्धारित कर दिया गया है।
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क्या होता है पुरुषोत्तम मास?
हिंदू पंचांग के अनुसार लगभग हर 32 माह 16 दिन बाद एक अतिरिक्त मास जुड़ता है, जिसे अधिक मास अथवा पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। इस अवधि में विवाह और अन्य मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस मास में भगवान विष्णु और भगवान शिव की आराधना विशेष फलदायी होती है।
मेले के दौरान क्यों नहीं दिखते काग?
राजगीर के पुरुषोत्तम मास मेले से जुड़ी एक प्राचीन मान्यता भी प्रचलित है। कहा जाता है कि ब्रह्मा जी के मानस पुत्र राजा वसु ने ब्रह्मकुंड में यज्ञ के दौरान 33 कोटि देवी-देवताओं को आमंत्रित किया था, लेकिन काग को निमंत्रण देना भूल गए थे।
तभी से पुरुषोत्तम मास मेले के दौरान पूरे एक महीने तक राजगीर के आकाश में काग दिखाई नहीं देते। राजगीर में धार्मिक महत्व के 22 कुंड और 52 धाराएं हैं।
ऐसे पहुंचें राजगीर
पटना से राजगीर की दूरी लगभग 100 किलोमीटर है। यह नालंदा जिला मुख्यालय बिहारशरीफ से करीब 25 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। यहां दिल्ली, हावड़ा, पटना समेत कई स्थानों से रेल सेवा उपलब्ध है। पटना से नियमित बस सेवा भी संचालित होती है।