Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    बॉर्डर पर पैर गंवाने के बाद भी नहीं कम हुआ देशभक्ति का जज्बा, भारतीय सेना के जवान ने कॉमनवेल्थ में जीता गोल्ड 

    Updated: Sun, 02 Aug 2026 12:01 AM (IST)

    भारतीय सेना के पूर्व जवान और पैरा एथलीट सोमन राणा ने राष्ट्रमंडल खेल 2026 में शॉटपुट F57 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता है। उन्होंने देश के लिए पैर गंवान ...और पढ़ें

    सोमन राणा। फोटो जागरण

    सोमन राणा। फोटो जागरण

    HighLights

    1. भारतीय सेना के पूर्व जवान सोमन राणा ने देश के लिए पैर गंवाया।

    2. राष्ट्रमंडल खेल 2026 में शॉटपुट F57 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता।

    3. परिवार और सेना के सहयोग से संघर्ष कर यह बड़ी उपलब्धि हासिल की।

    रजनीकांत, बिहारशरीफ। भारतीय सेना के अनुशासन, परिवार के विश्वास और अपने जज्बे के दम पर पैरा एथलीट सोमन राणा ने राष्ट्रमंडल खेल में इतिहास रच दिया। एक सैनिक के रूप में देश के दुश्मनों से लड़ते हुए पैर गंवाया, तो खिलाड़ी के रूप में अपने भारत के लिए स्वर्ण जीता।

    इस उपलब्धि के पीछे उनके संघर्ष की एक प्रेरक कहानी भी है। उन्होंने पुरुषों की शाटपुट एफ 57 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया है। गया जिले के मानपुर प्रखंड स्थित लक्खीबाग मोहल्ले के निवासी हैं। पिता सोन बहादुर राणा व माता माया देवी राणा। सोमन 2001 में भारतीय सेना की गोरखा राइफल्स में सिपाही के रूप में भर्ती हुए।

    खेलों में उनकी रुचि शुरू से रही। बाक्सिंग में भी काफी दिलचस्पी रही। उन्होंने ग्लासगो से मोबाइल पर हुई बात में बताया कि 2006 में जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर सर्च ऑपरेशन के दौरान उनका पैर लैंडमाइंस पर पड़ गया। विस्फोट इतना भीषण था कि उन्हें अपना दाहिना पैर गंवाना पड़ा।

    इलाज और कृत्रिम पैर लगने के बाद करीब दस वर्षों तक सेना में प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाते रहे। उन्हें लगने लगा था कि खेलों का सफर समाप्त हो चुका है। इसी दौरान सेना के पैरालिंपिक नोड से जुड़ने का अवसर मिला और उन्होंने स्वयं को शाटपुट में आजमाया।

    खबरें और भी

    वे बताते हैं कि बाक्सिंग के राइट क्रास पंच और शॉटपुट की तकनीक में काफी समानता है। यही वजह रही कि इस खेल में स्वयं को ढालने में उन्हें अधिक समय नहीं लगा। लगातार मेहनत का परिणाम यह रहा कि टोक्यो पैरालिंपिक 2020 और पेरिस पैरालिंपिक 2024 में शामिल हुए। अब राष्ट्रमंडल 2026 में स्वर्ण पदक जीता।

    वे कहते हैं कि पैर गंवाने के बाद परिवार, दोस्तों और सेना के साथियों ने उनका मनोबल कभी टूटने नहीं दिया। यही सहयोग उन्हें आगे बढ़ाता रहा। उन्होंने अपना स्वर्ण पदक देश और भारतीय सेना को समर्पित करते हुए कहा कि इस उपलब्धि में सभी की दुआओं और विश्वास का बड़ा योगदान है।

    बिहार लौटकर पिता का घर बनवाना है सपना

    राणा के पिता सोन बहादुर राणा किसान हैं। बड़े भाई योगेंद्र राणा दुबई में नौकरी करते हैं। पत्नी सीता राणा हर कदम पर उनका साथ देती हैं। बड़ी बेटी सुनाक्षी राणा नर्सिंग की पढ़ाई कर रही हैं, जबकि बेटा सुयम्स राणा नौवीं कक्षा का छात्र है। सभी पुणे में ही रहते हैं।

    उन्होंने बताया कि पैतृक घर गयाजी जाना नहीं के बराबर हो पाता है, लेकिन उनका सबसे बड़ा सपना बिहार लौटकर अपने पिता का घर बनवाना है। मां का 2022 में निधन हो चुका है। भावुक होकर उन्होंने कहा, अगर मां आज होतीं तो मेरी इस सफलता पर सबसे ज्यादा खुश वही होतीं।

    उन्होंने बताया कि घर की स्थिति अच्छी नहीं थी। पिता एक सामान्य किसान थे। पुणे चले आए, प्राइवेट नौकरी की। सोमन राणा ने कहा कि भारतीय सेना ने उन्हें सिर्फ एक सैनिक नहीं बनाया, बल्कि हर मुश्किल परिस्थिति में लड़ना और जीतना भी सिखाया। उन्होंने बताया कि अगस्त के अंतिम सप्ताह में बिहार आने की योजना है।

    यह भी पढ़ें- पैरालंपिक खिलाड़ी विनोद कुमार को झटका, विनेश फोगाट की तरह नहीं मिलेंगे चार करोड़ रुपये, हाई कोर्ट ने क्या कहा?