बिहार में जमीन विवादों पर लगेगा ब्रेक: नवादा के मेसकौर में भूमि सर्वे तेज, 57 गांवों का सीमांकन पूरा
मेसकौर अंचल में विशेष भूमि सर्वेक्षण अभियान तेजी से चल रहा है, जिसमें 57 राजस्व ग्रामों का सीमा सत्यापन पूरा हो चुका है। यह अभियान पुराने भूमि अभिलेखो ...और पढ़ें

नवादा के मेसकौर में भूमि सर्वे तेज, 57 गांवों का सीमांकन पूरा (AI Generated Image)
HighLights
मेसकौर अंचल में विशेष भूमि सर्वेक्षण अभियान जारी है।
57 राजस्व ग्रामों का सीमा सत्यापन कार्य पूरा हुआ।
भूमि विवाद कम करने, रैयतों के अधिकार सुरक्षित करने का लक्ष्य।
संवाद सूत्र, मेसकौर (नवादा)। बिहार सरकार के विशेष भूमि सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त अभियान के तहत मेसकौर अंचल में सर्वेक्षण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्षों पुराने भूमि अभिलेखों को अद्यतन करने, वास्तविक रैयतों के अधिकार सुरक्षित करने तथा भूमि विवादों को कम करने के उद्देश्य से राजस्व विभाग की टीम गांव-गांव पहुंचकर सीमांकन, किश्तवार एवं अभिलेख सत्यापन का कार्य कर रही है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि आम लोगों के सहयोग से यह अभियान समय पर पूरा होगा और भविष्य में भूमि संबंधी विवादों में काफी कमी आएगी।
शिविर प्रभारी शशि प्रसाद ने बताया कि मेसकौर अंचल के कुल 57 राजस्व ग्रामों में त्रिस्तरीय सीमा निर्धारण एवं सीमा सत्यापन का कार्य शत-प्रतिशत पूरा कर लिया गया है। इनमें से 22 राजस्व ग्रामों में किश्तवार कार्य शुरू किया गया है। जिनमें 14 राजस्व ग्रामों का किश्तवार पूरा हो चुका है, जबकि आठ राजस्व ग्रामों में कार्य जारी है।
वर्तमान में औरैना, बांधी, हरला, शेखावारा, पवई , गम्भीरा एवं झिकटिया गांवों में अमीनों की टीम नक्शा एवं अभिलेखों का धरातल से मिलान कर रही है।
उन्होंने बताया कि किश्तवार के दौरान अमीन प्रत्येक प्लाट का पुराने नक्शे से मिलान कर वास्तविक स्थिति का सत्यापन करते हैं। इसके बाद खानापूरी की प्रक्रिया में उपलब्ध दस्तावेजों, साक्ष्यों एवं दावों के आधार पर मालिकाना हक का सत्यापन किया जाएगा। तत्पश्चात खतियान की प्रविष्टियां एलपीएम में दर्ज की जाएंगी। उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण की पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार होगी।
प्रारूप प्रकाशन के बाद रैयतों को 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का मिलेगा मौका
प्रारूप प्रकाशन के बाद प्रपत्र-8 के तहत रैयतों को 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलेगा। आपत्तियों के निष्पादन के बाद संशोधित प्रारूप प्रकाशित किया जाएगा।
खबरें और भी
यदि इसके बाद भी किसी प्रकार की त्रुटि या विवाद रह जाता है तो प्रपत्र-14 एवं प्रपत्र-21 के प्रावधानों के तहत पुनः दावा-आपत्ति की सुनवाई की जाएगी। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद अंतिम अभिलेख प्रकाशित किए जाएंगे।
बिहार में चल रहा विशेष भूमि सर्वेक्षण अभियान केवल नक्शा तैयार करने का कार्य नहीं है, बल्कि यह राज्य के राजस्व अभिलेखों को आधुनिक, पारदर्शी और विवादमुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
इससे वास्तविक रैयतों के अधिकार सुरक्षित होंगे, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा भूमि संबंधी मुकदमों में कमी आने की उम्मीद है। चूंकि यह कार्य तकनीकी एवं विस्तृत है, इसलिए पूरे प्रखंड में सर्वेक्षण पूर्ण होने में अभी समय लगेगा।
शिविर प्रभारी शशि प्रसाद ने सभी रैयतों, जनप्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों एवं ग्रामीणों से अपील की कि जिस भी राजस्व ग्राम में अमीन एवं सर्वेक्षण दल पहुंचे, वहां आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराएं और सही जानकारी दें। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण दल के साथ सहयोग करने से भूमि का सही अभिलेख तैयार होगा और भविष्य में आम लोगों को अनावश्यक विवाद एवं कानूनी परेशानियों से राहत मिलेगी।
इस कार्य को पूरा करने के लिए प्रखंड क्षेत्र में 14 अमीन ,दो लिपिक एवं एक शिविर प्रभारी कार्य कर रहे हैं।