एम्स पटना में मूट कोर्ट शुरू, अब डॉक्टर सीखेंगे अदालत में मेडिकल गवाही देने का तरीका
एम्स पटना में मेडिकल छात्रों और रेजिडेंट डॉक्टरों को अदालत में मेडिकल गवाही देने का अभ्यास कराने के लिए एक मूट कोर्ट और अत्याधुनिक फोरेंसिक मेडिसिन सं ...और पढ़ें

एम्स पटना।
जागरण संवाददाता, पटना। अदालत में किसी दुर्घटना, हत्या, जहरखुरानी या यौन अपराध के मामले में डॉक्टर की मेडिकल रिपोर्ट और गवाही कई बार केस की दिशा तय करती है।
ऐसे मामलों में डॉक्टर को सिर्फ मरीज का इलाज ही नहीं करना होता, बल्कि जरूरत पड़ने पर अदालत में विशेषज्ञ गवाह के रूप में मेडिकल तथ्यों को भी समझाना पड़ता है।
अब एम्स पटना के मेडिकल छात्र और रेजिडेंट डॉक्टर इस पूरी प्रक्रिया का अभ्यास मूट कोर्ट में करेंगे। इसके लिए संस्थान में अत्याधुनिक फोरेंसिक मेडिसिन संग्रहालय और मूट कोर्ट शुरू किया गया है।
शनिवार को एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने इसका उद्घाटन किया। इस अवसर पर चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) प्रशांत कुमार सिंह भी थे।
क्या है मूट कोर्ट
मूट कोर्ट का मतलब ऐसी प्रशिक्षण अदालत से है, जहां वास्तविक अदालत जैसी व्यवस्था बनाकर विद्यार्थियों को न्यायिक प्रक्रिया का अभ्यास कराया जाता है।
एम्स पटना में मेडिकल छात्र और रेजिडेंट डाक्टर यहां मेडिको-लीगल मामलों में विशेषज्ञ गवाह के रूप में अपनी बात रखना सीखेंगे।
मरीजों को इसका क्या फायदा होगा?
फोरेंसिक मेडिसिन में प्रशिक्षित डाक्टर मेडिको-लीगल मामलों की जांच और दस्तावेजीकरण बेहतर तरीके से कर सकेंगे। इससे दुर्घटना, हिंसा, विषाक्तता और अन्य अपराधों से जुड़े मामलों में मेडिऔकल साक्ष्यों की गुणवत्ता बेहतर होने की उम्मीद है। इसका लाभ अप्रत्यक्ष रूप से मरीजों, पीड़ितों र उनके परिवारों को भी मिल सकता है।
संग्रहालय में क्या-क्या देख सकेंगे छात्र?
फोरेंसिक मेडिसिन एवं टाक्सिकोलाजी विभाग की ओर से विकसित संग्रहालय में संरक्षित मानव अंगों के नमूने, कंकाल, विष विज्ञान से जुड़े नमूने, मेडिको-लीगल माडल, फोरेंसिक उपकरण और अन्य शैक्षणिक सामग्री रखी गई है।
इन नमूनों के माध्यम से विद्यार्थियों को किताबों में पढ़ाए जाने वाले विषयों को वास्तविक उदाहरणों के जरिए समझने का अवसर मिलेगा।
विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अमित पाटिल ने बताया कि संग्रहालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ वास्तविक मेडिको-लीगल परिस्थितियों का व्यावहारिक अनुभव देना है।
जहर और हथियारों के नमूनों पर क्यूआर कोड
संग्रहालय में विष और हथियारों से जुड़े प्रदर्शों पर क्यूआर कोड लगाए गए हैं। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. तोशल डी. वानखेड़े ने बताया कि विद्यार्थी क्यूआर कोड स्कैन कर संबंधित प्रदर्श के बारे में वैज्ञानिक, विष विज्ञान और मेडिको-लीगल जानकारी तुरंत प्राप्त कर सकेंगे। इससे छात्रों के लिए पढ़ाई अधिक इंटरैक्टिव और प्रभावी होगी।
अदालत और अस्पताल के बीच बेहतर समन्वय की उम्मीद
फोरेंसिक मेडिसिन का सीधा संबंध चिकित्सा और कानून, दोनों से है। किसी व्यक्ति की मौत का कारण, चोट की प्रकृति, जहर का असर या किसी अपराध से जुड़े मेडिकल साक्ष्य को वैज्ञानिक तरीके से दर्ज करना डॉक्टर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। मूट कोर्ट और फोरेंसिक संग्रहालय के माध्यम से मेडिकल छात्रों को इन जिम्मेदारियों की व्यावहारिक समझ मिलेगी।