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    बख्तियारपुर स्टेशन का नाम बदलने की मांग तेज, पटना में किया गया धरना प्रदर्शन

    Updated: Mon, 29 Jun 2026 08:05 PM (IST)

    बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन का नाम 'शीलभद्र याजी नगर' करने की मांग एक बार फिर जोर-शोर से उठाई गई है। स्वतंत्रता सेनानी संगठन ने याजी के समाधि स्थल पर धरन ...और पढ़ें

    शीलभद्र याजी के सम्मान में धरना। फोटो जागरण

    शीलभद्र याजी के सम्मान में धरना। फोटो जागरण

    HighLights

    1. बख्तियारपुर स्टेशन का नाम बदलने की मांग फिर उठी।

    2. शीलभद्र याजी के सम्मान में संगठन ने धरना दिया।

    3. मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार से शीघ्र कार्रवाई की अपील।

    जागरण संवाददाता, बख्तियारपुर। अखिल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी संगठन एवं उत्तराधिकारी संगठन बिहार ने बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर 'शीलभद्र याजी नगर' करने की मांग एक बार फिर जोरदार तरीके से उठाई है।

    सोमवार को इस क्रम में पंडित याजी के समाधि स्थल पर लोगों ने एक दिवसीय धरना दिया। संगठन के महासचिव रामानंद शर्मा ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्र सरकार से इस दिशा में शीघ्र कार्रवाई करने की अपील की।

    सालों पुरानी मांग

    वक्ताओं ने कहा कि 1997 में जब देश आजादी की 50वीं वर्षगांठ मना रहा था, उसी समय महान क्रन्तिकारी, महान स्वतंत्रता सेनानी, नेताजी सुभाषचंद्र बोस के बाद फॉरवर्ड ब्लॉक के अध्यक्ष रहे शीलभद्र याजी के सम्मान में बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन का नाम “शीलभद्र याजी नगर” करने का प्रस्ताव रखा गया था।

    उस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल के कार्यकाल में इस विषय पर गंभीरता से विचार हुआ था और संबंधित समिति द्वारा प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई थी।

    इस दौरान संयुक्त समिति ने प्रस्ताव के पक्ष में सकारात्मक अनुशंसा दी थी। इसके बाद बिहार के तत्कालीन राज्यपाल ने भी सहमति देते हुए प्रस्ताव रेल मंत्रालय को भेजा।

    वहीं, वर्ष 2005 में बिहार सरकार के गृह विभाग द्वारा रेल मंत्रालय को पत्र भेजकर नाम परिवर्तन की मांग को आगे बढ़ाया गया था। लोगों के मुताबिक यह मांग राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित नहीं है, बल्कि स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान और इतिहास को उचित पहचान दिलाने का प्रयास है।

    कोर्ट मार्शल की सजा भुगतने वाले पहले सिविलियन

    उन्होंने कहा कि शीलभद्र याजी केवल बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश के गौरव थे और वे नेताजी सुभाष चंद्र बोस के करीबी सहयोगियों में शामिल थे और यह पहले सिविलियन थे, जिन्हें लाल किले पर कोर्ट मार्शल हुआ था

    संगठन ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पुराने बयानों का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने पहले भी बिहार में आक्रांताओं के नाम पर बने कई शहरों और स्टेशनों के नाम बदलने की बात कही थी।

    ऐसे में सरकार पुराने दस्तावेजों और सिफारिशों की समीक्षा कर जल्द सकारात्मक निर्णय ले। बताते चलें इन दिनों यहां फिर से बख्तियारपुर का नाम बदलने की चर्चा जोरों पर है।

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