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    25 प्रत्याशी, 1 सीट और अनगिनत समीकरण... बांकीपुर में किसके साथ होगा खेल, कौन होगा फेल?

    Updated: Fri, 17 Jul 2026 08:40 PM (IST)

    बांकीपुर उपचुनाव इस बार 25 प्रत्याशियों के साथ बेहद रोचक और जटिल हो गया है, जिससे भाजपा, राजद और जन सुराज जैसे बड़े दलों की चिंता बढ़ गई है। ...और पढ़ें

    स्थानीय चेहरे भी बन सकते हैं गेम चेंजर

    स्थानीय चेहरे भी बन सकते हैं गेम चेंजर

    HighLights

    1. बांकीपुर उपचुनाव में 25 प्रत्याशी, मुकाबला हुआ बेहद जटिल।

    2. प्रशांत किशोर के मैदान में उतरने से सीट बनी हाई प्रोफाइल।

    3. छोटे दल, निर्दलीय उम्मीदवार बिगाड़ सकते हैं बड़े दलों का खेल।

    जागरण संवाददाता, पटना। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव इस बार 2025 के विधानसभा चुनाव से कहीं ज्यादा रोचक और जटिल हो गया है। पिछले चुनाव में जहां केवल नौ प्रत्याशी मैदान में थे, वहीं इस बार नाम वापसी के बाद 25 उम्मीदवार चुनावी अखाड़े में हैं।

    आठ निर्दलीय और 14 छोटे दलों के प्रत्याशियों ने मुकाबले को बहुकोणीय बना दिया है। इससे भाजपा, राजद और जन सुराज जैसे बड़े दलों की चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार हर वोट की कीमत पहले से ज्यादा होगी।

    प्रशांत किशोर की एंट्री से हाई प्रोफाइल हुई सीट

    2025 के चुनाव में भाजपा के नितिन नवीन और राजद की रेखा कुमारी के बीच मुख्य मुबला था। जन सुराज की प्रत्याशी वंदना कुमारी तीसरे स्थान पर रही थीं।

    इस बार जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर खुद मैदान में उतर गए हैं। उनके चुनाव लड़ने से बांकीपुर उपचुनाव अचानक हाई प्रोफाइल बन गया है। अब मुकाबला सीधा नहीं बल्कि त्रिकोणीय और बेहद कांटेदार नजर आ रहा है।

    छोटे दल और निर्दलीय बढ़ा रहे बड़े दलों की धड़कन

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि छोटे दल और निर्दलीय उम्मीदवार निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

    यदि इनमें से कई उम्मीदवार 500 से 2000 वोट भी हासिल कर लेते हैं तो परिणाम प्रभावित हो सकता है।

    ऐसे में वोटों का बिखराव जीत और हार के अंतर को बदल सकता है। इसी वजह से बड़े दलों की रणनीति केवल अपने वोट जुटाने तक सीमित नहीं रह गई है। उन्हें अब वोट कटवा समीकरणों पर भी नजर रखनी पड़ रही है।

    क्या अचानक बढ़ी संख्या के पीछे कोई राजनीतिक रणनीति है?

    बांकीपुर को लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। यही कारण रहा कि पहले छोटे दल और निर्दलीय यहां चुनाव लड़ने से बचते थे।

    लेकिन इस बार अचानक उम्मीदवारों की संख्या बढ़ने से कई सवाल उठ रहे हैं। राजनीतिक हलकों में इसे रणनीतिक चाल के तौर पर भी देखा जा रहा है।

    कुछ वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि वोटों के ध्रुवीकरण को प्रभावित करने की कोशिश हो सकती है।

    स्थानीय चेहरे भी बन सकते हैं गेम चेंजर

    निर्दलीय उम्मीदवारों में कई सामाजिक कार्यकर्ता और पुराने राजनीतिक चेहरे भी शामिल हैं। इनमें से कुछ उम्मीदवार अपने क्षेत्र और समुदाय में अच्छी पकड़ रखते हैं।

    भले ही वे जीत की दौड़ में न हों, लेकिन कुछ बूथों पर प्रभाव जरूर डाल सकते हैं। छोटे दल अक्सर जातीय, सामाजिक या वैचारिक आधार पर चुनाव लड़ते हैं। ऐसे में उनका प्रदर्शन अंतिम नतीजे का गणित बदल सकता है।

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    आंकड़ों में समझिए बांकीपुर का बदलता चुनावी समीकरण

    2025 के विधानसभा चुनाव में कुल 13 नामांकन हुए थे, जिनमें से नौ उम्मीदवार मैदान में बचे थे। वहीं 2026 के उपचुनाव में 40 लोगों ने नामांकन दाखिल किया।

    14 नामांकन रद हुए और एक उम्मीदवार ने नाम वापस लिया। इसके बाद अब कुल 25 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।

    बांकीपुर में इस बार मुकाबला जितना बड़ा दिख रहा है, उतना ही पेचीदा भी माना जा रहा है।