Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    बिहार में रेलवे की शर्मनाक करतूत: एंबुलेंस की बजाय ठेले से भेजा ट्रेन से कटे व्यक्ति का शव, लोगों में आक्रोश

    Updated: Mon, 29 Jun 2026 10:42 PM (IST)

    बाढ़ कोर्ट हाल्ट पर ट्रेन से कटे एक व्यक्ति के शव को रेल पुलिस ने एम्बुलेंस के बजाय ठेले पर लादकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। इस अमानवीय कृत्य से स्थानीय ...और पढ़ें

    शव उतारते परिजन। फोटो जागरण

    शव उतारते परिजन। फोटो जागरण

    HighLights

    1. बाढ़ में ट्रेन से कटे व्यक्ति की मौत।

    2. रेल पुलिस ने शव को ठेले पर भेजा।

    3. अमानवीय कृत्य पर जनता में भारी आक्रोश।

    संवाद सहयोग, बाढ़। दानापुर रेल मंडल के बाढ़ कोर्ट हाल्ट पर सोमवार को ट्रेन की चपेट में आने से एक अधेड़ व्यक्ति की दर्दनाक मौत हो गई। इस दुखद हादसे के बाद रेल पुलिस का एक बेहद अमानवीय और संवेदनहीन चेहरा सामने आया है।

    स्टेशन परिसर और अस्पताल में सरकारी एम्बुलेंस की व्यवस्था होने के बावजूद रेल पुलिस ने मृतक के शव को सम्मानजनक तरीके से ले जाने के बजाए एक समान ढोने वाले ठेले पर लादकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

    रेल पुलिस की इस घोर लापरवाही और संवेदनहीनता को देखकर स्टेशन पर मौजूद आम यात्रियों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा गया।

    हाल्ट जाने के क्रम में अज्ञात ट्रेन की चपेट में आए मनीष

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, बाढ़ थाना क्षेत्र के गोनावां कॉलोनी निवासी 42 वर्षीय मनीष कुमार सोमवार को किसी काम से रेलवे लाइन के किनारे-किनारे होकर बाढ़ कोर्ट हाल्ट की तरफ जा रहे थे।

    इसी दौरान पटरी पार करने या अचानक असंतुलन होने के कारण वे एक तेज रफ्तार अज्ञात ट्रेन की चपेट में आ गए। ट्रेन के धक्के से घटनास्थल पर ही मनीष कुमार की दर्दनाक मौत हो गई।

    घटना की भनक लगते ही रेल पुलिस (जीआरपी) की टीम मौके पर पहुंची और शव को हाल्ट से उठाकर बाढ़ रेलवे स्टेशन परिसर में लाकर रख दिया, जिसके बाद शिनाख्त होने पर मृतक के परिजनों को इसकी सूचना दी गई।

    अस्पताल में खड़ी रही एम्बुलेंस, ₹800 में ठेले से भेजा शव

    हद तो तब हो गई जब कानूनी कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए बाढ़ अनुमंडलीय अस्पताल भेजने की बारी आई। नियमानुसार और मानवीय दृष्टिकोण से शव को एम्बुलेंस या किसी बंद वाहन से भेजा जाना चाहिए था।

    खबरें और भी

    अनुमंडलीय अस्पताल व प्रशासन के पास इसकी पर्याप्त व्यवस्था भी रहती है, लेकिन रेल पुलिस ने संवेदनहीनता की सारी हदें पार करते हुए ₹800 में एक निजी ठेले वाले को तय किया और खुलेआम शव को उस पर लादकर बाजार के रास्ते अस्पताल भेज दिया।

    राहगीरों ने जब रेल पुलिस की इस अमानवीय हरकत को देखा, तो हर कोई प्रशासन की इस कार्यशैली की थू-थू करने लगा।

    परिजनों में कोहराम, पुलिस की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

    इधर, हादसे की खबर मिलते ही गोनावां कॉलोनी स्थित मृतक मनीष कुमार के घर में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं, स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि सरकार और रेल प्रशासन भले ही दावों में संवेदनशीलता की बात करते हों, लेकिन जमीन पर पुलिस कर्मियों का रवैया आज भी औपनिवेशिक और संवेदनहीन बना हुआ है।

    किसी भी शव की इस तरह गरिमा तार-तार करना न्यायसंगत नहीं है। ग्रामीणों ने वरीय रेल अधिकारियों से इस घोर लापरवाही के जिम्मेदार दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की है।

    यह भी पढ़ें- पटना में 5 स्टेशनों के बीच 2 जुलाई से दौड़ेगी मेट्रो, 30 रुपये होगा अधिकतम किराया; रूट तय