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    बियाडा का बड़ा कदम, 45 उद्यमियों से वापस ली 87.36 एकड़ जमीन; नए निवेशकों को मिलेगा मौका

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 08:40 PM (IST)

    बियाडा ने 45 उद्यमियों से 87.36 एकड़ निष्क्रिय औद्योगिक भूमि वापस ली है, जिससे नए निवेशकों को अवसर मिलेगा। इस कदम से बिहार में 1200 करोड़ रुपये से अधि ...और पढ़ें

    अनुपयोगी जमीन पर अब होंगे नए उद्योग

    अनुपयोगी जमीन पर अब होंगे नए उद्योग

    HighLights

    1. बियाडा ने 45 उद्यमियों से 87.36 एकड़ निष्क्रिय भूमि वापस ली।

    2. वापस ली गई भूमि अब नए निवेशकों को आवंटित की जाएगी।

    3. 1200 करोड़ निवेश और 1000 रोजगार सृजन की संभावना।

    राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (बियाडा) ने विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में निष्क्रिय पड़ी 87.36 एकड़ भूमि 45 उद्यमियों से वापस ले ली है। उद्योग विभाग ने इसके बदले 25.097 करोड़ रुपये की पहली किस्त के रूप में चेक सौंपे। यह राशि कुल देय भुगतान का 40 प्रतिशत है।

    अनुपयोगी जमीन पर अब होंगे नए उद्योग

    बियाडा ने स्पष्ट किया कि वापस ली गई भूमि अब उन नए निवेशकों को आवंटित की जाएगी, जिनके निवेश प्रस्ताव पहले ही स्वीकृत हो चुके हैं। इसका उद्देश्य निष्क्रिय औद्योगिक भूखंडों का उत्पादक उपयोग सुनिश्चित करना है।

    दो नीतियों के तहत हुई कार्रवाई

    बियाडा एक्जिट पॉलिसी-2025 के तहत 44 उद्यमियों से 85.90 एकड़ भूमि वापस ली गई, जिसके बदले 22.283 करोड़ रुपये की पहली किस्त दी गई।

    वहीं, एक्जिट पॉलिसी-2023 के तहत 1.46 एकड़ भूमि के बदले एक उद्यमी को 2.813 करोड़ रुपये दिए गए।

    1200 करोड़ निवेश और 1000 रोजगार की उम्मीद

    उद्योग विभाग के अनुसार, एक्जिट पॉलिसी के तहत 95 एकड़ से अधिक भूमि वापस ली जा रही है।

    इस जमीन पर 1200 करोड़ रुपये से अधिक के नए निवेश और एक हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।

    उद्योग मंत्री ने बताई नीति की अहमियत

    उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने कहा कि बियाडा एक्जिट पॉलिसी का उद्देश्य अनुपयोगी औद्योगिक भूमि को फिर से उद्योगों के लिए उपलब्ध कराना है। इससे नए निवेशकों को अवसर मिलेगा और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।

    संशोधित भूमि आवंटन नीति भी जारी

    कार्यक्रम के दौरान उद्योग मंत्री ने बियाडा भूमि आवंटन एवं प्रबंधन नीति (संशोधित)-2026 का भी विमोचन किया। नई नीति का उद्देश्य औद्योगिक भूखंडों के आवंटन और प्रबंधन को अधिक पारदर्शी, सरल, समयबद्ध और निवेशक-अनुकूल बनाना है।

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