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    बिहार कैबिनेट के फैसले: राजगीर में बनेगा स्पोर्ट्स सेंटर और शुरू होगा हेली-टूरिज्म, 16 अस्पतालों का सिस्टम बदला

    Updated: Wed, 05 Aug 2026 08:15 PM (IST)

    बिहार कैबिनेट ने 16 मेडिकल कॉलेजों को पीपीपी मॉडल पर संचालित करने और 34 बाल गृहों की सुरक्षा के लिए 330 गृह रक्षकों की नियुक्ति को मंजूरी दी। ...और पढ़ें

    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी

    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी

    HighLights

    1. 16 मेडिकल कॉलेज पीपीपी मॉडल पर संचालित होंगे।

    2. 34 बाल गृहों में 330 गृह रक्षक तैनात होंगे।

    3. हेली-टूरिज्म को बढ़ावा देने हेलीकॉप्टर सेवा मंजूर।

    राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार में सरकारी मेडिकल कॉलेजों के संचालन का तरीका अब बदलने जा रहा है। राज्य सरकार ने 16 ब्राउनफील्ड मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों (डेंटल कॉलेज सहित) को लोक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर चलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

    बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई।

    सरकार का मानना है कि निजी क्षेत्र की भागीदारी से मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई, प्रबंधन और इलाज की गुणवत्ता सुधरेगी।

    इससे आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार होगा और मरीजों के साथ मेडिकल छात्रों को भी बेहतर व्यवस्था मिलेगी। मंत्रिमंडल की बैठक में कुल 17 प्रस्ताव स्वीकृत किए गए।

    प्राइस वाटर हाउस कूपर्स को बनाया गया परामर्शी

    मंत्रिमंडल की बैठक के बाद कैबिनेट के अपर मुख्य सचिव अरविंद चौधरी ने बताया कि इस कार्य को सुचारू तरीके से आगे बढ़ाने के लिए प्राइस वाटर हाउस कूपर्स प्राइवेट लिमिटेड (पीडब्ल्यूसी) को परामर्शी बनाया गया है।

    इसके लिए कंपनी को 8.27 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जाएगा। कंपनी का चयन निविदा के माध्यम से ट्रांजेक्शन एडवाइजर के रूप में किया गया है।

    पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेजों के संचालन की पूरी प्रक्रिया में पीडब्ल्यूसी सरकार को आवश्यक परामर्श और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराएगी।

    इसके माध्यम से संस्थानों के संचालन, प्रबंधन और निजी भागीदारी से जुड़ी प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। सरकार का उद्देश्य इस पूरी व्यवस्था को पारदर्शी और प्रभावी बनाना है।

    इन 16 मेडिकल कॉलेजों को PPP मॉडल में किया गया शामिल

    बिहार में पहले से संचालित पावापुरी, मधेपुरा, पूर्णिया और नालंदा जिले के रहुई डेंटल कॉलेज को भी इस मॉडल में शामिल किया गया है।

    इसके अलावा निर्माणाधीन समस्तीपुर, सीतामढ़ी, मधुबनी, वैशाली, भोजपुर, बक्सर, सिवान, बेगूसराय, जमुई, मुंगेर और सुपौल मेडिकल कॉलेज-अस्पतालों का संचालन भी PPP मॉडल पर किया जाएगा।

    इस तरह राज्य के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद और निर्माणाधीन कुल 16 मेडिकल कॉलेज-अस्पताल इस योजना के दायरे में आएंगे।

    सरकार का मानना है कि इन संस्थानों के संचालन में निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता का उपयोग करने से प्रबंधन व्यवस्था अधिक प्रभावी हो सकेगी। इससे मेडिकल शिक्षा और चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है।

    क्या है ब्राउनफील्ड परियोजना, जानिए एक नजर में

    ब्राउनफील्ड का मतलब ऐसी परियोजनाओं से है, जहां भवन, जमीन या बुनियादी ढांचा पहले से मौजूद हो या उसका निर्माण चल रहा हो।

    यानी नई जमीन पर बिल्कुल नया संस्थान बनाने के बजाय पहले से तैयार या निर्माणाधीन संस्थान को विकसित कर उसे बेहतर तरीके से संचालित किया जाता है।

    इस मॉडल में सरकार अपनी संपत्ति और निगरानी बनाए रखती है, जबकि निजी भागीदार संचालन, प्रबंधन और सेवाओं को बेहतर बनाने में भूमिका निभाता है।

    इससे पहले से उपलब्ध आधारभूत ढांचे का अधिक प्रभावी उपयोग किया जा सकता है और नई सुविधाओं के विकास में भी तेजी लाई जा सकती है।

    अधिक लोगों तक पहुंचेंगी आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं

    सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी। आधुनिक उपकरणों का बेहतर उपयोग होगा और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा मिलेगी।

    मरीजों को बेहतर इलाज और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। आधुनिक प्रबंधन और बेहतर सुविधाओं के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा सकेगा।

    साथ ही सरकारी संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग भी संभव होगा। यह फैसला राज्य में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार और स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने की महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

    सरकार का लक्ष्य है कि कम समय में अधिक लोगों तक बेहतर और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जाएं।

    राजगीर में बनेगा स्पोर्ट्स साइंस सेंटर, 25 करोड़ स्वीकृत

    मंत्रिमंडल ने राजगीर में राज्य का पहला स्पोर्ट्स साइंस सेंटर (उच्च प्रदर्शन खेल प्रशिक्षण एवं इंजरी सेंटर) स्थापित करने का प्रस्ताव भी स्वीकृत किया है।

    इसका उद्देश्य खिलाड़ियों को आधुनिक वैज्ञानिक प्रशिक्षण, खेल चिकित्सा, पुनर्वास, पोषण, मनोवैज्ञानिक सहायता और प्रदर्शन विश्लेषण जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

    बिहार सरकार के खेल विभाग ने इसके स्थापना की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कैबिनेट एसीएस ने बताया कि राज्य में खेल अवसंरचना के विस्तार, खेल अकादमियों, प्रशिक्षण केंद्रों और खेल परिसरों की स्थापना से खिलाड़ियों की संख्या और उनकी भागीदारी में लगातार वृद्धि हुई है।

    ऐसे में बेहतर प्रदर्शन के लिए आधुनिक खेल विज्ञान आधारित सुविधाओं की आवश्यकता महसूस की गई।

    चोट के उपचार से प्रदर्शन सुधार तक मिलेगी सुविधा

    प्रस्तावित स्पोर्ट्स साइंस सेंटर के शुरू होने से खिलाड़ियों को चोट के उपचार, फिटनेस, प्रदर्शन सुधार और अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी के लिए एक ही स्थान पर समग्र सुविधाएं मिल सकेंगी।

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    खिलाड़ियों को वैज्ञानिक तरीके से प्रशिक्षण देने के साथ उनकी फिटनेस और प्रदर्शन का विश्लेषण भी किया जाएगा।

    परियोजना के लिए 25 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। गौरतलब है कि मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग की 9 जनवरी 2024 की अधिसूचना के तहत बिहार में अलग खेल विभाग का गठन किया गया था।

    अलग खेल विभाग बनने के बाद राज्य में खेलों के विकास और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए कई स्तरों पर काम किया जा रहा है।

    बिहार में हेली-टूरिज्म को बढ़ावा, हेलीकाप्टर सेवा की मंजूरी

    मंत्रिमंडल ने हेली-टूरिज्म एवं एयर टूरिज्म सेवा योजना, 2026 के लिए हेलीकाप्टर की सेवा लेने की मंजूरी दे दी है।

    इसके लिए हर महीने 60 लाख रुपये और जीएसटी के भुगतान का फैसला किया गया है। योजना की तय अवधि के दौरान इस पर अधिकतम 3.30 करोड़ रुपये और जीएसटी खर्च किए जाएंगे।

    योजना 15 जुलाई 2026 से 15 जनवरी 2027 तक पहले चरण में चलाई जा रही है। इसके तहत हर शनिवार और रविवार को पर्यटकों को हेलीकाप्टर से वाल्मीकिनगर, कैमूर स्थित मां मुंडेश्वरी मंदिर और राजगीर की सैर कराई जा रही है।

    इसके अलावा पटना शहर की स्काईलाइन देखने के लिए हेलीकाप्टर जॉय राइड की भी सुविधा दी जा रही है।

    वाल्मीकिनगर, मुंडेश्वरी और राजगीर की हवाई सैर

    सरकार का कहना है कि हेलीकाप्टर सेवा मिलने से योजना का संचालन आसान होगा और सभी तय हवाई पर्यटन कार्यक्रम समय पर चल सकेंगे।

    हेली-टूरिज्म के माध्यम से राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों को हवाई मार्ग से जोड़ने और पर्यटकों को अलग तरह का अनुभव उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

    इस योजना के जरिए बिहार के प्रमुख धार्मिक, प्राकृतिक और पर्यटन स्थलों को नए तरीके से देखने का अवसर मिलेगा।

    सरकार का उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ राज्य में एयर टूरिज्म की संभावनाओं को भी विकसित करना है।