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    बिहार में अब 75+ बुजुर्गों की घर बैठे होगी जमीन की रजिस्ट्री, पेपरलेस कैबिनेट को भी मिली मंजूरी

    Updated: Wed, 29 Jul 2026 08:54 PM (IST)

    बिहार कैबिनेट ने बैठकों को पूरी तरह डिजिटल और कागज रहित बनाने का फैसला किया है, साथ ही पटना में एनआईए कार्यालय के लिए जमीन को भी मंजूरी दी है। ...और पढ़ें

    बिहार में अब 75+ बुजुर्गों की घर बैठे होगी जमीन की रजिस्ट्री (AI Generated Image)

    बिहार में अब 75+ बुजुर्गों की घर बैठे होगी जमीन की रजिस्ट्री (AI Generated Image)

    HighLights

    1. कैबिनेट बैठकें अब पूरी तरह से डिजिटल और कागज रहित होंगी।

    2. पटना में एनआईए कार्यालय के लिए एक एकड़ भूमि स्वीकृत।

    3. 75+ वरिष्ठ नागरिकों को घर बैठे संपत्ति पंजीकरण सुविधा मिलेगी।

    राज्य ब्यूरो, पटना। प्रदेश की सम्राट चौधरी सरकार ने राज्य मंत्रिमंडल (कैबिनेट) बैठकों को पूरी तरह डिजिटल और कागज रहित बनाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में ई-कैबिनेट प्रणाली लागू करने का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया।

    आज की बैठक में कुल 24 प्रस्ताव स्वीकृत किए गए। मंत्रिमंडल ने बिहार में एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) का कार्यालय खोलने के लिए जमीन देने का प्रस्ताव भी स्वीकृत किया है।

    मानव बल और श्रम की बचत के लिए सरकार ने उठाया कदम

    मंत्रिमंडल की बैठक के बाद कैबिनेट के अपर मुख्य सचिव अरविंद चौधरी ने बताया कि कैबिनेट का एजेंडा, बैठक से जुड़े दस्तावेज और फैसलों की जानकारी अब मंत्रियों को आनलाइन उपलब्ध कराई जाएगी।

    साथ ही, कैबिनेट के निर्णयों के क्रियान्वयन और उसकी प्रगति की जानकारी भी डिजिटल माध्यम से मिलेगी। सरकार ने इस काम को करने का जिम्मा राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र को दिया है।

    सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से कागज का उपयोग कम होगा, समय और खर्च की बचत होगी तथा कैबिनेट का कामकाज अधिक तेज, पारदर्शी और प्रभावी बनेगा।

    पटना में एनआईए कार्यालय के लिए 57.37 करोड़ में एक एकड़ भूमि

    मंत्रिमंडल ने पटना जिले के पाटलिपुत्र अंचल स्थित ढकनपुरा मौजा में भवन निर्माण विभाग की एक एकड़ भूमि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) के कार्यालय-सह-आवासीय परिसर के निर्माण के लिए गृह मंत्रालय, भारत सरकार को स्थायी रूप से हस्तांतरित करने की स्वीकृति दी है। यह हस्तांतरण 57 करोड़ 37 लाख 50 हजार रुपये के भुगतान पर सशुल्क आधार पर किया जाएगा।

    75 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिकों को घर बैठे होगा जमीन-फ्लैट का निबंधन

    मंत्रिमंडल ने निबंधन प्रक्रिया को और अधिक जनोन्मुख बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। बिहार निबंधन (संशोधन) नियमावली, 2026 लागू होने के बाद 75 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को मोबाइल रजिस्ट्रेशन यूनिट के माध्यम से घर बैठे भूमि, प्लाट और फ्लैट का निबंधन कराने की सुविधा मिलेगी।

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    इससे पहले यह सुविधा 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों के लिए थी, जिसे मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप अब 75 वर्ष कर दिया गया है।

    बिहार में फॉरेंसिक जांच संस्थान अब गृह विभाग के सीधे नियंत्रण में होंगे

    मंत्रिमंडल ने आपराधिक मामलों की वैज्ञानिक जांच को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला, पुलिस प्रयोगशाला (हैंडराइटिंग ब्यूरो), फिंगर प्रिंट ब्यूरो और फोटो ब्यूरो गृह विभाग के प्रत्यक्ष नियंत्रण में कार्य करेंगे।

    इन संस्थानों में विशेषज्ञ विभिन्न आपराधिक मामलों से जुड़े साक्ष्यों की जांच कर अपनी रिपोर्ट न्यायालय और अन्य संबंधित प्राधिकारों को सौंपते हैं।

    गृह मंत्रालय के अनुसार देश के 32 राज्यों में से 23 राज्यों में फारेंसिक जांच से जुड़े कार्यालय पहले से ही गृह विभाग के अधीन हैं। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से वैज्ञानिक साक्ष्यों की जांच अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध होगी, जिससे अपराधों के अनुसंधान को मजबूती मिलेगी।

    लघु जल संसाधन विभाग में हाइड्रोलॉजिस्ट समेत तीन नए संवर्गों की सेवा नियमावली मंजूर

    मंत्रिमंडल ने लघु जल संसाधन विभाग में हाइड्रोलॉजिस्ट, हाइड्रो जियोलॉजिस्ट और जियोफिजिसिस्ट संवर्ग की नियुक्ति एवं सेवा शर्तों के लिए वर्ष 2026 की नई नियमावली को मंजूरी दे दी है। इन पदों पर केवल सीधी भर्ती होगी, प्रोन्नति का प्रविधान नहीं रहेगा।

    संबंधित विषय में स्नातक डिग्री और केंद्र या राज्य सरकार अथवा उसके उपक्रम में कम से कम तीन वर्ष का कार्यानुभव अनिवार्य होगा। इससे विभाग में विशेषज्ञों की नियुक्ति का रास्ता साफ होगा।

    रैयाम और सकरी में फिर चलेगी चीनी मिल

    मंत्रिमंडल ने दरभंगा के रैयाम और मधुबनी के सकरी में बंद पड़ी चीनी मिलों की जमीन पर नई सहकारी चीनी मिलें लगाने का फैसला किया है। यह काम नई दिल्ली की इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) करेगी। सरकार परियोजना की स्वीकृत लागत का 40 प्रतिशत वित्तीय सहयोग भी देगी।

    नई चीनी मिलों के साथ गन्ने से जुड़े अन्य उत्पाद बनाने वाली इकाइयां भी स्थापित की जाएंगी। इससे गन्ना किसानों को अपनी फसल का बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है और उनकी आय बढ़ेगी।

    साथ ही इलाके में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। चीनी काम्पलेक्स राज्य में नए निवेश का रास्ता खोलेगा और उद्योग लगाने के लिए बेहतर माहौल तैयार होगा।

    राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में स्वीकृत अन्य प्रस्ताव

    • प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत वर्ष 2026-27 के लिए 97.48 करोड़ की योजना को मंजूरी।
    • बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर को वेतन और पेंशन मद में 158.62 करोड़।
    • किसानों को कृषि यंत्र, ड्रोन और कस्टम हायरिंग सेंटर के लिए 236.58 करोड़।
    • सभी 38 जिलों में वर्मी कम्पोस्ट और बायोगैस इकाइयों के लिए 30.17 करोड़।
    • पुलिस अधिकारियों की लघु निर्माण मद में वित्तीय शक्तियां बढ़ाने का फैसला।
    • किशनगंज जलापूर्ति परियोजना को 53.71 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति।
    • लखीसराय जलापूर्ति परियोजना के लिए ₹150.96 करोड़ मंजूर।
    • जमुई में क्यूल नदी पर नए आरसीसी पुल निर्माण को 93.82 करोड़।
    • जमुई में सुकनर नदी पर नए पुल निर्माण के लिए 55.96 करोड़।
    • पटना हाई कोर्ट के बहुउद्देशीय भवन की संशोधित लागत 57.33 करोड़ मंजूर।
    • 38 सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों के लिए मशीन और उपकरण खरीद को 60.49 करोड़ की मंजूरी।
    • 46 सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों के लिए भी 60.49 करोड़ के उपकरण खरीद प्रस्ताव को स्वीकृति।
    • अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार मामलों के लिए 19 विशेष न्यायाधीश पद सृजित होंगे।
    • भ्रष्टाचार निवारण मामलों के लिए पटना और मुजफ्फरपुर में तीन नए विशेष न्यायालयों के गठन को मंजूरी।

    19 न्यायमंडलों एक्सक्लूसिव स्पेशल कोर्ट गठन का प्रस्ताव स्वीकृत

    मंत्रिमंडल ने बिहार के 19 न्यायमंडलों बेतिया, मधुबनी, भोजपुर, सिवान, अररिया, सुपौल, खगड़िया, जहानाबाद, बक्सर, जमुई, कैमूर, कटिहार, सीतामढ़ी, मुंगेर, मधेपुरा, बांका, शेखपुरा, औरंगाबाद और लखीसराय में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत लंबित मामलों का जल्द निपटारा करने के लिए अनन्य विशेष न्यायालयों (एक्सक्लूसिव स्पेशल कोर्ट) का गठन का प्रस्ताव स्वीकृत किया है।

    इन न्यायालयों में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश के एक-एक पद यानी कुल 19 पदों के सृजन की स्वीकृति प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा-3 के अंतर्गत पटना में दो और मुजफ्फरपुर में एक अतिरिक्त विशेष न्यायालयों का गठन किया जाएगा। ताकि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों का निपटारा तेजी से किया जा सके।

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