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    Bihar Cabinet: सम्राट कैबिनेट विस्तार से पहले सस्पेंस, MLC कोटे के पूर्व मंत्रियों की वापसी पर संकट; BJP में बढ़ी हलचल

    Updated: Sat, 18 Apr 2026 06:43 PM (GMT+05:30)

    Bihar Cabinet Expansion: बिहार में नई सरकार बनने के बाद सम्राट चौधरी कैबिनेट विस्तार पर हलचल तेज है। बीजेपी में दावेदारों की संख्या बढ़ रही है, जिससे ...और पढ़ें

    सम्राट चौधरी कैबिनेट विस्तार

    सम्राट चौधरी कैबिनेट विस्तार

    HighLights

    1. सम्राट चौधरी कैबिनेट विस्तार पर बीजेपी में तेज हलचल।

    2. MLC कोटे के पूर्व मंत्रियों की वापसी पर संकट।

    3. बीजेपी नए चेहरों को मंत्रिमंडल में मौका देगी।

    राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार में नई सरकार के गठन के बाद हलचल तेज है। सम्राट चौधरी कैबिनेट विस्तार को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। बीजेपी के भीतर दावेदारों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विधायक और विधान पार्षद दोनों अपने-अपने समीकरण साध रहे हैं।

    मंत्रिमंडल में जगह पाने के लिए जोड़-घटाव शुरू है। राजनीतिक गलियारों में सस्पेंस बना हुआ है।

    सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण बन रहे बड़ी चुनौती

    विधायकों के बीच जातिगत समीकरण अहम भूमिका निभा रहे हैं। क्षेत्रीय संतुलन भी पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। हर वर्ग को प्रतिनिधित्व देने का दबाव बढ़ रहा है।

    इसी कारण कई दावेदारों की उम्मीदें अटक सकती हैं। पार्टी को संतुलन साधने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। यह कैबिनेट गठन को जटिल बना रहा है।

    MLC कोटे के पूर्व मंत्रियों पर मंडराया संकट

    विधान परिषद कोटे से आने वाले नेताओं की चिंता बढ़ी है। पूर्व मंत्रियों को दोबारा मौका मिलने पर संशय है। छोटे कार्यकाल को बड़ी बाधा माना जा रहा है।

    पार्टी नए चेहरों को मौका देने के मूड में दिख रही है। ऐसे में पुराने चेहरों की राह मुश्किल हो सकती है। इस मुद्दे पर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है।

    इन पूर्व मंत्रियों की वापसी पर उठे सवाल

    प्रमोद कुमार और जनक राम का कार्यकाल सीमित बचा है। हरि सहनी और संतोष सिंह की स्थिति भी कमजोर मानी जा रही है। इन नेताओं के पास लगभग 11 महीने का ही कार्यकाल बचा है।

    जबकि सरकार का कार्यकाल अभी लंबा है। इस असंतुलन के कारण पार्टी फैसला बदल सकती है। इनकी वापसी पर संशय गहराता जा रहा है।

    दिलीप जायसवाल बन सकते हैं अपवाद

    दिलीप जायसवाल को लेकर स्थिति थोड़ी अलग बताई जा रही है। संभावना है कि उन्हें दोबारा मौका मिल सकता है। पार्टी उन्हें रिपीट करने पर विचार कर सकती है।

    इससे वे अन्य नेताओं से अलग स्थिति में हैं। राजनीतिक विश्लेषक उन्हें अपवाद मान रहे हैं। उनकी दावेदारी अभी मजबूत दिख रही है।

    नए चेहरों को मौका देने की तैयारी में BJP

    बीजेपी नए चेहरों को आगे लाने की रणनीति पर काम कर रही है। लगातार रिपीट के बजाय बदलाव पर जोर दिया जा रहा है। पार्टी संगठन और सरकार में संतुलन चाहती है।

    विधान परिषद में 21 सदस्यों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। कई नए चेहरे मौका पाने की उम्मीद में हैं। अब सबकी नजर अंतिम सूची पर टिकी है।

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