Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    बिहार में रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए सरकार का बड़ा कदम, 650 छात्रों को हर महीने मिलेगी ₹15000 की फेलोशिप 

    Updated: Sun, 02 Aug 2026 08:23 PM (IST)

    बिहार सरकार सभी 17 विश्वविद्यालयों और 4 शोध संस्थानों में मुख्यमंत्री डाक्टरल फेलोशिप योजना लागू कर रही है। इसके तहत हर साल 650 शोधार्थियों को 15,000 ...और पढ़ें

    सांकेतिक तस्वीर

    सांकेतिक तस्वीर

    HighLights

    1. मुख्यमंत्री डाक्टरल फेलोशिप योजना बिहार में लागू होगी।

    2. हर साल 650 शोधार्थियों को 15,000 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे।

    3. योजना से राज्य में शोध और नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा।

    दीनानाथ साहनी, पटना। बिहार के उच्च शिक्षण संस्थानों में नए विषयों पर शोध और नवाचार कार्य करने के इच्छुक शोधार्थयों का सपना साकार होगा। इसके लिए राज्य सरकार पहली बार सभी 17 विश्वविद्यालयों और चार शोध संस्थानों में मुख्यमंत्री डाक्टरल (रिसर्च) फेलोशिप (मुख्यमंत्री शोध अध्येतावृत्ति) स्कीम लागू करने जा रही है।

    इस पर विगत 26 जून को राज्यपाल सैयद अता हसनैन व मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की बैठक में निर्णय लिया गया था। इस फैसले पर तेजी से अमल करते हुए उच्च शिक्षा विभाग जल्द ही यह प्रस्ताव विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में गठित प्राधिकृत समिति को सौपेंगा, जिसकी अनुशंसा के बाद प्रस्ताव पर कैबिनेट से स्वीकृति ली जाएगी। इसी वर्ष फेलोशिप स्कीम लागू होगा और हर साल 650 शोधार्थियों को फेलोशिप दिया जाएगा।

    इस फेलोशिप में शोधार्थियों के लिए 11 करोड़ 70 लाख रुपये की राशि प्रस्तावित है। भविष्य में फेलोशिप स्कीम में आवश्यकतानुसार राशि में और बढ़ोतरी की जाएगी।

    जिन विषयों में शोध को प्रोत्साहन दिया जाएगा उनमें विज्ञान में 200, कृषि व पशु विज्ञान में 30-30, सामाजिक विज्ञान में 225, मानविकी तथा भाषा विज्ञान में 125, वाणिज्य, शिक्षा, विधि और अन्य विषय में 100 शोधार्थियों का चयन होगा।

    महत्वपूर्ण बात यह कि फेलोशिप स्कीम का प्रभावी एवं पारदर्शी क्रियान्वयन हेतु विकास आयुक्त की अध्यक्षता में स्टेरिंग कमेटी (संचालन समिति) गठित की गई है, जो चयनित शोधार्थियों को फेलोशिप प्रदान करने की स्वीकृति देगी।

    राज्य में शोध कार्य और नवाचार को ध्यान में रखते हुए सरकार ने फेलोशिप स्कीम को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तय शोध मानकों के स्तर पर ले जाने का लक्ष्य रखा है, ताकि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में शोध कार्य को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलायी जा सके।

    खबरें और भी

    इसके लिए IIT, NIT, IIM, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनोमिक्स और केंद्र सरकार के उच्च शिक्षण संस्थानों के नामचीन एकेडमिक एक्सपर्टस को शामिल किया जाएगा।

    पीएचडी के लिए हर शोधार्थी को मिलेगा प्रतिमाह 15 हजार रुपये

    चयनित पीएचडी करने वाले हर शोधार्थी को प्रतिमाह 15 हजार रुपये की वित्तीय मदद मिलेगी। यह राशि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में पीएचडी हेतु दी जानवाली राशि (नौ हजार रुपये) से ज्यादा है। शोधार्थी को फेलोशिप की राशि तीन वर्ष तक मिलेगी।

    इसके लिए पहली शर्त है कि सहायक प्राध्यापक पद पर नियुक्ति हेतु शोधार्थी को नेट उत्तीर्ण आवश्यक है और यूजीसी, सीएसआइआर-यूजीसी (वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद-विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) अथवा आइसीएआर के तहत पीएचडी में नामांकन लिया हो।

    इसके अतिरिक्त फेलोशिप स्कीम में दूसरी श्रेणी में वैसे शोधार्थी रखे गए हैं जिन्होंने (सिर्फ पीएचडी के लिए नेट) पास किया हो और पीएचडी में नामांकन लिया हो। ऐसे शोधार्थी को हर माह आठ हजार रुपये की वित्तीय मदद मिलेगी।

    दिव्यांगों, महिलाओं व आरक्षित कोटि के शोधार्थी को उम्रसीमा में पांच वर्ष की छूट

    फेलोशिप में चयन हेतु शोधार्थी की अधिकतम उम्र सीमा 31 वर्ष निर्धारित की गई है। दिव्यांग, महिला व आरक्षित वर्ग के शोधार्थी को उम्रसीमा में पांच वर्ष की छूट मिलेगी। बिहार राज्य उच्च शिक्षा परिषद द्वारा शोधार्थियों का चयन होगा। इसके लिए आनलाइन आवेदन लिये जाएंगे। प्राप्त आवेदनों की शार्टलिस्ट शिक्षाविदों व शोध निदेशकों की कमेटी करेगी।

    रिसर्च प्रोग्रेस मानीटरिंग कमेटी रखेगी शोधार्थियों पर नजर

    शोधार्थियों के शोध कार्य पर सतत निगरानी रखने हेतु रिसर्च प्रोग्रेस मानीटरिंग कमेटी गठित जाएगी। कमेटी में बिहार
    राज्य उच्च शिक्षा परिषद के सचिव को अध्यक्ष, उच्च शिक्षा निदेशक को सदस्य, उप सचिव को संयोजक और
    एकेडमिक एक्सपर्ट सदस्य होंगे।

    इन संस्थानों में होगा लागू

    पटना विश्वविद्यालय, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, चाणक्य नेशनल ला यूनिवर्सिटी, बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, मौलाना मजहरूल हक अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय, मगध विश्वविद्यालय, जय प्रकाश विश्वविद्यालय, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, बीआरए बिहार विश्वविद्यालय, मुंगेर विश्वविद्यालय, पूर्णिया विश्वविद्यालय, तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, बीएन मंडल विश्वविद्यालय, पटना के ललित नारायण इंस्टीच्यूट आफ मैनेजमेंट, एएन सिन्हा सामाजिक अध्ययन संस्थान, डेवलपमेंट मैनेजमेंट इंस्टीच्यूट और चंद्रगुप्त इंस्टीच्यूट आफ मैनेजमेंट।

    स्कीम के लिए संचालन कमेटी में शामिल अधिकारी

    विकास आयुक्त (अध्यक्ष), दो कुलपति, उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव/सचिव, उच्च शिक्षा
    निदेशक, राज्यपाल व कुलाधिपति के मनोनीत प्रतिनिधि, जो संयुक्त सचिव स्तर के होंगेे, बिहार राज्य उच्च शिक्षा परिषद के सचिव एवं उप सचिव (रिसर्च प्रोजेक्ट) और एकेडमिक एक्सपर्ट।

    प्रस्तावित मुख्यमंत्री डाक्टरल फेलोशिप स्कीम मेधावी व शोध में रुचि रखने वाले युवाओं को प्रोत्साहन और बढ़ावा देने के लिए है। इस स्कीम के माध्यम से युवाओं को राज्य शासन, नीति निर्माण और विकास योजनाओं की निगरानी से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है, जिसके तहत युवाओं को शोध कार्य में बेहतर वातावरण के साथ आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसका यह उद्देश्य भी है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में शोध और नवाचार का बेहतर वातावरण का निर्माण हो। साथ ही शोधार्थियों की ऊर्जा और ज्ञान का उपयोग करके सरकारी योजनाओं और सुशासन को बेहतर बनाना भी है। -राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह