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बिहार सीएम सम्राट चौधरी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री से की बात, फरक्का के सभी गेट खोलने की अपील की

Published: Sun, 23 Aug 2026 11:42 PM (IST)

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से फरक्का बराज के सभी गेट खोलने का आग्रह किया।

सीएम सम्राट चौधरी। (फाइल फोटो)

सीएम सम्राट चौधरी। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. बिहार के सीएम ने पश्चिम बंगाल सीएम से दूरभाष पर बात की।

  2. गंगा में बढ़ते जलस्तर से बाढ़ की स्थिति पर चिंता व्यक्त की।

  3. फरक्का बराज के सभी गेट खोलने का अनुरोध किया गया।

राज्य ब्यूरो, पटना। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से दूरभाष पर बातचीत कर बिहार में गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर एवं उत्पन्न बाढ़ की स्थिति को देखते हुए फरक्का बराज के सभी गेट खोलने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में गंगा नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि के कारण कई क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो रही है। ऐसी परिस्थिति में फरक्का बराज के सभी गेट खोलने से गंगा नदी के जलप्रवाह को सुगम बनाने में मदद मिलेगी।

बिहार में बाढ़ की स्थिति को नियंत्रित करने में सहायता मिल सकती है। सम्राट के आग्रह पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री को इस संबंध में त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया।

विदित हो कि बिहार बक्सर से लेकर मनिहारी तक कई जिले में गंगा के जल स्तर में लगातार वृद्धि के कारण बाढ़ की स्थिति बनी हुई। पानी खतरे के निशान ऊपर पहुंचने की सूचना है।

फरक्का पर बिहार के हितों से कोई समझौता नहीं होगा: संजय

वहीं, दूसरी ओर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने फरक्का बराज और भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि को लेकर कहा कि बिहार के जल हित सर्वोपरि हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार अपने अधिकारों से कोई समझौता नहीं करेगा।

फरक्का का मुद्दा केवल पानी के बंटवारे तक सीमित नहीं है। गाद, बाढ़, सिंचाई, पेयजल, कृषि, औद्योगिक विकास और बिहार की भविष्य की जल जरूरतें भी इससे जुड़ी हैं। इसलिए संधि के नवीनीकरण के समय बिहार की वर्तमान और भविष्य की जरूरतों को पूरी मजबूती से सामने रखना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार की चिंताओं को केंद्र सरकार के समक्ष स्पष्ट रूप से रखा है। यह बिहार के हित में हो रही गंभीर और तथ्य आधारित पहल है, न कि विपक्ष की तरह केवल बयानबाजी।

विपक्ष को फरक्का पर राजनीति करने से पहले 1996 की गंगा जल संधि, उससे जुड़े सरकारी दस्तावेजों और बिहार के जल संसाधनों से संबंधित तथ्यों का अध्ययन करना चाहिए।

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