बिहार में साइबर ठगी के शिकार लोगों के लिए बड़ी राहत; होल्ड रकम वापस लेने और खाता अनफ्रीज कराने का रास्ता हुआ आसान
बिहार में साइबर ठगी के शिकार लोगों के लिए मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल (एमआरएम) और ग्रिवांस रिड्रेसल मैकेनिज्म (जीआरएम) प्रणाली लागू की गई है। इससे ठगी की ग ...और पढ़ें

14 अंकों की शिकायत संख्या से मिलेगा रिफंड
HighLights
साइबर ठगी की राशि वापसी के लिए एमआरएम लागू।
गलती से फ्रीज खाते अनफ्रीज करने को जीआरएम।
बिहार में नई प्रणाली से पीड़ितों को मिलेगी राहत।
राज्य ब्यूरो, पटना। साइबर अपराध के शिकार लोगों के लिए राहत की खबर है। साइबर ठगी के बाद बैंक खाते में होल्ड की गई राशि वापस पाना और गलती से फ्रीज किए गए बैंक खाते को दोबारा चालू कराना अब आसान होगा। इसके लिए नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल (एमआरएम) और ग्रिवांस रिड्रेसल मैकेनिज्म (जीआरएम) प्रणाली लागू की गई है।
साइबर अपराध एवं अनुसंधान इकाई (सीसीएसयू) के डीआइजी अवकाश कुमार ने शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दोनों प्रणालियों को बिहार में लागू कर दिया गया है।
14 अंकों की शिकायत संख्या से मिलेगा रिफंड
साइबर ठगी की राशि यदि बैंक खाते में होल्ड की गई है तो पीड़ित एमआरएम के माध्यम से राशि वापसी के लिए आवेदन कर सकता है। इसके लिए एनसीआरपी पर दर्ज शिकायत की 14 अंकों की संख्या की जरूरत होगी।
आवेदन के दौरान ओटीपी से सत्यापन करना होगा। इसके बाद रिफंड रिक्वेस्ट का विकल्प चुनकर आवश्यक जानकारी भरनी होगी। पैन कार्ड की डिजिटल प्रति, बैंक का नाम, खाता संख्या और आइएफएससी कोड भी देना होगा।
कोर्ट का आदेश या दस्तावेज हो तो कर सकते हैं अपलोड
रिफंड आवेदन के साथ यदि न्यायालय का आदेश या अन्य संबंधित दस्तावेज उपलब्ध हैं तो उन्हें भी अपलोड किया जा सकता है। आवेदन और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद होल्ड राशि वापस करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य साइबर ठगी के मामलों में जब्त या होल्ड की गई रकम को पीड़ितों तक पहुंचाने की प्रक्रिया को आसान और व्यवस्थित बनाना है।
गलती से फ्रीज हुआ खाता भी हो सकेगा अनफ्रीज
यदि किसी व्यक्ति के बैंक खाते में अनजाने में साइबर ठगी से जुड़ी राशि आ गई और इस वजह से उसका खाता फ्रीज हो गया है, तो जीआरएम के माध्यम से शिकायत की जा सकती है। इसके लिए संबंधित बैंक शाखा में लिखित आवेदन देना होगा।
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आवेदक को केवाइसी और आवश्यक दस्तावेज के साथ संबंधित लेन-देन की तारीख, राशि और अन्य विवरण उपलब्ध कराना होगा। बैंक दस्तावेज और लेन-देन की जांच के बाद संबंधित पुलिस को रिपोर्ट भेजेगी।
जांच के बाद 15-20 दिनों में हट सकती है रोक
पुलिस का जांच पदाधिकारी मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई करेगा। जरूरत पड़ने पर आवेदक से अतिरिक्त दस्तावेज या जानकारी मांगी जा सकती है। जांच के आधार पर खाते को अनफ्रीज करने का निर्णय लिया जाएगा और आवेदक को इसकी जानकारी दी जाएगी।
अधिकारियों के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया में करीब 15 से 20 दिन लग सकते हैं। यानी साइबर ठगी से जुड़ी जांच पूरी होने के बाद पात्र खाताधारक को खाते से रोक हटने का रास्ता मिलेगा।
जुलाई तक 104.05 करोड़ रुपये हुए होल्ड
डीआइजी अवकाश कुमार ने बताया कि साइबर ठगी की शिकायत दर्ज करने के लिए फोन लाइन की संख्या बढ़ाकर 50 कर दी गई है। इसे 75 तक बढ़ाने की योजना है। अधिक सुविधाओं के कारण शिकायतों की संख्या भी बढ़ी है।
वर्ष 2025 में 1.17 लाख शिकायतें दर्ज हुई थीं, जबकि 2026 में जुलाई तक ही 1.15 लाख शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं। पिछले वर्ष 116 करोड़ रुपये की ठगी की राशि होल्ड की गई थी, जबकि इस वर्ष जुलाई तक 104.05 करोड़ रुपये होल्ड कराए जा चुके हैं।
जून तक 10 करोड़ रुपये पीड़ितों को लौटाए
पिछले वर्ष कुल 15.62 करोड़ रुपये पीड़ितों को रिफंड किए गए थे। वहीं 2026 में जून तक करीब 10 करोड़ रुपये की राशि पीड़ितों को वापस की जा चुकी है।
अधिकारियों के अनुसार, एमआरएम और जीआरएम की व्यवस्था से साइबर अपराध से जुड़े मामलों में पीड़ितों की रकम वापस पाने और फ्रीज खातों से संबंधित शिकायतों के निस्तारण में तेजी आने की उम्मीद है।