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    रक्सौल-हल्दिया से पटना-पूर्णिया तक... बिहार में नए एक्सप्रेस-वे प्रोजेक्ट्स की सुस्त चाल, जमीन ने लगाया ब्रेक

    Updated: Thu, 16 Jul 2026 06:42 PM (GMT+05:30)

    बिहार में नए एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया धीमी है, जिससे निर्माण कार्य में देरी हो रही है। रक्सौल-हल्दिया, पटना-पूर्णिया ...और पढ़ें

    बिहार में नए एक्सप्रेस-वे निर्माण में देरी, जमीन अधिग्रहण बनी बड़ी बाधा (AI Generated Image)

    बिहार में नए एक्सप्रेस-वे निर्माण में देरी, जमीन अधिग्रहण बनी बड़ी बाधा (AI Generated Image)

    HighLights

    1. बिहार में नए एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं का भूमि अधिग्रहण धीमा।

    2. रक्सौल-हल्दिया, पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे में देरी।

    3. गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे में कुछ प्रगति, बाकी अटके।

    राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार में नए एक्सप्रेस-वे निर्माण की कहानी शुरू हुए काफी समय बीत गया है, मगर अद्यतन स्थिति यह है कि इनके लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी अभी ठीक से आरंभ नहीं हो पाई है। कुछ मामलों में प्रक्रिया शुरू होने को है तो कुछ मामले में अभी डीपीआर तक फाइनल नहीं हो पाया है।

    बिहार में रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस-वे का बड़ा हिस्सा गुजरेगा। बिहार के साथ-साथ नेपाल को भी इस एक्सप्रेस-वे से सुगम संपर्कता मिलेगी। पश्चिम बंगाल के हल्दिया पोर्ट तक जाने वाली इस सड़क को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इस प्रोजेक्ट के लिए बिहार में तीन हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण की जरूरत है। अभी तक जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया विधिवत आरंभ नहीं हो पाई है।

    गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे के लिए बिहार में 4216 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होना है। इस प्रोजेक्ट को लेकर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अपेक्षाकृत ठीक है। इस बारे में मिली जानकारी के अनुसार, 2207.71 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण हो गया है पर अभी कुछ मामलों में मंजूरी बाकी है।

    पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे को एक्सेस कंट्रोल एक्सप्रेस-वे के रूप में विकसित किया जाना है, पर इस प्रोजेक्ट का मामला अभी डीपीआर के चरण में ही है। डीपीआर की मंजूरी के बाद ही यह तय होगा कि इस प्रोजेक्ट के लिए कितने एकड़ में जमीन अधिग्रहण की जरुरत होगी।

    आमस-दरभंगा सड़क भी एक्सप्रेस-वे की तरह ही बननी है। इस प्रोजेक्ट का निर्माण कई पैकेज में किया जा रहा है। जमीन अधिग्रहण के लिए राशि उपलब्ध है। कई जगहों पर बंटी भी है, पर कुछ मामलों में कहीं 575 मीटर तो कहीं 690 मीटर जमीन उपलब्ध नहीं हो पा रही।

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    एनएचएआई की देखरेख में बनने वाले इन एक्सप्रेस-वे के अतिरिक्त राज्य सरकार के स्तर पर भी दो-तीन नए कॉरिडोर एक्सप्रेस-वे के रूप में ही विकसित किए जाने हैं, मगर अभी इन परियोजनाओं के लिए यह तय ही नहीं हो पाया है कि इनके लिए कितने एकड़ में जमीन का अधिग्रहण होगा।