बालूघाट तैयार, खनन बंद; टीओआर अटकने से बिहार को 153 करोड़ के राजस्व का नुकसान
बिहार के 10 जिलों में 22 बालूघाटों को समय पर पर्यावरणीय स्वीकृति न मिलने से खान एवं भू-तत्व विभाग को करीब 153 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हुआ है। ...और पढ़ें

टीओआर लंबित, इसलिए शुरू नहीं हो सका खनन
HighLights
10 जिलों के 22 बालूघाटों पर खनन रुका।
पर्यावरणीय स्वीकृति न मिलने से 153 करोड़ का नुकसान।
मंत्री ने लंबित टीओआर पर कार्रवाई के निर्देश दिए।
राज्य ब्यूरो, पटना। प्रदेश के 10 जिलों के 22 बालूघाटों को समय पर पर्यावरणीय स्वीकृति नहीं मिलने से खान एवं भू-तत्व विभाग को करीब 153 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। विभागीय समीक्षा बैठक में यह मामला सामने आने के बाद अधिकारियों को इस पर प्राथमिकता से कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
टीओआर लंबित, इसलिए शुरू नहीं हो सका खनन
खान एवं भू-तत्व विभाग के सूत्रों के अनुसार, विभागीय मंत्री डा. प्रमोद कुमार के स्तर पर आयोजित समीक्षा बैठक में राजस्व संग्रहण के साथ विभाग के अन्य कार्यों और योजनाओं की समीक्षा की गई।
इसी दौरान सामने आया कि 10 जिलों के 22 बालूघाटों का टीओआर (टर्म आफ रेफरेंस) लंबे समय से लंबित है।
टीओआर नहीं मिलने के कारण इन घाटों को खनन शुरू करने से पहले मिलने वाली पर्यावरणीय स्वीकृति नहीं मिल सकी।
इसके चलते संबंधित बालूघाटों का संचालन शुरू नहीं हो पाया और सरकार को 153.40 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।
पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए टीओआर पहला जरूरी चरण
मंत्री ने समीक्षा बैठक में कहा कि अधिकारियों को मालूम है कि टीओआर पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करने का पहला और जरूरी चरण है।
इसमें यह तय किया जाता है कि संबंधित बालूघाट से पर्यावरण पर किस प्रकार का असर पड़ सकता है और किन बिंदुओं पर जांच की जानी है।
इसके बाद रिपोर्ट तैयार की जाती है और उसी के आधार पर पर्यावरणीय स्वीकृति दी जाती है। ऐसे महत्वपूर्ण कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
अधिकारियों को प्राथमिकता से कार्रवाई का निर्देश
मंत्री ने लंबित टीओआर और पर्यावरणीय स्वीकृति के मामलों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने के निर्देश दिए।
साथ ही संबंधित अधिकारियों को इसकी प्रगति की रिपोर्ट राज्य मुख्यालय को भेजने को कहा गया है।
विभागीय स्तर पर अब इन मामलों की प्रक्रिया में तेजी लाने की कवायद शुरू की गई है, ताकि बालूघाटों का संचालन शुरू हो सके और राजस्व की संभावित क्षति को रोका जा सके।
जिलों के बालूघाटों का टीओआर लंबित है :
- पटना — 7 घाट
- अरवल — 2 घाट
- औरंगाबाद — 1 घाट
- नालंदा — 1 घाट
- बांका — 4 घाट
- लखीसराय — 1 घाट
- भागलपुर — 1 घाट
- पूर्वी चंपारण — 1 घाट
- वैशाली — 2 घाट
- सुपौल — 2 घाट