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फरक्का पर बिहार की बड़ी जीत, 30 साल के इतिहास में पहली बार 24 घंटे के अंदर खुला बराज

Published: Mon, 24 Aug 2026 10:00 PM (IST)

बिहार के अनुरोध पर बंगाल सरकार ने 24 घंटे के भीतर फरक्का बराज के गेट खोल दिए, जिससे गंगा के ...और पढ़ें

फरक्का बराज पर बिहार को मिली बड़ी सफलता गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच बंगाल ने खोले गेट

फरक्का बराज पर बिहार को मिली बड़ी सफलता गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच बंगाल ने खोले गेट

HighLights

  1. बिहार के अनुरोध पर 24 घंटे में खुले फरक्का बराज गेट।

  2. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पहल से बिहार को मिली बड़ी राहत।

  3. गंगा जल संधि नवीनीकरण के बीच यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण।

राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार की राजनीति में फरक्का बराज विभिन्न कारणों से पिछले डेढ़ दशक से समय-समय पर सुर्खियों में रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी विषय की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार के साथ बैठक कर चुके हैं। सोमवार को पहला ऐसा अवसर आया जब 24 घंटे के अंदर बिहार के अनुरोध पर बंगाल सरकार ने फरक्का बराज का गेट खोल दिया है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आग्रह पर बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शीघ्र पहल की। अब बिहार के बाढ़ प्रभावित कई जिलों की शीघ्र राहत मिलने की उम्मीद जगी है। गंगा के बढ़ते जलस्तर और बिहार में मंडराते बाढ़ के खतरे के बीच फरक्का बराज को लेकर राज्य सरकार की पहल को बड़ी सफलता मिली है।

इससे गंगा के पानी का बहाव तेज होने और बिहार में बढ़ रहे जलस्तर के दबाव में कमी आने की उम्मीद है। पहल से राजनीतिक नूरा-कुश्ती करने वालों को करारा झटका लगा है। बिहार के लिए इस घटनाक्रम को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि फरक्का बराज लंबे समय से गंगा के प्रवाह और बिहार में बाढ़ की स्थिति को लेकर विवाद के केंद्र में रहा है।

खासकर मानसून के दौरान बिहार का तर्क रहा है कि गंगा के प्रवाह को निर्बाध रखने से राज्य में बाढ़ के दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है। यही वजह है कि बिहार में फरक्का को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है।

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जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा समेत कई नेताओं ने केंद्र से मांग की है कि 30 वर्ष पूरे होने के बाद संधि को आगे बढ़ाने से पहले बिहार के हितों का व्यापक मूल्यांकन किया जाए। विपक्ष की ओर से भी इस मुद्दे को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

बिहार सरकार के लिए मौजूदा घटनाक्रम की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि बाढ़ की गंभीर स्थिति में उसने फरक्का को लेकर अपनी मांग सीधे पड़ोसी राज्य के मुख्यमंत्री के सामने रखी और केंद्र-बंगाल-बिहार के बीच समन्वय का रास्ता बनाया।

बिहार के लिए सिर्फ गेट खुलना नहीं, नीति में बदलाव का संकेत

फरक्का बराज का निर्माण 1975 में मुख्य रूप से कोलकाता बंदरगाह और भागीरथी-हुगली जलमार्ग में नौवहन गहराई बनाए रखने के उद्देश्य से किया गया था।

समय के साथ यह परियोजना बिहार, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के बीच जल प्रबंधन का महत्वपूर्ण केंद्र बन गई। केंद्र सरकार भी बराज के आधुनिकीकरण और रखरखाव पर लगातार काम कर रही है।

गंगा का दबाव कम करने की कोशिश

फरक्का से पानी के निकासी का सीधा असर गंगा के डाउनस्ट्रीम प्रवाह पर पड़ता है। बिहार में इस समय बक्सर से भागलपुर और आगे के इलाकों में गंगा के जलस्तर में वृद्धि ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी है।

भागलपुर के राघोपुर में तटबंध टूटने से भी स्थिति गंभीर हुई है। ऐसे में फरक्का से पानी की निकासी बढ़ना बिहार के लिए राहत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

30 साल पुरानी फरक्का संधि भी चर्चा में

फरक्का का मुद्दा इस समय इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत और बांग्लादेश के बीच 12 दिसंबर 1996 को हुई गंगा जल संधि की 30 वर्ष की अवधि दिसंबर 2026 में पूरी हो रही है। संधि के तहत फरक्का में गंगा जल का बंटवारा लीन सीजन यानी पहली जनवरी से 31 मई के दौरान किया जाता है।

फरक्का बराज संधि क्या है?

भारत एवं बांग्लादेश ने 12 दिसंबर 1996 को नई दिल्ली में 30 साल के लिए यह संधि की थी। इसका मुख्य उद्देश्य फरक्का बराज के पास गंगा के पानी का दोनों देशों के बीच बंटवारा तय करना था।

भारत ने फरक्का बराज बंगाल में गंगा नदी पर बनाया है। इसका उद्देश्य मुख्य रूप से हुगली नदी में पर्याप्त पानी पहुंचाकर कोलकाता बंदरगाह में गाद (सिल्ट) कम करना था।

बांग्लादेश की चिंता थी कि फरक्का से पानी मोड़े जाने के कारण उसके हिस्से में, खासकर शुष्क मौसम में, गंगा का प्रवाह कम हो सकता है। 1996 की संधि में जनवरी से मई तक फरक्का पर उपलब्ध पानी के बंटवारे का फार्मूला तय किया गया।

पानी की उपलब्धता के अनुसार भारत और बांग्लादेश के हिस्से तय होते हैं। दोनों देशों के बीच आंकड़े साझा करने एवं निगरानी की व्यवस्था भी है। संधि की अवधि 30 वर्ष है, इसलिए यह 2026 के दिसंबर में समाप्त होने वाली है।

बिहार के लिए यह संधि इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि फरक्का बराज का असर सिर्फ भारत-बांग्लादेश संबंधों तक सीमित नहीं है। बिहार में गंगा के जलस्तर, कटाव, बाढ़ और नदी के प्रवाह को लेकर फरक्का का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है।

बिहार में फरक्का बराज की वजह से गंगा के साथ सहायक नदियां भी उथली होती जा रही है। गाद भरने की वजह से लीन पीरियड में सिंचाई एवं औद्योगिक जरूरत के लिए भी पानी की कमी से परेशानी होती है।

फरक्का बराज की उपयोगिता

बंगाल में मुर्शिदाबाद जिलान्तर्गत फरक्का में गंगा पर 1975 में फरक्का बांध का निर्माण हुआ था। इसका मुख्य उद्देश्य हुगली नदी में पानी का एक हिस्सा मोड़ना था, ताकि कोलकाता बंदरगाह की नौ-वहन क्षमता बनी रहे।

इसके अलावा, सिंचाई आदि जैसे अन्य उद्देश्यों के लिए भी यह उपयोगी रहा है। बाद में, 1996 की संधि के अंतर्गत भारत और बांग्लादेश के बीच जल बंटवारे के नियमन में भी इस बांध का उपयोग होने लगा।

बिहार का नुकसान दोतरफा

गंगा जल बंटवारा संधि अंतरराष्ट्रीय है, लेकिन इससे सर्वाधिक प्रभावित बिहार ही है। शुष्क मौसम में पानी की कमी और वर्षा ऋतु में बाढ़। इसका मूल कारण बराज के कारण गंगा में गाद का जमा होते जाना है।

इसी कारण बिहार को समझौते के कुछ पहलुओं पर आपत्ति भी रही है, क्योंकि पुराने समझौते में उसे सम्मिलित नहीं किया गया था। नए समझौते में बिहार के हितों का ध्यान रखा जा रहा है। हालांकि, अंतिम समझौता होने पर ही हिस्सेदारी पक्की होगी।

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महत्वपूर्ण पहलू:

  • 12 दिसंबर, 1996 को भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारे के लिए 30 वर्षाें की संधि हुई थी। उसके नवीनीकरण के लिए पहल शुरू हो चुकी है।
  • बांग्लादेश में गंगा को पद्मा कहते हैं। जल बंटवारे के फॉर्मूला के लिए गंगा पर फरक्का बराज और पद्या पर हार्डिंग ब्रिज पर पानी के स्तर की संयुक्त माप होती है।

पानी में बंटवारा: यह संधि फरक्का बराज से गंगा जल के बंटवारे से जुड़ी है, जहां भारत और बांग्लादेश के बीच वर्तमान फार्मूला लागू होता है, लेकिन इसमें बिहार या बंगाल के लिए अलग से आंतरिक आवंटन नहीं है।

वर्तमान फॉर्मूला:

  • 50000 क्यूसेक या उससे कम पर भारत और बांग्लादेश को 50-50 प्रतिशत
  • 70000 से 75000 क्यूसेक पर बांग्लादेश को 35000 क्यूसेक, शेष भारत को
  • 75000 क्यूसेक से अधिक पर 40000 क्यूसेक भारत को, शेष बांग्लादेश को

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