सावधान! बिहार में बिजली चोरी पर AI की नजर... स्मार्ट मीटर बने ‘डिजिटल चौकीदार’
बिहार में एआई-सक्षम स्मार्ट प्रीपेड मीटर बिजली चोरी रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। एक पायलट अध्ययन में इन ...और पढ़ें

स्मार्ट मीटर बने ‘डिजिटल चौकीदार’
HighLights
एआई-सक्षम स्मार्ट मीटर बिहार में बिजली चोरी रोकने में प्रभावी।
पायलट अध्ययन ने बड़े पैमाने पर बिजली अनियमितताओं का खुलासा किया।
एटीएंडसी लॉस घटा, अब पूरे बिहार में तकनीक का विस्तार।
डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार में बिजली चोरी रोकने की दिशा में तकनीक ने बड़ा रोल निभाना शुरू कर दिया है। राज्य में लगाए गए एआई-सक्षम स्मार्ट प्रीपेड मीटर अब सिर्फ बिल बनाने का काम नहीं कर रहे, बल्कि बिजली व्यवस्था में अनुशासन लाने का जरिया भी बनते जा रहे हैं। हालिया पायलट अध्ययन में इन मीटरों की मदद से बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है।
पायलट स्टडी ने खोली आंखें, चोरी और गड़बड़ी उजागर
बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड (बीएसपीएचसीएल) द्वारा कराए गए अध्ययन में करीब एक लाख उपभोक्ताओं के स्मार्ट मीटर डेटा का विश्लेषण किया गया। इसमें शहरी क्षेत्रों के घरेलू और व्यावसायिक कनेक्शन शामिल थे। अध्ययन के दौरान मीटर बाइपास, टैरिफ दुरुपयोग और रात में चोरी जैसे मामलों की पहचान हुई।
AI अलर्ट से बढ़ी जांच की सटीकता
एआई सिस्टम ने हजारों संदिग्ध मामलों को “हाई-प्रोबेबिलिटी अलर्ट” के रूप में चिह्नित किया। जब इन मामलों की फील्ड जांच कराई गई, तो बड़ी संख्या में गड़बड़ियां सही पाई गईं। इससे यह साफ हुआ कि अब जांच केवल अनुमान या शिकायत पर नहीं, बल्कि डेटा और पैटर्न एनालिसिस के आधार पर हो रही है।
अतिरिक्त राजस्व नहीं, सिस्टम सुधार असली मकसद
पायलट प्रोजेक्ट के दौरान करीब 1.46 करोड़ रुपये की अतिरिक्त बिलिंग सामने आई, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि इसका उद्देश्य केवल राजस्व बढ़ाना नहीं है। असली लक्ष्य बिजली आपूर्ति प्रणाली को पारदर्शी बनाना, नुकसान कम करना और ईमानदार उपभोक्ताओं पर बोझ घटाना है।
कम हुई एटीएंडसी हानि, बढ़ी वसूली क्षमता
राज्य में स्मार्ट मीटरिंग और तकनीकी निगरानी के कारण एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल (AT&C) लॉस में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, बिजली बिल संग्रहण की दक्षता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इससे बिजली कंपनियों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने लगी है।
फील्ड स्टाफ पर निर्भरता घटी, डेटा बना आधार
पहले बिजली चोरी पकड़ने के लिए जांच दलों को पूरी तरह फील्ड स्टाफ और स्थानीय सूचना पर निर्भर रहना पड़ता था। अब एआई-आधारित विश्लेषण संदिग्ध कनेक्शन पहले ही चिन्हित कर देता है। इससे मानव हस्तक्षेप कम हुआ है और मनमानी की गुंजाइश भी घट रही है।
पूरे बिहार में होगा विस्तार, तैयारी तेज
बीएसपीएचसीएल के अनुसार पायलट के नतीजों से उत्साहित होकर अब इस तकनीक को पूरे राज्य में लागू करने की योजना है। स्मार्ट प्रीपेड मीटरों के डेटा एनालिसिस से न केवल चोरी रुकेगी, बल्कि बिजली वितरण अधिक संतुलित और विश्वसनीय हो सकेगा।
ईमानदार उपभोक्ताओं के लिए राहत की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि जब चोरी और अनियमितताओं पर लगाम लगेगी, तो इसका सीधा फायदा ईमानदार उपभोक्ताओं को मिलेगा। बेहतर राजस्व, कम नुकसान और सुधरी व्यवस्था का असर अंततः स्थिर आपूर्ति और निष्पक्ष बिलिंग के रूप में दिखेगा।
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