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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 11, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    अजब-गजब : पटनिया हसबैंड होते हैं बड़े जालिम, भोजपुरिया हसबैंड स्वीट

    By Kajal KumariEdited By:
    Updated: Wed, 11 Jan 2017 10:41 PM (IST)

    बिहार में पहली बार क्राइम इन बिहार रिपोर्ट तैयार की गई है जिसके अनुसार पटना में शादीशुदा महिलाओं के उत्पीड़न के मामले सबसे अधिक हैं तो वहीं भोजपुर में ...और पढ़ें

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    पटना [जेएनएन]। पत्नी को प्रताड़ित करने के मामले में पटना के पति सबसे जालिम हैं, लेकिन भोजपुरिया हसबैंड बड़े दिलवाले हैं। बिहार में पहली बार क्राइम इन बिहार नाम से रिपोर्ट तैयार की गई है। बिहार पुलिस की स्टेट क्राइम रिपोर्ट ब्यूरो के मुताबिग पटना के पति बहुत बुरे हैं तो वहीं भोजपुर के पति बड़े माई डियर।

    पत्नियों को प्रताड़ित करने के मामले में पटना में अपराध का दर सबसे ऊपर है। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो की तर्ज पर स्टेट क्राइम रिकार्ड ब्यूरो की यह पहली रिपोर्ट है। जल्द ही इसे जारी किया जाएगा।

    राजधानी में हस्बैंड पत्नी के लिए सबसे बुरे

    इस रिपोर्ट में वैसे तो अपराध से जुड़े हर पहलू को दिखाया गया है, लेकिन महिलाओं के खिलाफ उत्पीड़न के मामले में दिलचस्प आंकड़े हैं। स्टेट क्राइम रिकार्ड ब्यूरो की यह रिपोर्ट बताती है कि राजधानी में शादीशुदा महिलाओं पर अत्याचार की स्थिति क्या है।

    भोजपुर के पति लवेबल

    वहीं इसके उलट भोजपुर के पतियों का जवाब नहीं। पतियों व रिश्तेदारों द्वारा महिलाओं के खिलाफ अत्याचार से जुड़े अपराध में भोजपुर का आंकड़ा शून्य है।

    इन जिलों में क्रूरता के सबसे कम मामले

    भोजपुर, सीवान और प. चंपारण में ऐसी क्रूरता सबसे कम है। भोजपुर में यह प्रतिशत शून्य है जबकि सीवान में 2.3 और पश्चिम चंपारण में 2.8 फीसदी है।

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    34 मानकों पर तैयार हुई 302 पेज की रिपोर्ट

    - एससीआरबी की एडीजी प्रीता वर्मा ने रिपोर्ट में लिखा है कि इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए 34 तरह के फार्मेट में सभी जिलों से आकड़े एकत्र किए गए हैं।

    - यह रिपोर्ट नीति निर्धारकों, प्रशासकों, अपराध का मूल्यांकन करने वालों, अपराध विशेषज्ञों, विभिन्न सरकारी विभागों, मीडिया व एनजीओ के लिए लाभदायक होगी।

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    - बता दें कि साल 2015 में ऐसी क्रूरता के मामले में बिहार में 3792 मामले दर्ज किए गए थे। यह आंकड़ा वर्ष 2014 की तुलना में 18.83 % कम है।

    - 2015 में इस तरह के अपराध के सबसे अधिक 474 मामले पटना में दर्ज किए गए।