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बिहार में बाढ़ का कहर:14 जिलों की 44 लाख आबादी प्रभावित, पटना के उद्योग जगत को 1 अरब का नुकसान

Published: Fri, 11 Sep 2026 12:31 AM (IST)

बिहार में 14 जिलों की 44 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित है, जहां गुरुवार को सात लोगों की डूबने से मौत हो गई।

दीघा स्थित गंगापथ किनारे बना एसटीपी बाढ़ के पानी में डूबा। (जागरण)

दीघा स्थित गंगापथ किनारे बना एसटीपी बाढ़ के पानी में डूबा। (जागरण)

HighLights

  1. बिहार के 14 जिलों में 44 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित।

  2. बाढ़ में डूबने से गुरुवार को सात लोगों की मौत हुई।

  3. पटना के उद्योगों को एक अरब रुपये से अधिक का नुकसान।

जागरण टीम, पटना। बिहार में 14 जिलों की 44 लाख की आबादी बाढ़ के पानी के बीच घिरी है। गुरुवार को बाढ़ के पानी में डूबने से एक ही परिवार के चार समेत सात लोगों की मौत हो गई।

गंगा समेत सभी प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। बाढ़ की वजह से पटना के उद्योग जगत को एक अरब (100 करोड़ रुपये) की क्षति हुई है।

इधर, किसान बाढ़ का पानी उतरने का इंतजार कर रहे, ताकि खराब हुई फसलों का लोखा-जोखा कर सकें। सरकार भी आकलन करने का प्रयास कर रही।

गंगा, पुनपुन, सोन और दरधा के जलस्तर में लगातार गिरावट के बावजूद बाढ़ का असर व्यापक बना हुआ है। भोजपुर में गंगा अब भी खतरे के निशान से 1.02 मीटर ऊपर है और छह प्रखंडों की करीब छह लाख आबादी प्रभावित है।

फसल हुआ बर्बाद

पटना जिले के 11 प्रखंडों में करीब 10 हजार हेक्टेयर फसल बर्बाद हुई है। मक्का, धान और सब्जियों को नुकसान पहुंचा है। पुनपुन में धान-मक्का और दानापुर में सब्जी की फसल का नुकसान अधिक है।

खतरे के निशान से ऊपर बह रही गंगा

पटना में गुरुवार को गंगा खतरे के निशान से 1.38 मीटर ऊपर है। बाढ़ से उद्योग भी प्रभावित हुए हैं। दीदारगंज, फतुहा और पुनपुन की आधा दर्जन से अधिक फैक्ट्रियों में करीब एक सप्ताह से उत्पादन बंद है।

1 अरब से अधिक की नुकसान

उद्योग जगत के अनुसार उत्पादन ठप होने और सामान के नुकसान से एक अरब से अधिक की क्षति का अनुमान है। वैशाली के राघोपुर में बाढ़ के पानी में डूबने से एक किशोर की मौत हो गई।

समस्तीपुर में गंगा खतरे के निशान से 1.90 मीटर ऊपर बह रही। डूबी सड़कें और बाधित आवागमन के बीच लोगों की जिंदगी ठहर गई है।

भागलपुर में एक ही परिवार के चार सदस्यों समेत पांच और खगड़िया में दो की डूबने से मौत हो गई। भागलपुर में गंगा अब भी खतरे के निशान से ऊपर है। यहां कहलगांव की 13 और नाथनगर की नौ पंचायतें जलमग्न हैं। मुंगेर में गंगा खतरे के निशान से 48 सेमी ऊपर है।

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