सुपौल-सहरसा और खगड़िया के कई गांवों में बाढ़, वीरपुर बराज के 34 फाटक खोले गए
नेपाल और तराई क्षेत्रों में लगातार बारिश से बिहार में गंगा, कोसी और बागमती नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। ...और पढ़ें

बिहार के सहरसा जिले में बिरजाईन-महुआ चाही सड़क को काटकर बहती कोसी नदी। (जागरण)
HighLights
बीरपुर बराज के 34 फाटक खोले गए, कोसी का जलस्तर बढ़ा।
सुपौल, सहरसा, खगड़िया में बाढ़, कई गांवों में पानी घुसा।
सड़कें कटीं, कटाव जारी, जनजीवन बुरी तरह प्रभावित।
जाटी, पटना। नेपाल और तराई क्षेत्रों में लगातार हो रही वर्षा के कारण गंगा और कोसी तंत्र की नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। गुरुवार को बीरपुर बराज पर कोसी नदी का जलस्राव ढाई लाख क्यूसेक के करीब पहुंच गया।
बढ़ते जलस्राव को देखते हुए बराज के 56 में से 34 फाटक खोल दिए गए हैं। जलस्तर बढ़ने से सुपौल और सहरसा में तटबंध के भीतर और खगड़िया के निचले क्षेत्रों में पानी फैलने लगा है।
सुपौल जिले के सरायगढ़-भपटियाही प्रखंड के सियानी, ढोली, झखराही सहित कई गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। सियानी प्राथमिक विद्यालय परिसर में पानी भर जाने से पठन-पाठन ठप हो गया है, जबकि झखराही स्कूल और ढोली गांव कटाव की चपेट में है।
सहरसा के नवहट्टा में तटबंध के भीतर लाइफ लाइन मानी जानी वाली बिरजाईन-महुआ चाही सड़क का 30-40 फीट हिस्सा नदी में समा गया है।
2016-17 में 55 लाख रुपये से निर्मित इस सड़क की वर्तमान में सवा करोड़ से मरम्मत की जा रही थी। कटाव इतना भीषण है कि दर्जनों घर बह गए हैं। सड़क कटने से रसलपुर, भेलाही और रामजीटोला समेत दर्जनों गांवों का संपर्क टूट गया है और लोग नाव पर आश्रित हो गए हैं।
कमर तक बह रहा पानी
खगड़िया में कोसी खतरे के निशान से 95 सेंटीमीटर और बागमती 1.12 मीटर ऊपर बह रही है। बागमती का पानी मानसी प्रखंड के हियादपुर गांव को चारों ओर से घेर चुका है, यहां मुख्य सड़क पर कमर तक पानी बह रहा है।
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वहीं, गंगा और बूढ़ी गंडक के जलस्तर में भी लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। गंगा का पानी परबत्ता के दियारा क्षेत्रों (माधवपुर, तेमथा करारी) में फैल रहा है, जिससे किसानों और पशुपालकों के लिए चारे का संकट गहराने लगा है।
पूर्णिया के बायसी अनुमंडल में कनकई और दास नदियों के उफान से सिमलबाड़ी और हरिपुर पंचायत में तेज कटाव हो रहा है।
हरिपुर की सड़क नदी में विलीन हो चुकी है। बैसा प्रखंड के डुमरिया गांव में बीते 24 घंटे में करीब 50 मीटर उपजाऊ जमीन नदी में समा चुकी है।
इधर, बांका में लगातार वर्षा के कारण तारा मंदिर के समीप रेलवे फाटक के पास मुख्य सड़क धंस गई है। इससे आवागमन प्रभावित हो गया है।
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