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    ग्लोबल हुआ बिहार का 'सुपरफूड', GI Tag मखाना की पहली खेप ऑस्ट्रेलिया के लिए रवाना

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 07:46 PM (IST)

    बिहटा से 18 टन जीआई-टैग मिथिला मखाना की पहली समुद्री खेप ऑस्ट्रेलिया के लिए रवाना हुई, जो बिहार की कृषि क्षमता को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाएगी। यह पह ...और पढ़ें

    सात समंदर पार बिहार का स्वाद: सीधे ऑस्ट्रेलिया रवाना हुई 18 टन मिथिला मखाना की पहली खेप (AI Generated Image)

    सात समंदर पार बिहार का स्वाद: सीधे ऑस्ट्रेलिया रवाना हुई 18 टन मिथिला मखाना की पहली खेप (AI Generated Image)

    HighLights

    1. 18 टन जीआई-टैग मिथिला मखाना ऑस्ट्रेलिया निर्यात।

    2. बिहार की कृषि क्षमता को वैश्विक पहचान मिलेगी।

    3. किसानों की आय और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

    राज्य ब्यूरो, पटना। बिहटा स्थित आधुनिक इंटीग्रेटेड इर्रेडिएशन-कम-पैकहाउस (कॉमन फैसिलिटी सेंटर) से शुक्रवार को 18 टन जीआई-टैग मिथिला मखाना की पहली समुद्री निर्यात खेप को ऑस्ट्रेलिया के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

    इस अवसर पर कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि यह केवल एक निर्यात खेप नहीं, बल्कि बिहार के किसानों की मेहनत, उद्यमियों की प्रतिबद्धता तथा राज्य की कृषि क्षमता का वैश्विक स्तर पर परिचय है। यह पहल राज्य में कृषि उत्पादों के निर्यात को नई गति प्रदान करेगी। किसानों की आय में वृद्धि के साथ रोजगार के नए अवसर सृजित करेगी।

    उन्होंने कहा कि अब तक बिहार में उत्पादित मखाना का निर्यात अन्य राज्यों के माध्यम से किया जाता रहा है, किंतु राज्य सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में अधिकाधिक मखाना का निर्यात सीधे बिहार से हो। इसके लिए आवश्यक आधारभूत संरचना को सुदृढ़ किया जा रहा है। निर्यात से संबंधित सभी प्रक्रियाओं को सरल एवं सुगम बनाया जाएगा।

    विदित हो कि बिहार का देश के कुल मखाना उत्पादन में लगभग 90 प्रतिशत योगदान है। मिथिला मखाना अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता, उच्च पोषण मूल्य, कम वसा, ग्लूटेन-रहित गुणों तथा एंटीऑक्सीडेंट विशेषताओं के कारण विश्व स्तर पर सुपर फूड के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

    ऑस्ट्रेलिया को भेजी गई यह खेप एशिया-प्रशांत क्षेत्र सहित अन्य विकसित देशों के बाजारों में बिहार के मखाना की पहुंच को और सुदृढ़ करेगी।

    उन्होंने कहा कि मखाना उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन एवं निर्यात से जुड़े किसानों, किसान उत्पादक संगठनों, उद्यमियों तथा निर्यातकों को व्यापक स्तर पर जागरूक किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रसंस्करण, गुणवत्ता संवर्धन, पैकेजिंग एवं मूल्य संवर्धन के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे।

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    उन्होंने कहा कि ग्रामीण स्तर पर मखाना की खरीद-बिक्री व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं वैज्ञानिक बनाया जाएगा। माप-तौल से संबंधित व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करते हुए पारंपरिक तौली प्रणाली के स्थान पर वजन आधारित खरीद-बिक्री व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाएगा, जिससे किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य प्राप्त हो सके।

    कृषि विभाग, एपीडा, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), किसान उत्पादक संगठनों, निर्यातकों तथा अन्य संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से आधुनिक पैकहाउस, शीत श्रृंखला, भंडारण तथा परिवहन संबंधी आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विकास किया जा रहा है।

    मंत्री ने कहा कि पिछले डेढ़ वर्ष के दौरान बिहार से जीआई-टैग एवं मूल्य संवर्धित मखाना का अमेरिका, कनाडा, संयुक्त अरब अमीरात, चीन, न्यूजीलैंड तथा अब ऑस्ट्रेलिया को सफलतापूर्वक निर्यात किया जा रहा है। इससे स्पष्ट है कि बिहार न केवल देश का सबसे बड़ा मखाना उत्पादक राज्य है, बल्कि कृषि उत्पादों के निर्यात के क्षेत्र में भी तेजी से अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर रहा है।